दिल्ली में 78 साल की बुजुर्ग को 10 दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर ठगे 2.20 करोड़, पांच साइबर ठग दबोचे
दिल्ली में 78 वर्षीय बुजुर्ग को 10 दिनों तक 'डिजिटल अरेस्ट' कर 2.20 करोड़ रुपये ठगने वाले अंतरराज्यीय साइबर सिंडिकेट ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर।
HighLights
78 वर्षीय बुजुर्ग से 2.20 करोड़ रुपये की ठगी।
10 दिनों तक 'डिजिटल अरेस्ट' कर फंसाया गया।
पांच अंतरराज्यीय साइबर ठग गिरफ्तार, यूपी-एमपी से पकड़े।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। 78 साल के बुजुर्ग को दस दिनों तक डिजिटल अरेस्ट कर उनसे 2.20 करोड़ रुपये की ठगी मामले में स्पेशल सेल की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रेटेजिक ऑपरेशंस (आईएफएसओ) यूनिट ने एक अंतरराज्यीय साइबर सिंडिकेट के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया है।
फर्जी बैंक खातों का इस्तेमाल किया
साइबर अपराधियों ने लखनऊ स्थित पुलिस मुख्यालय से पुलिस इंस्पेक्टर बनकर बुजुर्ग को वाट्सएप काल कर झांसे में लिया था और उनके खिलाफ मनी लांड्रिंग से संबंधित दो लंबित मामले में गिरफ्तारी वारंट निकलने का डर दिखा ठगी की थी। आराेपितों को मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया गया। आरोपित म्यूल खाते में पैसे लेगे फिर उक्त खातों से पैसे निकालने के लिए उन्नत डिजिटल उपकरणों और फर्जी बैंक खातों का इस्तेमाल कर रहे थे।
अलग-अलग पेशे का करते थे दिखावा
डीसीपी आईएफएसओ विनीत कुमार के मुताबिक गिरफ्तार किए गए साइबर अपराधी समाज में अलग-अलग तरीके के कामों से जुड़े हुए थे। उनके नाम हैं...
- दीपेश पाटीदार, बड़वानी, एमपी (इलेक्ट्राॅनिक रिपेयर की दुकान चलाता है)।
- अंशुल राठौड़, ठिकरी, बड़वानी, एमपी (शादी समारोह में म्यूजिक सिस्टम देता है)।
- श्याम बाबू गुप्ता, हमीरपुर, यूपी (झांसी में प्लास्टिक प्लेट बनाने की छोटी यूनिट चलाता है)।
- राघवेंद्र वर्मा, शिप्री बाज़ार, झांसी, यूपी (ग्रेजुएट है और झांसी में मोटरसाइकिल एक्सेसरीज़ की दुकान चलाता है)।
- देवेश सिंह, झांसी, यूपी (आईटीआई डिप्लोमा कर बीटेक में दाखिला लिया, फेसबुक एड के जरिए खरीदा गया एक इंटरनेशनल नंबर भी इस्तेमाल कर रहा था) है।
- पुलिस ने बताया कि इनके कब्जे से अलग-अलग फर्मों की रबर स्टैम्प, चेक बुक, सात मोबाइल फोन, अलग-अलग बैंकों के 20 डेबिट कार्ड व आधार कार्ड की कापी बरामद किए गए हैं।
फर्जी गिरफ्तारी केस नंबर दिखाया
पीड़ित को लखनऊ पुलिस मुख्यालय से सुमित मिश्रा नाम के एक व्यक्ति का फोन आया था, जिसने उन्हें मनी लांड्रिंग से संबंधित दो मामले में गिरफ्तारी वारंट निकलने के बारे में जानकारी दी थी। पीड़ित की उम्र ज़्यादा होने और थाने जाने में असमर्थता के कारण, ठगों ने उन्हें डिजिटल गिरफ्तारी प्रक्रिया शुरू की और एक फर्जी गिरफ्तारी केस नंबर दिखाया।
वाट्सएप वीडियो कॉल कर निगरानी में रखा
इसके बाद, 'प्रेम कुमार गौतम' नाम के एक दूसरे काॅलर ने पीड़ित से संपर्क कर बताया कि उनके आधार कार्ड का दुरुपयोग किया गया है। डर दिखाने के बाद उसने उनकी संपत्ति नकदी और प्राॅपर्टी के बारे में जानकारी प्राप्त कर लिया। डर पैदा करने के बाद पीड़ित को चौबीसों घंटे वाट्सएप वीडियो निगरानी में रखा गया।
कई खातों में जमा कराई गई रकम
इस दौरान उन्हें घर से बाहर न निकलने व किसी से संपर्क न करने का निर्देश दिया गया। आरोपितों ने एक फर्जी सीबीआई कार्यालय सेटअप बनाकर और एक वकील के रूप में पेश होने वाले व्यक्ति को तैनात करके पीड़ित पर मनोवैज्ञानिक दबाव भी डाला। इस तरह उन्हें 26 नवंबर से चार दिसंबर तक विभिन्न खातों में 2,19,18,000 रुपये ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया गया।
एक करोड़ रुपये ट्रांसफर किए
मोटी रकम वसूलने के बाद जब उन्हें डिजिटल अरेस्ट से मुक्त कर दिया गया तब पांच दिसंबर को पीड़ित ने आइएफएसओ में शिकायत की। पुलिस ने केस दर्ज कर एसीपी प्रेम चंद्र खंडूरी व इंस्पेक्टर सुनील कुमार के नेतृत्व में बैंक खातों की जानकारी हासिल कर जांच शुरू की। गहन के दौरान पुलिस टीम ने पहले दीपेश पाटीदार के बारे में पता लगाया जिसके खाते में पीड़ित के खाते से एक करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए थे।
दो अन्य आरोपित को भी गिरफ्तार किया
इसके बाद एक और आरोपित अंशुल राठौड़ की पहचान की गई। पुलिस टीम ने जबलपुर, इंदौर, प्रयागराज, झांसी और लखनऊ में लगातार छापेमारी कर तीन आरोपित श्याम बाबू गुप्ता, राघवेंद्र वर्मा और देवेश सिंह को लखनऊ के एक होटल से गिरफ्तार कर लिया गया। इन्होंने बैंक खाता दिलाने में मदद की थी और ठगी के पैसे को कई खातों में ट्रांसफर किया था। बाद में दो अन्य आरोपित को भी गिरफ्तार कर लिया गया।
