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DUSU चुनाव में हिंसा और नियमों के उल्लंघन पर दिल्ली हाई कोर्ट सख्त, रद करने की चेतावनी

Published: Thu, 17 Sep 2026 03:44 PM (IST)Updated: Thu, 17 Sep 2026 04:52 PM (IST)

डूसू चुनाव प्रचार में नियमों के उल्लंघन और हिंसा को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में अर्जी दाखिल की गई है। ...और पढ़ें

दिल्ली हाई कोर्ट।

दिल्ली हाई कोर्ट।

HighLights

  1. डूसू चुनाव प्रचार में लिंगदोह कमेटी नियमों का उल्लंघन।

  2. दिल्ली हाई कोर्ट ने चुनाव रद्द करने की चेतावनी दी।

  3. हिंसा, मारपीट और बाहरी तत्वों की मौजूदगी पर नाराजगी।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव के प्रचार के दौरान लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों, एंटी-डिफेसमेंट गाइडलाइंस और अदालती निर्देशों के बड़े पैमाने पर उल्लंघन का आरोप लगाते हुए एक लंबित याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट में अर्जी दायर की गई है।

गुरुवार को अर्जी का उल्लेख मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष किया गया और अदालत ने मामले पर तत्काल सुनवाई पर सहमति व्यक्त की।

आज ही हुई सुनवाई

वहीं, सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता व अधिवक्ता प्रशांत मनचंदा ने कहा कि अदालत ने 2025 में कुछ निर्देश जारी किए थे और याचिका के लंबित होने के बावजूद, बुधवार को कुछ उम्मीदवारों के साथ मिलकर उपद्रवियों ने पूरे डीयू कैंपस इलाके पर कब्जा कर लिया। उनके पास बंदूकें और पेचकस थे। प्रोफेसरों के साथ मारपीट की गई।

उन्होंने कहा कि बुधवार का दिन डूसू चुनावों के इतिहास का सबसे काला दिन था। विधि के छात्रों की पिटाई सिर्फ इसलिए की गई क्योंकि वे तस्वीरें ले रहे थे। वहां लाठियाें के साथ बाहरी लोग और गुंडे थे।

अदालत ने मामले काे गंभीरता से लेते हुए कहा कि हर साल यह हो रहा है और एक के बाद एक आदेश पारित होने के बाद भी स्थिति नहीं बदल रही है।

अब लापरवाही बर्दाश्त नहीं

पूरे प्रकरण पर सख्त नाराजगी व्यक्त करते हुए पीठ ने कहा कि अब बहुत हो गया है, इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती है। अगर डीयू लिंगदो कमेटी की सिफारिशों को लागू नहीं कर सकता है तो अदालत को बताए।

अदालत की सख्त टिप्पणी

अदालत ने कहा कि डीयू को चुनाव रद करने या उन्हें टालने का निर्णय लेना होगा। अदालत ने कहा कि इस तरह की लापरवाही, इस तरह का आपराधिक व्यवहार, आपराधिक आचरण हो रहा है। हो सकता है कि प्राधिकरी जिम्मेदार न हो, लेकिन छात्र तो हैं।

पीठ ने कहा कि अदालत इसकी अनुमति नहीं दे सकते। पीठ ने कहा कि प्रत्याशी शिक्षकों की पिटाई कर रहे हैं और बंदूकें लहरा रहे हैं।

हम चुनाव रद कर देंगे

पीठ ने डीयू प्रशासन से दो टूक कहा कि अगर आप इसे नियंत्रित नहीं कर सकते, तो हम चुनाव रद कर देंगे। अगर आप अपना काम नहीं कर सकते, तो हम चुनाव रद कर देंगे। अगर आप ऐसा करने में असमर्थ हैं, तो कृपया हमें बताएं।

क्या आपने तस्वीरें देखी हैं?

पीठ ने चेतावनी दी कि हम चुनाव रद कर देंगे और जब हमें यकीन हो जाएगा कि ऐसी कोई गुंडागर्दी नहीं होगी, तभी हम चुनाव होने देंगे। डीयू की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता मोहिंदर रूपल ने कहा कि चुनाव प्रचार कल ही खत्म हो गया था। पीठ ने डीयू अधिवक्ता से सवाल किया कि क्या आपने तस्वीरें देखी हैं? यह अदालत के आदेश का साफ उल्लंघन है।

सुनवाई के दौरान एडिशनल सालिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा क मैं पूरी तरह सहमत हूं कि यह हरकत बिल्कुल निंदनीय है और दोषियों को सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बुधवार शाम 5 बजे के बाद कोई प्रचार नहीं हुआ और कैंपस में पूरी तरह शांति है।

इस पर पीठ ने सवाल किया कि उससे पहले क्या हुआ? एएसजी ने कहा कि जो भी दोषी है, उसे सजा मिलनी चाहिए। पीठ ने कहा कि क्या वे आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन नहीं कर रहे हैं? अगर वे आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करते हैं, तो उसका क्या नतीजा होगा?

इस पर एएसजी ने कहा कि हम कल इस पर जवाब देंगें। इस पर पीठ ने कहा कि कल चुनाव है और हम इसे टाल देंगे। हम इस मामले की जांच करेंगे और चुनाव में सिर्फ उन्हीं उम्मीदवारों को शामिल होने देंगे जो ऐसी गतिविधियों में शामिल नहीं हैं।

पीठ ने कहा कि हमें अच्छी तरह पता है कि हम एक लोकतांत्रिक समाज हैं, लेकिन हमें यह भी पता है कि इस लोकतंत्र को आपराधिक समाज में नहीं बदला जा सकता।

एएसजी ने कहा कि याचिकाकर्ता एक राजनीतिक पार्टी का सदस्य है। हालांकि, प्रशांत मनचंदा ने इससे इनकार किया।

इस पर पीठ ने कहा कि यह मामला आपके और कोर्ट के बीच है। अगर प्रशासन और दिल्ली यूनिवर्सिटी की तरफ से ऐसी नाकामी रही है, तो आप चुनाव कैसे होने देंगे?

 

अयोग्य घोषित करने की मांग

डूसू के विभिन्न पदों के लिए शुक्रवार को मतदाना होना है। अर्जी में तय नियमों को सख्ती से लागू करने और नियमों का उल्लंघन करने वाले उम्मीदवारों और समर्थकों को अयोग्य घोषित करने की मांग की गई है।

उचित कार्रवाई की मांग

बताया कि इसमें उन अधिकारियों के खिलाफ भी उचित कार्रवाई की मांग की गई है, जो निगरानी रखने और गाइडलाइंस को लागू करने में नाकाम रहे हैं।

वहीं, सुनवाई के दौरान याचिककार्ता व अधिवक्ता प्रशांत मनचंदा ने बताया कि तोड़फोड़ और उल्लंघन की घटनाएं हुई हैं।

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