दिल्ली में तीसरे दिन DTC बसों की हड़ताल का हुआ व्यापक असर, 6,000 से अधिक बसें नहीं उतरीं
दिल्ली में डीटीसी चालकों की हड़ताल तीसरे दिन भी जारी रही, जिससे 90% से अधिक बसें सड़कों से नदारद रहीं ...और पढ़ें

दिल्ली में डीटीसी चालकों की हड़ताल तीसरे दिन भी जारी रही।
HighLights
90% से अधिक डीटीसी बसें तीसरे दिन भी सड़कों से नदारद।
40 लाख से अधिक यात्री प्रभावित, सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था चरमराई।
मेट्रो में भारी भीड़, ऑटो-टैक्सी चालकों ने मनमाना किराया वसूला।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) चालकों की हड़ताल का असर तीसरे दिन बृहस्पतिवार को व्यापक रहा। 90 प्रतिशत से अधिक बसें डिपो में खड़ी रहीं तो उससे प्रतिदिन यात्रा करने वाले 40 लाख से अधिक यात्री सड़कों पर बेहाल रहे। बड़ी बात कि हड़ताल के चलते कार्यालयों में कर्मियों तथा स्कूलों में छात्रों की मौजूदगी कम हो गई है।
राजधानी की जीवनरेखा मानी जाने वाली डीटीसी बसों के सड़कों से नदारद रहने से दिल्ली की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। आंदोलन का आह्वान करने वाले संगठन डीटीसी कर्मचारी एकता यूनियन ने 100 प्रतिशत हड़ताल सफल होने का दावा किया तो डिपो से निकली आधा दर्जन से अधिक डीटीसी बसों में विभिन्न मार्गों पर तोड़फोड़ की भी घटना हुई।
इस बीच, आटो, टैक्सी, ई-रिक्शा व एप बेस्ड कैब व बाइक टैक्सी ने मनमाने किराया वसूले। मेट्रो में यात्रियों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। एमसीडी, एनडीएमसी के साथ ही बाराखंभा के कई कार्यालयों में कर्मचारी कम पहुंचे। जबकि, पटपड़गंज, मंदिर मार्ग स्थित स्कूलों में छात्रों की संख्या कम रही, क्योंकि उनमें छात्रों को लाने ले जाने के लिए डीटीसी की बसें लगी हुई हैं। जबकि, जो बाहर निकले, वह हड़ताल के चलते देरी से कार्यालय या घरों को पहुंचे।
इस बीच, परिवहन मंत्री डा. पंकज सिंह द्वारा हड़ताल खत्म कराने की कोशिशें तेज हो गई है। उनकी मौजूदगी में डीटीसी मुख्यालय में इलेक्ट्रिकल बसों का प्रबंध करने वाली कंपनियों के प्रतिनिधियों तथा आंदोलनरत कर्मचारियों के नेताओं की बैठक हुई, लेकिन हल नहीं निकला।
चालक यूनियन के महासचिव मनाेज शर्मा ने कहा कि निजी कंपनियां उनकी मांगों को मानने में आनाकानी कर रही है। इसलिए हड़ताल आगे जारी रहेगा। स्थिति यह कि कुल साढ़े छह हजार बसों में 6,000 से अधिक बसें सड़कों से नदारद रही।
डिपो पर पसरा सन्नाटा, बातचीत बेनतीजा
रानी खेड़ा, राजघाट, नेहरू प्लेस, बुराड़ी, वजीरपुर, घुम्मनहेड़ा और सरिता विहार समेत कई प्रमुख बस डिपो पर लगातार तीसरे दिन सन्नाटा पसरा रहा या चालक विरोध प्रदर्शन करते नजर आए। चालकों का कहना है कि वे महज 862 रुपये के न्यूनतम दैनिक वेतन पर काम करने को मजबूर हैं, जो कि दैनिक श्रमिकों के समान है।
प्रदर्शनकारी चालक सोनू बेनीवाल ने कहा कि जब तक सरकार ठेकेदारों से जुड़ी समस्याओं का ठोस समाधान नहीं निकालती, शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रहेगा। इस बीच, बस चालकों द्वारा द्वारका मोड़, द्वारका सेक्टर एक ट्रैफिक लाइट, सेक्टर छःट्रैफिक लाइट, उत्तम नगर बस डिपो, तिलक नगर मेन रोड पर दो लेन बसे लगाकर सड़क पर यातायात को बाधित करने का प्रयास किया गया।
ऑटो, टैक्सी व ईरिक्शा की चांदी, मजबूरी में लुट रहे यात्री
बस अड्डों और स्टाप पर घंटों इंतजार करने के बाद भी जब बसें नहीं मिल रही हैं, तो लोग भारी परेशानी का सामना कर रहे हैं। इस स्थिति का सीधा फायदा आटो, ई-रिक्शा और कैब चालक उठा रहे हैं। दिल्ली भर के प्रमुख चौराहों और बस स्टैंडों पर आटो चालकों द्वारा मनमाना किराया वसूलने की शिकायतें सामने आती रही।
कृषि भवन बस स्टाप पर खड़े संजय शर्मा ने बताया कि उन्हें वसंत कुंज जाना है, लेकिन एक घंटे से कोई बस नहीं आई। आइटीओ पर खानपुर जाने को खड़ी शबनम ने बताया कि लंबे इंतजार के बाद जब बसें नहीं आई तो आटो बुक की कोशिश की, लेकिन वे सभी दोगुना तक किराया मांग रहे हैं।
विकास मार्ग बस स्टाप पर खड़े यात्रियों ने तीन गुना तक किराया मांगने की शिकायत की। सुल्तानपुरी, मंगोलपुरी, बुध विहार, रोहिणी, बवाना सहित कई क्षेत्रों में बस यात्रियों को भारी मुश्किल हुई। ऐसे में घरों से कामकाज के लिए घरों से निकले लोगों को काफी समय सड़कों पर खड़ा रहना पड़ा।
सुल्तानपुरी व मंगोलपुरी में चलने वाले आटो रिक्शा व ग्रामीण सेवा चालक यात्रियों से तय किराये से अतिरिक्त किराया वसूल रहे है। लोग समय से घर लौटने के अधिक किराया देने को मजबूर दिखाई दिए।
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