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DUSU Election 2026: EVM में वोट, जेब पर महंगाई का बोझ; छात्रों ने बताया PG से मेट्रो तक क्या हैं बड़े मुद्दे

Published: Fri, 18 Sep 2026 11:41 PM (IST)

डूसू चुनाव में छात्रों ने महंगे पीजी, हास्टल की कमी और सुरक्षा जैसे रोजमर्रा के मुद्दों पर मतदान किया। छात्रों ...और पढ़ें

दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस परिसर में छात्र संघ चुनाव के लिए वाेट डालने के लिए कतार में खड़ी छात्राएं और इवीएम को संचालित करती चुनावकर्मी। जागरण

दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस परिसर में छात्र संघ चुनाव के लिए वाेट डालने के लिए कतार में खड़ी छात्राएं और इवीएम को संचालित करती चुनावकर्मी। जागरण

HighLights

  1. महंगे पीजी और हास्टल की कमी छात्रों की मुख्य समस्या।

  2. सत्य निकेतन हादसे के बाद सुरक्षित आवास की मांग बढ़ी।

  3. पीजी किराए पर नियंत्रण और मेट्रो रियायत की मांग।

शशि ठाकुर, नई दिल्ली। डूसू चुनाव के दौरान छात्रों की अंगुलियां भले ही ईवीएम के बटन पर थी, लेकिन मतदान का केंद्र उनकी रोजमर्रा की परेशानियां रहीं।

किसी ने महंगे पीजी का दर्द साझा किया तो किसी ने हास्टल की कमी और बंद पड़े हास्टल खोलने की मांग उठाई। हाल में सत्य निकेतन में पीजी की इमारत ढहने की घटना के बाद छात्रों के बीच सुरक्षित और किफायती आवास का मुद्दा और गहरा गया है।

एक बेड के लिए चुकाने पड़ते हैं हजारों रुपये

दूसरे राज्यों आकर पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए पीजी का किराया बड़ी चिंता बना हुआ है। छात्रों का कहना है कि कालेज के आसपास एक बेड के लिए हजारों रुपये चुकाने पड़ते हैं और भोजन का खर्च अलग है। ऐसे में विश्वविद्यालय के हास्टल उपलब्ध कराने के साथ बंद पड़े हास्टलाें को दोबारा शुरू करने तथा उनकी स्थिति सुधारने की मांग भी मतदान के दौरान सुनाई दी।

छात्रों ने पीजी के किराये के लिए नीति बनाए जाने की जरूरत भी बताई। उनके अनुसार, पीजी किराए को नियंत्रित करने के लिए कोई व्यवस्था होनी चाहिए क्योंकि मालिक छात्रों से मनमाना किराया वसूलते हैं, और हम चाहते हैं कि कोई किराया नीति लागू की जाए।

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सत्य निकेतन हादसे के बाद आवास के साथ उसकी सुरक्षा भी छात्रों के एजेंडे में रही। कुछ छात्रों ने कहा कि सस्ता आवास तलाशने के चक्कर में सुरक्षा से समझौता नहीं होना चाहिए। जबकि, दूरी पर रहने वाले विद्यार्थियों ने आवागमन के खर्च को लेकर चिंता जताई।

एक छात्र अदिति के अनुसार, छात्र प्रति बेड लगभग 20 हजार रुपये तक दे रहे हैं, और वह भी बिना भोजन के। पहले से ही कालेज के खर्चों को संभाल रहे छात्रों के लिए इतना किराया देना बहुत मुश्किल है।

किराया रियायत में सस्ता मेट्रो पास और बेहतर परिवहन सुविधा की मांग मतदान के दौरान छात्रों के एजेंडे में रहा। उनका कहना था कि रोज दो-दो घंटे सफर करने वाले विद्यार्थियों पर किराये का अतिरिक्त बोझ पढ़ाई के खर्च को और बढ़ा देता है।

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इसके साथ ही फीस में बढ़ोतरी, छात्रवृत्ति, कैंपस में पानी, साफ-सफाई और बेहतर शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं भी छात्रों के मुद्दों में शामिल रहीं। कुछ छात्रों ने कालेज परिसरों में खाली पड़ी जगहों के बेहतर इस्तेमाल और उन्हें छात्र सुविधाओं के लिए विकसित करने की बात कही।

वहीं, मतदान के दौरान जातिवाद और बराबरी का मुद्दा भी गूंजा। लेकिन कई छात्रों ने कहा कि वोट देते समय उनके लिए छात्रहित, विकास, सुरक्षा और रोजमर्रा की सुविधाएं ज्यादा महत्वपूर्ण है। वहीं, डूसू चुनाव के परिणामों की घोषणा आज होगी।

छात्रों की बात

दूसरे राज्यों से आने वाले छात्रों के लिए सुरक्षित और सस्ता आवास जरूरी है। यहां निजी पीजी का किराया बहुत ज्यादा होने के साथ साथ सुरक्षा की कोई गारंटी नही है। पढ़ाई के साथ इतना किराया संभालने मुश्किल होता है।
- प्रतिष्ठा, डीयू छात्रा।

जो होस्टल अभी बंद पड़े है उन्हें सुविधाओं के साथ दोबारा खोला जाए और पीजी किराये पर लगाम लगाने के लिए कोई नीति भी बनानी चाहिए, ताकि छात्रों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े।
- शामली मौर्या, छात्रा।

छात्रों के लिए मेट्रो किराये में रियायत मिले तो रोज का खर्च कम होगा और जातिवाद के मुद्दे पर भी प्रतिनिधियों को बात करनी चाहिए।
- अनिरूद्ध, छात्र।
दूर से आने वाले छात्रों के लिए परिवहन बड़ा मुद्दा है। मेट्रो में छात्र रियायत के साथ सड़क और कनेक्टिविटी बेहतर होनी चाहिए।
- अनोदय, छात्र।

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