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सड़क हादसे में घायल MCD के पूर्व कर्मी को ₹1.06 करोड़ मुआवजे का आदेश, द्वारका कोर्ट का बड़ा फैसला

Published: Fri, 26 Jun 2026 07:27 PM (IST)

द्वारका डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने 2021 के सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए दिल्ली नगर निगम के पूर्व कर्मी ...और पढ़ें

सड़क हादसे में घायल पूर्व MCD कर्मी को द्वारका कोर्ट से मिला 1.06 करोड़ का मुआवजा। (AI Generated Image)

सड़क हादसे में घायल पूर्व MCD कर्मी को द्वारका कोर्ट से मिला 1.06 करोड़ का मुआवजा। (AI Generated Image)

HighLights

  1. द्वारका कोर्ट ने पूर्व MCD कर्मी को 1.06 करोड़ मुआवजा दिया।

  2. 2021 के ट्रक हादसे में बिशन दत्त शर्मा गंभीर घायल हुए थे।

  3. ट्रिब्यूनल ने 100% कार्यात्मक दिव्यांगता मानी, आजीविका असंभव।

जागरण संवाददाता, पश्चिमी दिल्ली। द्वारका डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के मोटर दुर्घटना दावा ट्रिब्यूनल ने दिल्ली नगर निगम के एक पूर्व कर्मी को 1.06 करोड़ रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया है। पीड़ित व्यक्ति वर्ष 2021 में हुए एक दर्दनाक ट्रक हादसे में पीड़ित गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिसके बाद वे जीवनयापन के लिए कोई भी काम करने में पूरी तरह असमर्थ हो गए।

ट्रिब्यूनल के पीठासीन अधिकारी धर्मेंद्र सिंह ने दुर्घटना के समय 57 वर्षीय बिशन दत्त शर्मा द्वारा दायर की गई मुआवजा याचिका पर यह फैसला सुनाया।

कोर्ट ने माना कि पीड़ित अब कमाने की स्थिति में नहीं

इस मामले में ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि आरोपित नूर अली नामक चालक द्वारा ट्रक को बेहद लापरवाही और तेज गति से चलाया जा रहा था, जिसने बिशन दत्त की मोटरसाइकिल को टक्कर मारी। हादसे की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने माना कि पीड़ित अब कमाने की स्थिति में नहीं हैं।

ट्रक ने बिशन दत्त की बाइक को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी

पेश मामले में 30 जून 2021 को द्वारका के धूलसिरस चौक पर यह दुर्घटना हुई थी, जब नूर अली के तेज रफ्तार ट्रक ने बिशन दत्त की बाइक को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी थी। इस हादसे में बिशन दत्त के दोनों पैरों में गंभीर चोटें आई थीं। डॉक्टरों ने उनके दोनों निचले अंगों में 77 प्रतिशत स्थायी शारीरिक दिव्यांगता प्रमाणित की थी। हादसे के बाद ये से न तो ठीक से चल पा रहे थे और न ही बैठ पा रहे थे। वे लगातार छुट्टी पर रहे और आखिरकार उन्हें स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेनी पड़ी।

उनके लिए अब आजीविका चलाना असंभव: ट्रिब्यूनल

ट्रिव्यूनल ने पीड़ित की उम्र, शिक्षा और मौजूदा शारीरिक स्थिति को देखते हुए माना कि उनके लिए अब आजीविका चलाना असंभव है, इसलिए उनकी कार्यात्मक दिव्यांगता को 100 प्रतिशत माना गया। पीठासीन अधिकारी ने कहा कि दावेदार की शारीरिक स्थिति को देखते हुए वे अब अपने जीवनयापन के लिए कोई काम नहीं ढूंढ पाएंगे। इन परिस्थितियों में ट्रिब्यूनल उनकी कार्यात्मक दिव्यांगता को 100 प्रतिशत तय करता है।

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