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क्या तरुण हत्याकांड में मुख्य आरोपी को दिल्ली पुलिस ने दिखाया था नाबालिग? द्वारका कोर्ट ने SHO को भेजा नोटिस

Published: Wed, 29 Jul 2026 02:55 PM (IST)

उत्तम नगर के तरुण हत्याकांड में द्वारका कोर्ट ने एसएचओ को नोटिस जारी कर एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी है। यह ...और पढ़ें

तरुण हत्याकांड मे एसएचओ को नोटिस जारी। फोटो: आर्काइव

तरुण हत्याकांड मे एसएचओ को नोटिस जारी। फोटो: आर्काइव

HighLights

  1. द्वारका कोर्ट ने उत्तम नगर एसएचओ को नोटिस भेजा।

  2. तरुण हत्याकांड के आरोपी के फर्जी जन्म प्रमाण पत्र का मामला।

  3. पुलिस से एक्शन टेकन रिपोर्ट दाखिल करने को कहा।

मुकेश ठाकुर, पश्चिमी दिल्ली। उत्तम नगर के हस्तसाल इलाके में होली की रात हुए तरुण हत्याकांड से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में द्वारका की न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (जेएमएफसी) अदालत ने उत्तम नगर थाना एसएचओ को नोटिस जारी कर एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) तलब की है।

मामला हत्या के मुख्य आरोपितों में शामिल उस आरोपित से जुड़ा है, जिसने स्वयं को नाबालिग बताया था। मृतक तरुण के स्वजन का आरोप है कि आरोपित को नाबालिग साबित करने के लिए आरोपित के स्वजन ने फर्जी जन्म प्रमाण पत्र तैयार कराया, लेकिन शिकायत दिए जाने के बावजूद पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज नहीं की।

इसी शिकायत पर अदालत ने संज्ञान लेते हुए पुलिस से जवाब मांगा है। दूसरी ओर, इस विवाद से संबंधित जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (जेजेबी) में चल रही कार्यवाही पर भी द्वारका की अपीलीय अदालत ने 1 अगस्त तक अंतरिम रोक लगा रखी है।

फर्जी जन्म प्रमाण पत्र तैयार कराने का आरोप

मृतक तरुण के चाचा टेकचंद ने अधिवक्ता सुमित चौहान के माध्यम से अदालत में परिवाद दायर किया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मुख्य आरोपित की मां, पिता और नाना ने उसे नाबालिग दर्शाने के उद्देश्य से फर्जी दस्तावेज तैयार किए।

शिकायतकर्ता का कहना है कि इस संबंध में उत्तम नगर थाना और द्वारका के पुलिस उपायुक्त को भी लिखित शिकायत दी गई थी, लेकिन किसी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया।

दो जन्म प्रमाण पत्रों को लेकर उठा विवाद

शिकायत के अनुसार, जांच के दौरान आरोपित का एक जन्म प्रमाण पत्र मिला, जिसमें उसकी जन्मतिथि 7 अक्टूबर 2007 दर्ज है और इसका पंजीकरण वर्ष 2008 में हुआ था। इस रिकार्ड के आधार पर हत्या के समय उसकी आयु करीब 18 वर्ष पांच माह बनती है।

वहीं आरोप है कि वर्ष 2018 में दूसरा जन्म प्रमाण पत्र तैयार कराया गया, जिसमें जन्मतिथि 7 अक्टूबर 2011 दर्ज कर उसे नाबालिग दिखाने का प्रयास किया गया था। शिकायतकर्ता का दावा है कि यह दस्तावेज मिलने के बाद पुलिस को भी उपलब्ध कराया गया था।

अदालत ने मांगी एटीआर, 15 सितंबर को अगली सुनवाई

28 जुलाई को हुई सुनवाई में न्यायिक मजिस्ट्रेट दीक्षा सेठी ने एसएचओ को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई से पहले एटीआर दाखिल करें। अदालत ने पुलिस से यह स्पष्ट करने को कहा है कि शिकायत प्राप्त हुई थी या नहीं, उसमें संज्ञेय अपराध बनता है या नहीं, उस पर क्या कार्रवाई की गई, प्राथमिकी दर्ज की गई या नहीं तथा यदि कार्रवाई में विलंब हुआ तो उसके कारण क्या रहे। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर तय की है।

वहीं, आरोपित की उम्र से जुड़े विवाद के कारण जेजेबी में लंबित कार्यवाही पर भी अपीलीय अदालत ने 1 अगस्त तक रोक लगाने का आदेश दिया है। उसी दिन अपीलीय अदालत द्वारा उस पर सुनवाई भी होनी है।

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