पोस्टर से पोस्ट तक संग्राम: DUSU चुनाव में बदला प्रचार का तरीका, इंस्टाग्राम और एक्स बने नए चुनावी मैदान
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डूसू) चुनाव का प्रचार अब पारंपरिक तरीकों से हटकर मोबाइल स्क्रीन और इंटरनेट मीडिया पर केंद्रित हो गया है।

सांकेतिक तस्वीर एआई जनरेटेड
HighLights
डूसू चुनाव प्रचार अब मोबाइल स्क्रीन और इंटरनेट मीडिया पर केंद्रित।
छात्र संगठन डिजिटल पोस्ट, रील्स, वीडियो संदेशों से कर रहे प्रचार।
एबीवीपी, एनएसयूआई, एसएफआई जैसे संगठन डिजिटल मंच पर सक्रिय।
लोकेश शर्मा, नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डूसू) चुनाव का प्रचार अब केवल कैंपस की गलियों, दीवारों और नुक्कड़ सभाओं तक सीमित नहीं है।
चुनावी जंग मोबाइल स्क्रीन तक पहुंच चुकी है। 18 सितंबर को होने वाले मतदान से पहले छात्र संगठनों ने इंटरनेट मीडिया को प्रचार का प्रमुख माध्यम बना लिया है।
पोस्टर, रील, वीडियो संदेश और घोषणापत्र के जरिये मतदाताओं तक पहुंचने की होड़ मची है। कैंपस में आमने-सामने की नारेबाजी के साथ अब डिजिटल मंच पर भी संगठनों की सक्रियता दिखाई दे रही है। सवाल यह है कि इंटरनेट मीडिया पर बढ़ता चुनावी शोर छात्रों के वास्तविक मुद्दों को कितना स्थान दे रहा है।

पोस्टर की जगह डिजिटल पोस्ट, प्रचार का नया मैदान
डूसू चुनाव में एबीवीपी, एनएसयूआई, एसएफआई और एएसएपी समेत विभिन्न छात्र संगठन अपने-अपने प्रत्याशियों और मुद्दों को इंटरनेट मीडिया के माध्यम से छात्रों तक पहुंचा रहे हैं।
चुनाव प्रचार के पारंपरिक तरीकों के साथ डिजिटल पोस्टर और वीडियो संदेशों का इस्तेमाल बढ़ा है। प्रत्याशियों के समर्थन में पोस्ट साझा किए जा रहे हैं।
घोषणापत्र के प्रमुख बिंदुओं को भी डिजिटल माध्यम से सामने रखा जा रहा है। इससे चुनावी गतिविधियां कैंपस से बाहर रहने वाले विद्यार्थियों तक भी पहुंच रही हैं।

एबीवीपी का घोषणापत्र और प्रत्याशियों पर जोर
एबीवीपी ने अपने चुनावी घोषणापत्र के मुद्दों को इंटरनेट मीडिया पर प्रमुखता दी है। संगठन के प्रत्याशियों के समर्थन में पोस्टर और वीडियो साझा किए जा रहे हैं।
छात्रावास, भागीदारी और छात्रहित से जुड़े मुद्दों को प्रचार सामग्री में स्थान दिया गया है। संगठन अपने चुनावी संदेशों को विद्यार्थियों तक पहुंचाने के लिए डिजिटल मंच का इस्तेमाल कर रहा है।
NSUI का अकाउंटेबल डीयू अभियान
एनएसयूआई ने अकाउंटेबल डीयू, अकाउंटेबल डूसू अभियान के जरिये छात्रों के बीच अपनी बात रखने का प्रयास किया है। संगठन की ओर से जारी घोषणापत्र और चुनावी संदेशों को इंटरनेट मीडिया पर साझा किया जा रहा है।
जवाबदेही और छात्रहित से जुड़े विषयों को अभियान का हिस्सा बनाया गया है। प्रत्याशियों के समर्थन में भी डिजिटल प्रचार किया जा रहा है।

एसएफआई और एएसएपी भी डिजिटल मैदान में
एसएफआई छात्र मुद्दों को लेकर इंटरनेट मीडिया पर सक्रिय है। संगठन की ओर से अपने प्रत्याशियों और चुनावी मुद्दों को सामने रखा जा रहा है।
वहीं एएसएपी ने बदलाव के घोषणापत्र और अपने प्रत्याशियों के संदेशों को डिजिटल मंच पर प्रमुखता दी है। वीडियो, पोस्ट और अन्य प्रचार सामग्री के माध्यम से मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
डिजिटल शोर में मुद्दों की परीक्षा
डूसू चुनाव प्रचार में इंटरनेट मीडिया की बढ़ती भूमिका ने चुनावी संवाद का दायरा बढ़ाया है। हालांकि, चुनावी प्रचार की असली परीक्षा मतदान के दिन होगी।
विद्यार्थियों के लिए छात्रावास, फीस, सुरक्षा, कक्षाओं और सुविधाओं जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में यह देखना होगा कि डिजिटल प्रचार में इन मुद्दों पर कितनी गंभीर चर्चा होती है और संगठन अपने वादों को किस तरह विद्यार्थियों के सामने रखते हैं।
