पिंक कार्ड लेकर निकलीं महिलाएं, DTC बसों में ETM ने बढ़ाई मुश्किल; मशीन अटकी तो छूट गया स्टॉप
डीटीसी बसों में महिलाओं के लिए पिंक कार्ड से मुफ्त यात्रा की शुरुआत के पहले दिन ईटीएम मशीनों में खराबी ...और पढ़ें

आइटीओ के समीप विकास मार्ग डीटीसी बस में इटीएम मशीन में पिंक कार्ड स्कैन कराने के लिए भीड़ में जददोजहद करती महिलाएं। जागरण
HighLights
ईटीएम मशीनें अटकने से यात्रा में देरी और जुर्माने का डर।
कई महिलाओं को पिंक कार्ड की अनिवार्यता की जानकारी नहीं थी।
कंडक्टरों द्वारा नियमों के पालन में असमानता देखी गई।
शशि ठाकुर, नई दिल्ली। पिंक कार्ड हाथ में है और अगले स्टाप पर उतरना है, लेकिन ईटीएम मशीन अटक गई है। कंडक्टर भी मायूसी जताते हुए कहते हैं कि मशीन चलने तक इंतजार करना पड़ेगा।
आइटीओ से शाहदरा जा रही कामकाजी महिला बुशरा खान के सामने सोमवार को यही सवाल खड़ा था कि निश्शुल्क यात्रा का अधिकार कार्ड से मिलेगा या मशीन के ठीक रहने पर। पिंक टिकट नहीं निकला तो चेकिंग में 200 रुपये जुर्माने का डर और मशीन चलने का इंतजार करें तो अपनी मंजिल छूटने का खतरा।
डीटीसी बसों में पिंक कार्ड व्यवस्था लागू होने के पहले दिन की यह तस्वीर बयां कर रही थी कि नियम लागू करने की तैयारी और उसे जमीन पर उतारने की व्यवस्था के बीच अभी भी अंतर है।
यह केवल बुशरा की ही परेशानी नहीं, बल्कि पहले दिन कई महिला यात्रियों की उलझन बनकर सामने आया। कार्ड होने के बावजूद ईटीएम अटकने पर यात्रा दर्ज कराने में दो से पांच मिनट तक लगे। अगले स्टाप पर उतरने वाली महिलाओं के लिए यह महज मशीन की तकनीकी दिक्कत नहीं थी। भीड़ के बीच हर बार मशीन के दोबारा चालू होने और कार्ड टैप होने का इंतजार करना पड़ा।
कार्ड नहीं रखने पर देना पड़ा किराया
इसी तरह, कार्ड घर पर रह गया, अब पता चल रहा है कि इसके बिना निश्शुल्क यात्रा नहीं मिलेगी। मंडी हाउस से आनंद पर्वत जा रही सोनिया और मनीषा के पास पिंक कार्ड नहीं था। कार्ड बनवाया है, लेकिन तब इस्तेमाल नहीं हो रहा था।
पहले दिन कंडक्टर ने नियम समझाकर दोनों को निश्शुल्क पास जारी कर दिया। मगर कुछ दूसरी बसों में कार्ड नहीं रखने वाली महिलाओं को किराया देना पड़ा। इससे पहले दिन ही यह सवाल खड़ा हो गया कि नियम एक है तो उसका पालन हर बस में एक जैसा क्यों नहीं दिखा?
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हमें पता ही नहीं था कि कार्ड आज से साथ रखना जरूरी है। एक महिला यात्री की यह बात बताती है कि समस्या तकनीक तक सीमित नहीं थी। पिंक कार्ड को लेकर यात्रियों में जानकारी का भी अभाव दिखा। कार्ड बनवाने की सूचना थी, लेकिन हर यात्रा में कार्ड साथ रखना अनिवार्य होगा, यह बात कई महिलाओं को बस में पहुंचने के बाद पता चली। यानी व्यवस्था लागू होने से पहले सूचना पहुंचाने की जिम्मेदारी पूरी तरह असरदार नहीं रही।
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कार्ड दिखा दिया, फिर भी मशीन के लिए इंतजार करना पड़ा। ईटीएम की समस्या ने व्यवस्था की सबसे कमजोर कड़ी सामने ला दी। पिंक कार्ड होने के बावजूद यात्रा दर्ज करने की प्रक्रिया कंडक्टर और मशीन पर निर्भर है।
मशीन अटक गई तो महिला के पास न तो खुद टैप करने का विकल्प था और न ही तत्काल ऐसी वैकल्पिक प्रक्रिया नजर आई, जिससे वह बिना आशंका के अगले स्टाप पर उतर सके।
बस संख्या 623 में सुबह से ईटीएम के कई बार अटकने की बात कंडक्टर ने भी स्वीकार की। यहां 27 महिलाओं की यात्रा पिंक कार्ड से दर्ज हुई, जबकि 17 महिलाओं के पास कार्ड नहीं था। उन्हें निश्शुल्क पास जारी किया गया।
नियम समझाने में लगा अतिरिक्त समय
यानी एक ही बस में कार्ड टैप करने, मशीन की दिक्कत दूर करने और कार्ड नहीं रखने वाली महिलाओं के लिए अलग पास बनाने की तीन प्रक्रियाएं साथ चलती रहीं। शाम को कामकाजी महिलाओं और छात्राओं की भीड़ बढ़ी तो इसका असर और साफ दिखा।
कार्ड टैप करने की प्रक्रिया के साथ कंडक्टरों को नियम समझाने और निश्शुल्क पास बनाने में अतिरिक्त समय देना पड़ा। वहीं, दिल्ली परिवहन निगम का कहना है कि पांच अक्टूबर से केवल पिंक धारक महिलाएं की डीटीसी बसों में निश्शुल्क यात्रा कर सकेंगी अन्यथा किराया देकर टिकट लेना होना।
अभी शुरुआत में सामने आ रही दिक्कतों का आंकलन किया जाएगा। इसके बाद व्यवस्था की जाएगी।
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