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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 09, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

पराली के धुएं पर अंकुश के लिए हर दो सप्ताह में समीक्षा करेगा ईपीसीए

By JagranEdited By:
Published: Thu, 09 Jul 2020 08:07 PM (IST)

पराली पर अंकुश लगाने के लिए पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण एवं संरक्षण प्राधिकरण (ईपीसीए) अब हर दो सप्ताह में समीक्षा बैठक ...और पढ़ें

पराली के धुएं पर अंकुश के लिए हर दो सप्ताह में समीक्षा करेगा ईपीसीए
पराली के धुएं पर अंकुश के लिए हर दो सप्ताह में समीक्षा करेगा ईपीसीए

- दिल्ली सहित चार राज्यों के साथ गुरुवार को हुई पहली ऑनलाइन बैठक

- सुप्रीम कोर्ट के 28 फरवरी के हर निर्णय को सभी राज्यों को करना होगा लागू

राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली :

पराली पर अंकुश लगाने के लिए पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण एवं संरक्षण प्राधिकरण (ईपीसीए) अब हर दो सप्ताह में समीक्षा बैठक करेगा। इस दौरान पराली जलाने की घटनाओं पर नियंत्रण के उपायों की वस्तुस्थिति की जानकारी ली जाएगी।

सर्दी के मौसम में दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण और पराली के धुएं पर अंकुश के लिए गुरुवार को ईपीसीए की अहम बैठक हुई। इस दौरान ईपीसीए ने दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और केंद्र सरकार के अधिकारियों के साथ प्रदूषण नियंत्रण के लिए उठाए जा रहे कदमों की समीक्षा की।

बैठक में तय हुआ कि इस तरह की समीक्षा हर दो सप्ताह में की जाएगी। बैठक में सभी राज्यों को प्रदूषण व पराली के धुएं पर रोकथाम के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देनी होगी। ईपीसीए ने किसानों को पराली नहीं जलाने के लिए प्रोत्साहित करने के उपायों पर सुझाव मांगे।

ईपीसीए अध्यक्ष भूरेलाल ने बताया कि धान की बुआई हो चुकी है। अक्टूबर में कटाई शुरू हो जाएगी। इसी के साथ पराली जलाने की घटनाएं भी जोर पकड़ने लगती हैं। इसलिए केंद्र सरकार से भी इस मद में इस साल का बजट जल्द जारी करने को कहा गया।

वहीं, बैठक में शामिल ईपीसीए की सदस्य सुनीता नारायण ने बताया कि पराली जलाने पर रोक के लिए पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के किसानों को प्राथमिकता के आधार पर मशीनें बांटने पर भी चर्चा की गई।

राजनीतिक स्तर पर हंगामे और केंद्र व राज्य सरकारों के स्तर पर सख्ती के बावजूद बहुत से किसान पराली जलाते हैं। इस साल कोरोना संक्रमण से लोग पहले ही ही परेशान हैं। अगर पराली का धुआं भी दिल्ली एनसीआर में पहुंचा तो सांस के रोगियों को खासी दिक्कत झेलनी पड़ सकती है। इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए ईपीसीए ने पराली के धुएं से निपटने के लिए अभी से कमर कस ली है।