विदेश में पढ़ाई के लिए DU की नई गाइडलाइंस, 7.5 CGPA वाला नया फॉर्मूला लागू; 66% अटेंडेंस भी जरूरी
डीयू ने इरास्मस मोबिलिटी कार्यक्रम के तहत विदेश में पढ़ाई और शोध के लिए नए नियम जारी किए हैं। अब ...और पढ़ें

दिल्ली में विदेश में पढ़ाई के लिए बदले नियम। फोटो: आर्काइव
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। डीयू ने इरास्मस मोबिलिटी कार्यक्रम के तहत विदेश में पढ़ाई और शोध का अवसर पाने वाले छात्रों, पीएचडी शोधार्थियों और शिक्षकों के चयन के लिए नए नियम निर्धारित किए हैं।
विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार की ओर से जारी अधिसूचना में पात्रता से लेकर चयन के मूल्यांकन मानकों तक का विस्तृत ब्योरा दिया गया है। नई व्यवस्था में शैक्षणिक प्रदर्शन के साथ साक्षात्कार, शोध प्रस्ताव और विदेशी विश्वविद्यालय में शोध पर्यवेक्षक की उपलब्धता को महत्व दिया गया है।
अकादमिक रिकॉर्ड का सबसे अधिक महत्व
नियमों के अनुसार, आवेदन करने वाले छात्र का डीयू में पंजीकृत होना जरूरी है। पिछले सेमेस्टर में कोई पेपर दोबारा देने की स्थिति नहीं होनी चाहिए। न्यूनतम 66.67 प्रतिशत उपस्थिति, निर्धारित भाषा दक्षता और कम से कम दो वर्ष की वैधता वाला पासपोर्ट भी अनिवार्य है।
सामान्य, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के छात्रों के लिए न्यूनतम 7.5 सीजीपीए, जबकि एससी-एसटी वर्ग के लिए 6.5 सीजीपीए निर्धारित किया गया है। इससे पहले नेट-जेआरएफ करने वाले छात्रों को सीधे इस कार्यक्रम के तहत जाने का अवसर मिलता था।
लेकिन नई शिक्षा नीति के तहत अब 7.5 सीजीपीए अनिवार्य होगा। पहले इस कार्यक्रम के तहत मोबिलिटी का लाभ उठा चुके छात्र दोबारा पात्र नहीं होंगे। चयन में शैक्षणिक रिकॉर्ड को 50 प्रतिशत और साक्षात्कार को 30 प्रतिशत वेटेज मिलेगा।
स्टेटमेंट ऑफ पर्पस, फैकल्टी की सिफारिश, शोध एवं अकादमिक योगदान और उपस्थिति को पांच-पांच प्रतिशत वेटेज दिया जाएगा।
पीएचडी शोधार्थियों के लिए शोध प्रस्ताव जरूरी
पीएचडी शोधार्थियों के लिए कोर्सवर्क पूरा करना अनिवार्य है। उन्हें अकादमिक सुपरवाइजर की सिफारिश, भाषा दक्षता का प्रमाण और विदेशी विश्वविद्यालय के अस्थायी सुपरवाइजर की सहमति प्रस्तुत करनी होगी।
चयन में रिसर्च प्रपोजल को 40 प्रतिशत, साक्षात्कार को 30 प्रतिशत, विदेशी सुपरवाइजर की विशेषज्ञता और शोध विषय के सामंजस्य को 20 प्रतिशत तथा यूजीसी-सीएसआईआर नेट या जेआरएफ को 10 प्रतिशत वेटेज मिलेगा।
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