दिल्ली दंगा: ताहिर हुसैन को दंगा भड़काने के लिए 2 साल की जेल, अदालत बोली- भीड़ को घर की छत देना अपराध में मदद
कड़कड़डूमा कोर्ट ने पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को दिल्ली दंगों से जुड़े एक मामले में दो साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।

ताहिर हुसैन को 2 साल की जेल।
HighLights
पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को दो साल का कठोर कारावास।
दिल्ली दंगों में दंगा भड़काने और मदद करने का दोषी।
दंगाइयों को घर की छत उपलब्ध कराने का आरोप साबित।
सौरभ पांडेय, पूर्वी दिल्ली। दिल्ली दंगों से जुड़े एक मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने शुक्रवार को पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को दो वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह की अदालत ने उन पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
जुर्माना नहीं भरने पर उन्हें 10 दिन की अतिरिक्त साधारण कैद भुगतनी होगी। अदालत ने 10 अक्टूबर को ताहिर हुसैन को दंगा करने और अपराध के लिए उकसाने व मदद करने के आरोप में दोषी ठहराया था।
अदालत ने सजा सुनाते हुए कहा कि जनता के चुने हुए प्रतिनिधि होने के नाते उनकी जिम्मेदारी इलाके में शांति और सद्भाव बनाए रखने की थी, लेकिन उन्होंने अपनी स्थिति का इस्तेमाल हिंसा में मदद करने के लिए किया।
दंगाइयों को घर की छत उपलब्ध कराने का आरोप
अभियोजन पक्ष ने अदालत में दलील दी कि खजूरी खास और करावल नगर रोड पर हुई हिंसा में ताहिर हुसैन का घर मुख्य केंद्र बना था। आरोप था कि उन्होंने दंगाइयों को अपने घर में पनाह दी और छत उपलब्ध कराई, जहां से भीड़ ने आम लोगों पर पत्थरों और अन्य वस्तुओं से हमला किया।
अदालत ने माना कि ताहिर हुसैन को दंगा मामले में दूसरी बार सजा सुनाई गई है। इससे पहले दयालपुर थाने से जुड़े एक अन्य मामले में भी उन्हें दोषी ठहराया जा चुका है।
मार्गदर्शन करने वाला हाथ भी उतना ही दोषी
सजा पर सुनवाई के दौरान अदालत ने ताहिर हुसैन की भूमिका पर सख्त टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि वर्ष 2020 में वह जनता के चुने हुए प्रतिनिधि थे और उनसे शांति बनाए रखने की अपेक्षा थी। इसके विपरीत, उन्होंने दंगाइयों को अपना घर उपलब्ध कराया। अदालत ने टिप्पणी की, 'जो हाथ मार्गदर्शन करता है, वह हमला करने वाले हाथ जितना ही, या उससे भी अधिक दोषी है।'
पीसीआर काल का ठोस साक्ष्य नहीं दे सके
बचाव पक्ष ने दलील दी कि ताहिर हुसैन दंगाइयों की भीड़ में शामिल नहीं थे और भीड़ ने उनके घर पर जबरन कब्जा कर लिया था। इस संबंध में पुलिस नियंत्रण कक्ष को सूचना देने की बात भी कही गई। हालांकि, अदालत ने कहा कि बचाव पक्ष पीसीआर काल का कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सका।
घर पर जबरन कब्जे की कोई आधिकारिक शिकायत भी दर्ज नहीं कराई गई थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि स्वयं भीड़ में शामिल नहीं होने से उनकी जिम्मेदारी समाप्त नहीं हो जाती, क्योंकि उन पर दंगाइयों को सुविधाएं उपलब्ध कराने का आरोप साबित हुआ।
अदालत में पेश सामाजिक-आर्थिक रिपोर्ट के अनुसार, दसवीं पास ताहिर हुसैन की मासिक आय करीब दो लाख रुपये है और उनके चार आश्रित सदस्य हैं। उनके खिलाफ पहले से नौ मामले दर्ज हैं। अदालत ने उन्हें जेल में बिताई गई अवधि का लाभ देने का भी निर्देश दिया है।
