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पत्नी की हत्या के दोषी पिता को उम्रकैद, साकेत कोर्ट में 6 साल की बेटी की खामोशी ने झकझोरा

By Rais Rais Edited By: Sonu Suman
Published: Sun, 12 Jul 2026 08:28 PM (IST)

साकेत कोर्ट ने पत्नी की हत्या के दोषी पिता को उम्रकैद की सजा सुनाई, जहां छह वर्षीय बेटी की खामोशी ...और पढ़ें

पत्नी की हत्या के दोष में पति को उम्रकैद की सजा।

पत्नी की हत्या के दोष में पति को उम्रकैद की सजा।

HighLights

  1. पिता को पत्नी की हत्या के आरोप में उम्रकैद की सजा।

  2. छह वर्षीय बेटी की खामोश उपस्थिति ने कोर्ट को झकझोरा।

  3. दिल्ली विधिक सेवा प्राधिकरण बच्ची के मुआवजे पर विचार करेगा।

जागरण संवाददाता, दक्षिणी दिल्ली। पारिवारिक कलह से लेकर हत्या और मारपीट से जुड़े न जाने कितने मामले रोजाना कोर्ट में आते हैं, पर कुछ विरले ऐसे भी होते हैं, जो इंसान होने के नाते हमें भीतर तक झकझोर देते हैं। ऐसा ही एक मामले साकेत कोर्ट में भी शनिवार को आया। मां के हत्यारे पिता के सामने बेबस खड़ी छह वर्षीय मासूम की खामोश निगाहें हर न्यायप्रिय लोगों के दिलों को चीर रही थीं। उस खामोशी में यही सवाल था कि ''भला मेरा क्या कसूर?''।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनुज अग्रवाल ने सजा के आदेश में लिखा कि उस खामोश मुलाकात में ही इस मामले की असली त्रासदी छिपी थी। एक बच्ची जो अपनी मां से वंचित हो गई और आज से कानून के आदेश के कारण अपने पिता से भी अलग हो गई।

पत्नी के चरित्र पर बेबुनियाद शक के कारण उसकी हत्या

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने आरोपित सुभाष बेरा को अपनी पत्नी के चरित्र पर बेबुनियाद शक के कारण उसकी हत्या करने के लिए उम्रकैद और 10,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। साथ ही उन्होंने दिल्ली लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (दक्षिण-पूर्व) को निर्देश दिया कि वे दिल्ली पीड़ित मुआवजा योजना के तहत बच्ची के लिए मुआवजे और पुनर्वास के मामले पर विचार करे। यह मामला 14 नवंबर, 2022 को दोषी की पत्नी की हत्या से जुड़ा है।

कोर्ट ने पाया कि दंपती नौकरी की तलाश में घटना से दो महीने पहले ही बंगाल से दिल्ली पहुंचा था। घटना से कुछ समय पहले उनके बीच झगड़ा हुआ था, जिसमें आरोपित ने मृतका के चरित्र पर शक जताया था। धमकी दी थी कि अगर उसने अपना कथित अफेयर खत्म नहीं किया तो वह उसे मार डालेगा।

महिला की मौत गला घोंटने से हुई

पोस्टमार्टम रिपोर्ट व फोरेंसिक सबूतों से साबित हुआ कि महिला की मौत गला घोंटने से हुई थी। तीन जुलाई को अदालत ने बचाव पक्ष के उस दावे को खारिज कर दिया जिसमें किसी तीसरे व्यक्ति की भूमिका की बात कही गई थी। अदालत ने कहा कि दंपती को आखिरी बार एक साथ देखे जाने और शव मिलने के बीच का समय बहुत कम था।

अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे पता चले कि कमरे में किसी तीसरे व्यक्ति की पहुंच थी या मौत आरोपित के अलावा किसी और के कारण हो सकती थी।

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