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DSGMC चुनाव: सिख राजनीति में सरगर्मी तेज, भाजपा नेताओं की शिअद स्टेट से नजदीकी के कारण बढ़ी सरना की बेचैनी

Published: Sat, 03 Oct 2026 08:07 AM (IST)

डीएसजीएमसी चुनाव अगले साल फरवरी तक होने की उम्मीद है, जिससे सिख राजनीति में सरगर्मी तेज हो गई है। भाजपा ...और पढ़ें

दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) का चुनाव।

दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) का चुनाव।

HighLights

  1. डीएसजीएमसी चुनाव अगले वर्ष फरवरी तक होने की संभावना।

  2. भाजपा नेताओं की शिअद दिल्ली स्टेट से नजदीकी बढ़ी।

  3. शिअद बादल ने भाजपा से गठबंधन पर स्पष्टीकरण मांगा।

राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) का चुनाव अगले वर्ष फरवरी तक होने की उम्मीद है। इसे लेकर सिख राजनीति में सरगर्मी तेज होने लगी है।

डीएसजीएमसी अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका के नेतृत्व वाली शिरोमणि अकाली दल दिल्ली स्टेट (शिअद दिल्ली स्टेट) के सामने कमेटी की सेवा बरकरार रखने की चुनौती है।

वहीं, शिरोमणि अकाली दल बादल (शिअद बादल) अपनी खोई हुई सत्ता वापस पाने के प्रयास में है। उसके नेता भाजपा पर शिअद दिल्ली स्टेट को समर्थन करने का आरोप लगा रहे हैं।

भाजपा गुरुद्वारा चुनाव नहीं लड़ती है, लेकिन पहले राजनीतिक गठबंधन होने के कारण भाजपा के कई सिख नेता शिअद बादल के उम्मीदवारों के पक्ष में खड़े दिखते थे। अब स्थिति बदल गई है। पार्टी के सिख नेताओं की नजदीकी शिअद दिल्ली स्टेट के साथ है।

भाजपा कर रही तैयारी

दिल्ली सरकार में मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा इनके कार्यक्रमों में भी शामिल होते हैं। इससे शिअद बादल की बेचैनी बढ़ रही है। अकाली नेता परमिंदर पाल सिंह का कहना है कि पंजाबी बाग सहित कई स्थानों पर शिअद दिल्ली स्टेट के कार्यक्रमों व बैठकों में सिरसा शामिल हो रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि दोनों पार्टियों के बीच गठबंधन है। भाजपा इनके साथ मिलकर गुरुद्वारा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है।

शिअद बादल के प्रदेश अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना ने इसे लेकर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा को पत्र भी लिखा है।

प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष गठबंधन हुआ है?

उनका कहना है कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या उनकी पार्टी का दिल्ली स्टेट के साथ कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष गठबंधन हुआ है? यदि भाजपा डीएसजीएमसी चुनाव में भागीदारी करना चाहती है, तो उसको इसकी घोषणा करनी चाहिए।

वहीं, भाजपा नेताओं का कहना है कि भाजपा न तो कभी गुरुद्वारा चुनाव लड़ी है और न ही इसमें कोई हस्तक्षेप करती है। भविष्य में इसे लेकर अभी कोई विचार भी नहीं है।

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