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800 की कुर्ती, 6 हजार की ठगी और 30 करोड़ का सिंडिकेट... इंस्टाग्राम पर ऐसे चल रहा था फ्रॉड का 'खेल'

Published: Mon, 26 Oct 2026 02:40 PM (IST)

दिल्ली विश्वविद्यालय की एक छात्रा के साथ इंस्टाग्राम पर कुर्ती खरीदने के नाम पर हुई ठगी की जांच में 30 ...और पढ़ें

30 करोड़ का साइबर फ्रॉड नेटवर्क।

30 करोड़ का साइबर फ्रॉड नेटवर्क।

HighLights

  1. इंस्टाग्राम कुर्ती खरीद के नाम पर छात्रा से ठगी।

  2. पुलिस ने 30 करोड़ का साइबर फ्रॉड नेटवर्क पकड़ा।

  3. फर्जी कंपनियों से बैंक खाते उपलब्ध कराते थे आरोपी।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। इंस्टाग्राम पर कुर्ती खरीदने के नाम पर दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा से 6,450 रुपये की ठगी की जांच में नार्थ जिला पुलिस ने 30 करोड़ रुपये से अधिक के साइबर फ्राड नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने ग्रेटर नोएडा और कानपुर में छापेमारी कर सात आरोपितों को गिरफ्तार किया है।

जांच में सामने आया कि आरोपित फर्जी कंपनियां बनाकर बैंक खाते खुलवाते थे और कमीशन के बदले इन खातों को साइबर ठगों तक पहुंचाते थे। इन खातों में 30 करोड़ रुपये से अधिक के क्रेडिट ट्रांजेक्शन का पता चला है। देश के अलग-अलग राज्यों से इस नेटवर्क से जुड़ी साइबर धोखाधड़ी की 27 शिकायतें मिली हैं।

आरोपितों के कब्जे से बरामद हुए दस्तावेज

पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से 20 मोबाइल फोन, 45 सिम कार्ड, 39 पीओएस मशीनें, 33 डेबिट कार्ड, 28 चेकबुक, 15 स्कैनर, दो लैपटाप और कई बैंकिंग दस्तावेज बरामद किए हैं।

पुलिस के अनुसार, इलाहाबाद की रहने वाली और दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कालेज की छात्रा फातिमा ने साइबर नार्थ थाने में शिकायत दी थी। उन्हें इंस्टाग्राम पर काव्य_कुर्ती_हब' नाम के अकाउंट पर कुर्ती का विज्ञापन दिखा। वट्सएप के जरिये 799 रुपये का आर्डर देने के बाद उन्होंने 400 रुपये एडवांस दिए।

इसके बाद पार्सल डिलीवरी और रिफंड के नाम पर उनसे अलग-अलग किस्तों में कुल 6450 रुपये वसूल लिए गए। न पार्सल मिला और न रकम वापस हुई। इस संबंध में चार सितंबर को प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की गई।

200 मोबाइल नंबरों की जांच से खुलासा

एसीपी विशेष धत्तरवाल के मार्गदर्शन और एसएचओ रोहित गहलोत की देखरेख में गठित टीम ने करीब 200 मोबाइल नंबरों और आइएमईआइ की जांच की। डिजिटल रिकार्ड और बैंकिंग लेनदेन खंगालने के बाद पुलिस ग्रेटर नोएडा स्थित कंपनियों तक पहुंची।

16 अक्टूबर को छापेमारी में छह आरोपित गिरफ्तार किए गए, जबकि 21 अक्टूबर को कानपुर से सातवें आरोपित उदित प्रताप सिंह भदौरिया को पकड़ा गया।

हर महीने मिलते थे 25 हजार रुपये 

पुलिस के मुताबिक, आरोपितों ने किजेनटेक साल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, एग्जीक्यूटिव एज और नेक्सकोर के नाम से काम किया। पूछताछ में सामने आया कि बैंक खाते उपलब्ध कराने के बदले कुछ लोगों को हर महीने 25 हजार रुपये तक दिए जाते थे।

एमबीए पास आरोपित गौरव पांडे खातों को कमीशन पर आगे पहुंचाने वाले सिंडिकेट की अहम कड़ी था। पुलिस अब बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों की जांच कर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों का पता लगा रही है।

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