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'बुलियन से बर्तनों तक बंपर बिक्री', धनतेरस पर टूटे सारे रिकॉर्ड; 1.25 लाख करोड़ के पार पहुंचा कारोबार

Published: Fri, 06 Nov 2026 05:33 PM (IST)

इस धनतेरस पर देशभर में खुदरा व्यापार ने 1.25 लाख करोड़ रुपये का नया कीर्तिमान स्थापित किया, जो मजबूत उपभोक्ता ...और पढ़ें

धनतेरस पर खुदरा व्यापार का नया इतिहास। AI जनरेटेड इमेज

धनतेरस पर खुदरा व्यापार का नया इतिहास। AI जनरेटेड इमेज

HighLights

  1. धनतेरस पर खुदरा व्यापार ने 1.25 लाख करोड़ का रिकॉर्ड बनाया।

  2. सोने-चांदी का कारोबार 66 हजार करोड़ से अधिक रहा।

  3. स्वदेशी अपनाओ अभियान से स्थानीय कारीगरों को लाभ मिला।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। इस वर्ष धनतेरस के पावन पर्व पर देशभर में खरीदारी का ऐसा अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला, जिसने भारतीय खुदरा व्यापार के इतिहास में नया कीर्तिमान रच दिया है।

पारंपरिक आस्था, मजबूत उपभोक्ता विश्वास और घरेलू अर्थव्यवस्था में छाई नई ऊर्जा के दम पर इस बार धनतेरस का कुल कारोबार 1.25 लाख करोड़ के आंकड़े को पार कर गया है। इस महाउत्सव में बुलियन से लेकर ऑटोमोबाइल, बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक्स और परिधानों तक में बाजार के हर कोने में ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री व चांदनी चौक से सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि धनतेरस ने एक बार फिर देश के पारंपरिक बाजारों की अजेय ताकत को साबित कर दिया है।

उन्होंने बताया कि इस बार के त्योहारी सीजन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वदेशी अपनाओ के आह्वान का व्यापक असर दिखा है, जिससे स्थानीय कारीगरों, शिल्पकारों और एमएसएमई क्षेत्र को अभूतपूर्व लाभ मिला है।

कैट के ज्वैलरी चैप्टर आल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (एआइजेजीएफ) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज अरोड़ा के मुताबिक, कीमती धातुओं की कीमतों में तेजी के बावजूद ग्राहकों के उत्साह में कोई कमी नहीं आई। धनतेरस के दिन सोने का भाव लगभग एक लाख 44 हजार प्रति 10 ग्राम और चांदी का भाव लगभग एक लाख 90 हजार प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया।

इसके बावजूद, अकेले सोने-चांदी का कारोबार 66 हजार करोड़ से अधिक का रहा, जबकि केवल राजधानी दिल्ली के बुलियन बाजारों में ही 10 हजार करोड़ से ज्यादा का व्यापार हुआ। उपभोक्ताओं ने भारी-भरकम गहनों के साथ-साथ हल्के वजन के पारंपरिक आभूषणों और चांदी के सिक्कों की खरीदारी को प्राथमिकता दी।

विदेशी झटके बेअसर

एआइजेजीएफ ने रत्न व आभूषण क्षेत्र के शानदार प्रदर्शन को रेखांकित करते हुए बताया कि चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही (अप्रैल–सितंबर) के दौरान इस क्षेत्र का विदेशी व्यापार भी काफी मजबूत रहा। इस अवधि में कुल 1,82,995 करोड़ का सोने का धातु आयात और 22,923 करोड़ का चांदी का धातु आयात दर्ज किया गया।

वहीं दूसरी ओर, देश के कुशल कारीगरों के हुनर का लोहा मानते हुए सादे व जड़ाऊ तैयार सोने के आभूषणों का निर्यात 59,266 करोड़ तथा चांदी के आभूषणों का निर्यात 6,909 करोड़ के स्तर पर पहुंच गया। यह आंकड़े वैश्विक स्तर पर भारतीय आभूषण उद्योग की मजबूत पकड़ को दर्शाते हैं।

हर वर्ग और सेक्टर को मिली रफ्तार

धनतेरस का आर्थिक प्रभाव केवल आभूषणों तक ही सीमित नहीं रहा। परंपरा के अनुसार तांबे, पीतल और स्टील के बर्तनों के साथ-साथ नई झाड़ू खरीदने की परंपरा का भी पूरे उत्साह से पालन किया गया। माना जाता है कि ऐसा करने से घर में नकारात्मकता दूर होती है और मां लक्ष्मी का वास होता है।

इसके साथ ही आधुनिक समय की जरूरतों को देखते हुए मोबाइल फोन, लैपटॉप, टेलीविजन, आधुनिक घरेलू उपकरण, और आटोमोबाइल सेक्टर में भी रिकार्ड तोड़ बिक्री दर्ज की गई। देश के पारंपरिक बाजार, जो आधुनिक मॉल्स की चमक-दमक के बीच अपनी पहचान बचाने के लिए संघर्षरत माने जाते थे, इस धनतेरस पर ग्राहकों की खचाखच भीड़ से गुलजार नजर आए। बाजारों की चहल-पहल से स्पष्ट है कि त्योहारों का यह सीजन देश के छोटे और बड़े दोनों तरह के व्यापारियों के लिए समृद्धि का नया द्वार लेकर आया है।

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