राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली

गंगाराम अस्पताल के डॉक्टरों ने एक युवक की सर्जरी कर उसके मस्तिष्क से तमंचे की गोली के छर्रो के 100 से अधिक टुकड़े निकाले हैं। डॉक्टरों ने इसके लिए पांच घंटे लंबी सर्जरी की। सर्जरी के इतने दिनों बाद अब युवक के स्वास्थ्य में सुधार है, इसलिए डॉक्टरों ने उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी है। हालांकि उसके शरीर का दायां हिस्सा अभी पूरी तरह से काम नहीं कर रहा है। परिजनों के अनुसार, डॉक्टरों का कहना है कि धीरे-धीरे दायें हाथ-पैर में भी ताकत आ जाएगी।

सोनिया विहार निवासी युवक रामू ने बताया कि उसके भाई राधेश्याम स्टील कबाड़ मार्केट में ठेकेदारी का काम करते हैं। वह मूलरूप से उत्तर प्रदेश के बस्ती के रहने वाले हैं। विगत 3 जुलाई की शाम को राधेश्याम अपने घर के पास सर्विस रोड पर टहल रहे थे। इस दौरान, उन्हें किसी ने आवाज दी तो वह पुस्ता रोड पर चले गए। तभी किसी ने उन्हें बेहद नजदीक से सिर में गोली मार दी। अभी यह पता नहीं चल पाया है कि गोली किसने मारी। इस घटना के बाद परिजन उन्हें लेकर इलाज के लिए लोकनायक अस्पताल के सुश्रुत ट्रॉमा सेंटर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने पर्याप्त सुविधा नहीं होने की बात कहकर दूसरे अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी। इसके बाद परिजन उसे नजदीक के एक निजी अस्पताल में ले गए। वहां से राधेश्याम को 4 जुलाई को तड़के चार बजे गंगाराम अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया।

अस्पताल के वरिष्ठ न्यूरो सर्जन डॉ. समीर के. कालरा ने बताया कि जिस वक्त पीड़ित को अस्पताल लाया गया, वह बेहोश था। उसके सिर से काफी रक्तस्त्राव हो रहा था। इमरजेंसी में सबसे पहले डॉक्टरों ने उसका रक्तस्त्राव बंद किया। साथ ही उसे आइसीयू में वेंटिलेटर सपोर्ट के सहारे रखा गया। उसके मस्तिष्क का सीटी स्कैन कराया गया तो हैरान करने वाली बात सामने आई। मस्तिष्क में जगह-जगह छर्रे के टुकड़े फंसे दिखे। यह सर्जरी बेहद जटिल थी, इसलिए अस्पताल ने डॉ. समीर के नेतृत्व में पांच डॉक्टरों की टीम गठित की।

डॉ. समीर ने बताया कि सर्जरी के दौरान सिर का ऊपरी हिस्सा खोलने के बाद पता चला कि मस्तिष्क के बाएं हिस्से को काफी नुकसान पहुंचा था। अधिक रक्तस्त्राव के कारण खून के थक्के बने हुए थे। इसके अलावा, छर्रे के टुकड़े मस्तिष्क में गहराई तक घुस गए थे। सभी टुकड़ों को एक-एक कर निकाला गया। साथ ही मस्तिष्क में बने खून के थक्के को ठीक से साफ किया गया। शुरुआत में पीड़ित को देखकर उसके बचने की उम्मीद कम लग रही थी, लेकिन गनीमत रही कि उसके शरीर के महत्वपूर्ण अंग प्रभावित नहीं हुए थे। मस्तिष्क में हल्का संक्रमण था, जो ठीक हो गया। पीड़ित युवा है, संभवत: इस वजह से वह परिस्थितियों से जूझ सका। उसे अब हल्का खाना भी दिया जा रहा है, लेकिन गले में सांस लेने के लिए ट्यूब डाली गई है, इसलिए अभी वह बोल नहीं पा रहा है। कुछ दिनों में ट्यूब निकाल दी जाएगी, जिसके बाद वह बोलने लगेगा।

पीड़ित के भाई ने कहा कि पुलिस ने घटना के बारे में राधेश्याम से तीन बार बयान लिया, लेकिन वह इशारे में ही बता पा रहे हैं। इस वजह से ज्यादा समझ नहीं आ रहा कि वह क्या कहना चाहते हैं। दायां हाथ अभी ठीक से काम नहीं कर पाने के कारण वह लिख भी नहीं पा रहे हैं।

दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक युवक को .315 बोर के कट्टे से बहुत नजदीक से गोली मारी गई प्रतीत होती है। जिस तरह से सिर में छर्रे घुसे हैं, वह भी यही संकेत करते हैं कि गोली सिर में जाकर फट गई, जिससे छर्रे के टुकड़े पूरे मस्तिष्क में बिखर गए।

Posted By: Jagran

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