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'कभी दावा ही नहीं किया हमने बनाया', चीनी रोबोडॉग विवाद मामले में Galgotias University की सफाई

Published: Wed, 18 Feb 2026 12:57 PM (IST)

दिल्ली में आयोजित एआई समिट में गलगोटिया यूनिवर्सिटी के एआई डॉग को लेकर विवाद गहरा गया है। चीन ने आरोप ...और पढ़ें

गलगोटिया यूनिवर्सिटी विवाद। सोशल मीडिया

गलगोटिया यूनिवर्सिटी विवाद। सोशल मीडिया

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जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा। दिल्ली में आयोजित एआई समिट में प्रदर्शित एआई डॉग का मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ रहा है। चीन ने एआई डॉग की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल कर गलगोटिया यूनिवर्सिटी पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

आरोप है कि यूनिवर्सिटी की ओर से पेश एआई डॉग को एआई समिट में मेक इन इंडिया यानी उनके छात्रों द्वारा तैयार किए जाने का दावा किया जा रहा है। वहीं, अभी तक यूनिवर्सिटी प्रबंधन की ओर एआई समिट में खुद का प्रोडक्ट बताकर प्रदर्शित किया जा रहा है।

इसका एक पोस्ट भारत सरकार की ऑफिशियल एक्स प्लेटफार्म पर भी किया गया है। वहीं, चीन के लगाए गए आरोपों के बाद मामला तूल पकड़ रहा है। मामले में अब गलगोटिया यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने कहा कि हमने दावा ही नहीं किया है कि यह एआई डॉग हमने बनाया है।

रोबोटिक डॉग के प्रदर्शन को लेकर हुए विवाद के बीच गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने कहा कि उसने कभी इसे बनाने का दावा नहीं किया। यूनिवर्सिटी ने स्थिति स्‍पष्‍ट करते हुए कहा कि रोबोटिक डॉग को शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए चीन की एक कंपनी से खरीदा गया है।

विश्‍वविद्यालय प्रबंधन ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर कहा कि ये रोबोटिक डॉग, चीन की ग्‍लोबल रोबोटिक्स कंपनी यूनिट्री से लिया गया है और छात्रों के लिए एक लर्निंग टूल के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।

सोशल मीडिया पर और कुछ रिपोर्ट्स में ऐसा दावा किया गया था कि विश्वविद्यालय ने एआई समिट में यूनिट्री गो2 रोबोटिक डॉग को 'ओरियन' नाम से प्रदर्शित किया। इसकी कीमत दो से तीन लाख रुपये बताई जाती है।

स्‍वदेशी इनोवेशन के तौर पर किया गया पेश 

इसके बाद सोशल मीडिया पर विश्वविद्यालय की आलोचना होने लगी कि इंपोर्टेड तकनीक को स्‍वदेशी इनोवेशन के तौर पर पेश किया गया। हमने कभी दावा नहीं किया कि विश्वविद्यालय ने यह भी बताया कि यह रोबोटिक डॉग छात्रों द्वारा सक्रिय रूप से इस्तेमाल किया जा रहा है, जहां वे इसकी क्षमताओं को परख रहे हैं और वास्तविक जीवन में इसके उपयोगों को समझने की कोशिश कर रहे हैं। अमेरिका से लेकर चीन तक की एडवांस तकनीक लाते हैं।

विश्वविद्यालय ने कहा कि उसका मुख्य उद्देश्य हमेशा छात्रों को दुनिया की अत्याधुनिक तकनीकों से परिचित कराना रहा है, ताकि वे भविष्य के नवाचारों के लिए तैयार हो सकें। बयान में कहा गया, 'अमेरिका से लेकर चीन और सिंगापुर तक, हम एडवांस तकनीकों को कैंपस में लाते हैं, क्योंकि एक्सपोजर विजन पैदा करता है और विजन क्रिएटर्स बनाता है।'

गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने अपने शैक्षणिक इरादे पर जोर देते हुए कहा कि नवाचार को सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता और सीखने का दृष्टिकोण वैश्विक होना चाहिए। बयान में कहा गया, 'यह तकनीक आयात करने की बात नहीं है, बल्कि बदलाव के लिए प्रेरित करने की बात है। हमारे छात्र वैश्विक इनोवेशन का अध्ययन करते हैं, उन्हें चुनौती देते हैं और बेहतर बनाने की कोशिश करते हैं, ताकि भविष्य में भारत से दुनिया के लिए विश्वस्तरीय समाधान तैयार कर सकें।

विश्वविद्यालय ने यह भी कहा कि वह आगे भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकसित नई तकनीकों को लाता रहेगा, ताकि छात्रों को हैंड्स-आन अनुभव मिल सके और ऐसा इकोसिस्टम तैयार हो, जहां युवा इनोवेटर्स लंबे समय में स्वदेशी समाधान विकसित कर सकें।

गलगोटियाज में हम, फैकल्टी और स्टूडेंट्स, हमारी यूनिवर्सिटी के खिलाफ प्रोपेगैंडा कैंपेन से बहुत दुखी हैं। हम साफ-साफ कहना चाहेंगे कि रोबोटिक प्रोग्रामिंग हमारी कोशिश का हिस्सा है ताकि स्टूडेंट्स एआई प्रोग्रामिंग सीख सकें और दुनिया भर में मौजूद टूल्स और रिसोर्स का इस्तेमाल करके रियल वर्ल्ड स्किल्स डेवलप और डिप्लाय कर सकें, क्योंकि एआई टैलेंट डेवलप करना आज के समय की जरूरत है।

हमारी यूनिवर्सिटी का विजन स्टूडेंट्स की लर्निंग और इनोवेशन पर फोकस्ड है और हम स्टूडेंट्स को मॉडर्न टेक्नोलॉजी तक एक्सेस देते हैं ताकि वे प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस ले सकें और भविष्य के लिए तैयार हो सकें।

नेगेटिविटी फैलाने से स्टूडेंट्स का हौसला टूट सकता है, जो ग्लोबल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके इनोवेशन करने, सीखने और अपनी स्किल्स बनाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं।

गलगोटिया यूनिवर्सिटी को एआई समिट से बाहर किया

चीनी रोबोट को अपना बताए जाने से हुई किरकिरी के बाद गलगोटिया यूनिवर्सिटी को एआई समिट से बाहर कर दिया गया है और यूनिवर्सिटी के स्टॉल पर से सारे उपकरण हटा लिए गए हैं। यह घटना न केवल शैक्षणिक जगत में चर्चा का विषय बनी, बल्कि राजनीतिक हलकों में भी तूफान ले आई।

बता दें कि दिल्ली में आयोजित एआई समिट में गलगोटिया यूनिवर्सिटी की ओर से रोबोटिक डॉग प्रस्तुत किया गया था। जिस पर चीन ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था कि यह गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने उनसे खरीदा है और एआई समिट में अपना बताकर पेश कर रहे हैं।

इसके बाद से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीति शुरू हो गई है और गलगोटिया यूनिवर्सिटी की फजीहत हो रही है। वहीं, पवेलियन खाली कराई जाने को लेकर विश्वविद्यालय प्रबंधन ने चुप्पी साज रखी है।