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'परिवर्तन झटके से नहीं, चरणबद्ध होगा', भ्रष्टाचार, जलभराव और यमुना सफाई के मुद्दों पर बोलीं CM रेखा

Published: Mon, 06 Jul 2026 05:06 AM (IST)

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दैनिक जागरण को दिए साक्षात्कार में दिल्ली की नई ईवी नीति 2026 पर विस्तार से चर्चा ...और पढ़ें

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता।

HighLights

  1. नई ईवी नीति 2026 से दिल्ली की तस्वीर बदलेगी।

  2. अवैध निर्माण और भ्रष्टाचार पर शून्य सहनशीलता।

  3. जलभराव रोकने व यमुना सफाई पर विशेष जोर।

संतोष कुमार सिंह/वीके शुक्ला, नई दिल्ली। दिल्ली में कहीं इमारत ढहती है तो पता चलता है कि ये अवैध निर्माण था और कहीं किसी इमारत में आग लगती है तो पता चलता है कि इस इमारत के पास फायर एनओसी नहीं थी। दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी है, क्या इन चीजों में सुधार नहीं होगा और होगा तो कब तक?

देखिए, आपकी बात सही है। दिल्ली में बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण और अतिक्रमण है। वर्षों की समस्या एक दिन में तो दूर नहीं होगी, लेकिन हमारी सरकार केंद्र सरकार, डीडीए और एमसीडी के साथ मिलकर काम कर रही है। अतिक्रमण हटाने पर हमारा विशेष जोर है, जबकि अवैध निर्माण भी रोका जाएगा।

दवा व उपकरण खरीद में भ्रष्टाचार करने वालों को समयबद्ध सजा दिलाने और भविष्य में इस तरह के मामले रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?

हमारी सरकार का स्पष्ट सिद्धांत भ्रष्टाचार पर शून्य सहनशीलता है। जो भी व्यक्ति जनता के पैसे से खिलवाड़ करेगा या लोगों के स्वास्थ्य के साथ समझौता करेगा, उसके विरुद्ध कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई होगी। हमने संबंधित मामलों की जांच तेज करने और जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए हैं।

लेकिन हमारा ध्यान केवल कार्रवाई पर नहीं है, उससे भी अधिक जरूरी है कि भविष्य में ऐसी स्थिति पैदा ही न हो, इसीलिए खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, डिजिटल और जवाबदेह बनाया जा रहा है। ई-टेंडरिंग, आनलाइन निगरानी और नियमित आडिट जैसी व्यवस्थाओं को और मजबूत किया जाएगा। हमारी कोशिश है कि भ्रष्टाचार की आशंका ही समाप्त हो जाए। जनता का पैसा जनता के हित में ही खर्च हो, यही हमारी प्रतिबद्धता है।

दिल्ली सरकार ने पिछले दिनों ईवी नीति-2026 लागू की है। इससे इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है, लेकिन सुलभ और सुव्यवस्थित ई-चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षित बैट्री प्रबंधन व इसका निस्तारण एक बड़ी चुनौती भी है। इनके समाधान सहित इस पूरी नीति के बारे में और दिल्ली से संबंधित अन्य मुद्दों पर दैनिक जागरण के संतोष कुमार सिंह और वीके शुक्ला ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से विस्तार से चर्चा की। प्रस्तुत हैं बातचीत के मुख्य अंश....

पूर्व सरकार की ईवी नीति से दिल्ली में किस तरह के बदलाव आए? उसे बदलने की क्यों जरूरत पड़ी?

पिछले कुछ वर्षों में तकनीक भी बदली है, बाजार भी बदला है और दिल्ली की जरूरतें भी बदली हैं, इसलिए नीति को भी समय के साथ आगे बढ़ाना जरूरी था। नई नीति केवल सब्सिडी तक सीमित नहीं है। यह केवल वाहन बदलने की नहीं, पूरी व्यवस्था बदलने की नीति है। इससे पूरी दिल्ली की तस्वीर बदलेगी। दिल्ली और आधुनिक व विश्वस्तरीय नजर आएगी।

इसमें चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, बैट्री स्वैपिंग, स्क्रैपिंग इंसेंटिव, डिजिटल व्यवस्था, सार्वजनिक परिवहन, मालवाहक वाहन, बिजली व्यवस्था और जवाबदेही जैसे कई नए आयाम जोड़े गए हैं। पूर्ववर्ती नीति में सब्सिडी वाहन खरीदार को नहीं, डीलर को दी जाती थी, जबकि हम खरीदार को देंगे। अच्छी सरकार वही होती है जो पुरानी नींव पर भविष्य की मजबूत इमारत खड़ी करे।

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हमारा उद्देश्य किसी नीति की आलोचना करना नहीं, बल्कि दिल्ली को भविष्य की जरूरतों के अनुसार तैयार करना है। हालांकि, यह भी सही है कि पूर्ववर्ती सरकार ने चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर खास ध्यान नहीं दिया और ई-वाहनों की सब्सिडी का भुगतान भी नहीं किया, जो हमारी सरकार आने पर किया गया।

वर्ष 2027 से केवल इलेक्ट्रिक आटो और 2028 से सिर्फ इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन के पंजीकरण का निर्णय क्यों किया गया? क्या सरकार ने इसके सामाजिक और आर्थिक प्रभाव का विस्तृत अध्ययन कराया है?

बिल्कुल किया गया है। कोई भी बड़ा निर्णय बिना अध्ययन और व्यापक विचार-विमर्श के नहीं लिया जाता है। दिल्ली में सबसे अधिक वाहन दोपहिया हैं। वहीं, आटो और छोटे मालवाहक वाहन पूरे दिन सड़कों पर चलते हैं।

प्रदूषण में इनका योगदान भी सबसे अधिक है, इसलिए हमने वहीं से शुरुआत की है, जहां बदलाव का सबसे बड़ा असर दिखाई देगा। साथ ही हमने यह भी सुनिश्चित किया है कि लोगों पर अचानक कोई बोझ न आए, इसलिए परचेज इंसेंटिव, स्क्रैपिंग इंसेंटिव, रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क में छूट जैसी कई सुविधाएं दी गई हैं।

सीएनजी आटो को भी एक दिन में बंद नहीं किया जा रहा है। जब वे स्वाभाविक रूप से रिप्लेसमेंट के लिए आएंगे, तब उनकी जगह इलेक्ट्रिक आटो आएंगे। यानी परिवर्तन क्रमबद्ध होगा, झटके से नहीं।

हमारा उद्देश्य किसी का रोजगार छीनना नहीं, बल्कि उसे भविष्य के लिए तैयार करना है। सरकार का हर निर्णय इस सोच के साथ लिया गया है कि पर्यावरण भी सुरक्षित रहे और लोगों की आजीविका भी मजबूत बने।

ईवी नीति से हाईब्रिड वाहनों को बाहर रखने के क्या कारण हैं?

देखिए, व्यापक विचार-विमर्श के बाद यह निर्णय लिया गया है। हमारी नीति का मूल उद्देश्य शून्य उत्सर्जन वाले परिवहन को बढ़ावा देना है। हाईब्रिड वाहन निश्चित रूप से एक बेहतर तकनीक हैं, लेकिन वे अब भी पेट्रोल या डीजल पर निर्भर रहते हैं, इसलिए उन्हें पूरी तरह प्रदूषणमुक्त नहीं कहा जा सकता।

दूसरी बात यह है कि पिछले कुछ वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि बिना किसी सरकारी प्रोत्साहन के भी हाईब्रिड वाहनों की बिक्री लगातार बढ़ रही है। सरकारी सहायता वहां दी जानी चाहिए, जहां उसकी सबसे अधिक आवश्यकता हो, इसलिए हमने अपने सभी प्रोत्साहन विशुद्ध रूप से बैट्री आधारित इलेक्ट्रिक वाहनों पर केंद्रित किए हैं।

दिल्ली की ईवी नीति बहुत सोच-समझकर और सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। प्रदूषणमुक्त दिल्ली बनाने के लिए दिल्लीवासी ई-वाहन अपनाएंगे।

कई स्थानों पर फुटपाथों पर चार्जिंग प्वाइंट बना दिए गए हैं, इनसे फुटपाथ पर चलना मुश्किल हो गया है और चार्जिंग के लिए वाहन खड़े होने से सड़कों पर जाम भी लग रहा है?

फुटपाथ पर चार्जिंग प्वाइंट बनाने की अनुमति नहीं है। पूर्ववर्ती सरकार के समय यदि फुटपाथ पर चार्जिंग प्वाइंट बनाए गए तो गलत हुआ। हमारे पास चार्जिंग प्वाइंट के लिए भूमि की कोई कमी नहीं है।

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राजस्व विभाग सहित अन्य विभाग सर्वे कर भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित कर रहे हैं। फुटपाथ पर कोई चार्जिंग प्वाइंट नहीं बनेगा। यही नहीं, अनधिकृत कालोनियों में भी ई-वाहन चार्जिंग प्वाइंट की कमी नहीं होगी, वहां भी इसका इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा।

बैट्री की कीमत और भविष्य में बैट्री बदलने की लागत को देखते हुए क्या सरकार कोई अतिरिक्त सहायता या वारंटी आधारित योजना लाने पर विचार कर रही है?

यह बहुत महत्वपूर्ण विषय है और सरकार इस पर गंभीरता से काम कर रही है। आज इलेक्ट्रिक वाहन मालिकों की सबसे बड़ी चिंता बैट्री को लेकर होती है। पिछले कुछ वर्षों में बैट्री तकनीक में काफी सुधार हुआ है। इसकी क्षमता व आयु बढ़ी है और लागत भी धीरे-धीरे कम हो रही है। हमारी नीति में बैट्री स्वैपिंग को भी बढ़ावा दिया गया है।

साथ ही बैट्री प्रबंधन और सुरक्षित निस्तारण के लिए भी स्पष्ट व्यवस्था बनाई गई है। सरकार लगातार नई तकनीक और बाजार की स्थिति की समीक्षा करेगी। यदि भविष्य में अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता महसूस होती है तो उसपर सकारात्मक रूप से विचार किया जाएगा।

दिल्ली में बिजली की मांग पहले से बढ़ रही है। बड़े पैमाने पर ईवी चार्जिंग से बिजली ग्रिड पर कितना अतिरिक्त दबाव पड़ेगा और उसकी क्या तैयारी है?

तैयारी पहले की गई है और लक्ष्य उसके बाद तय किया गया है। विद्युत विभाग, दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड और डिस्काम ने मिलकर विस्तृत अध्ययन किया है। जिन क्षेत्रों में भविष्य में अधिक चार्जिंग स्टेशन की जरूरत होगी, वहां पहले से योजना बनाई जा रही है। जहां आवश्यक होगा, वहां ग्रिड को मजबूत किया जाएगा और नए विद्युत ढांचे भी विकसित किए जाएंगे।

घरों में चार्जिंग की सुविधा आसान बनाने के लिए अलग बिजली मीटर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही आरडब्ल्यूए और आवासीय सोसाइटियों में सामूहिक चार्जिंग व्यवस्था को भी बढ़ावा दिया जाएगा। हम पूरी ऊर्जा व्यवस्था को भविष्य के अनुरूप तैयार कर रहे हैं।

इलेक्ट्रिक वाहनों में आग लगने जैसी घटनाओं को देखते हुए बैट्री सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों को लेकर क्या कदम उठाए जा रहे हैं?

लोगों की सुरक्षा हमारे लिए पहली प्राथमिकता है। इस नीति में गुणवत्ता और सुरक्षा दोनों पर विशेष ध्यान दिया गया है। केवल निर्धारित राष्ट्रीय मानकों का पालन करने वाले वाहन और बैट्री ही इस व्यवस्था का हिस्सा होंगे।

बैट्री प्रबंधन के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश हैं। निर्माता कंपनियों की जिम्मेदारी भी तय की गई है कि वे गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन करें। लोगों में जागरूकता बढ़ाने पर भी काम किया जाएगा, ताकि बैट्री के सही उपयोग, चार्जिंग और रखरखाव के बारे में सही जानकारी हर उपभोक्ता तक पहुंचे। चार्जिंग प्वाइंट पर भी सुरक्षा के पूरे प्रबंध होंगे।

इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ने से ई-कचरा प्रबंधन की चुनौती बढ़ रही है। ईवी नीति में इसका क्या समाधान है?

स्वच्छ परिवहन का मतलब सिर्फ इलेक्ट्रिक वाहन बढ़ाना नहीं है। हमें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि बैट्रियों का सुरक्षित संग्रह, पुनर्चक्रण और निस्तारण पूरी जिम्मेदारी के साथ हो। इसके लिए ईवी नीति में बैट्री प्रबंधन को विशेष महत्व दिया गया है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति इस संबंध में विस्तृत दिशानिर्देश और मानक संचालन प्रक्रिया तैयार करेगी।

वाहन निर्माता कंपनियों की भी जिम्मेदारी तय की गई है कि वे पुरानी बैट्री वापस लें और अधिकृत संस्थाओं के माध्यम से उनका सुरक्षित पुनर्चक्रण कराएं। सभी तरह की बैट्री का सुरक्षित निस्तारण सुनिश्चित किया जाएगा। हम प्रदूषण का एक स्रोत कम करके दूसरा स्रोत पैदा नहीं होने देंगे। हम चाहते हैं कि दिल्ली इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के साथ-साथ सर्कुलर इकोनामी और पर्यावरणीय जिम्मेदारी में भी देश का नेतृत्व करे।

ई-वेस्ट कचरा के सुरक्षित निस्तारण के लिए होलंबी कलां में ई-कचरा पार्क बनाया जा रहा है। इसके लिए संबंधित विभाग को भूमि हस्तांतरित करने के साथ ही अधिकांश वैधानिक स्वीकृति प्राप्त कर ली गई है। शीघ्र ही इस परियोजना के लिए निविदा जारी की जाएगी।

आटो चालक और माल ढुलाई में जुड़े लोग ईवी खरीदने की शुरुआती लागत कैसे वहन करेंगे? सरकार उन्हें किस तरह से आर्थिक मदद देगी?

मैं इस चिंता को पूरी तरह समझती हूं। आटो चालक हों या छोटे ट्रांसपोर्टर, उनके लिए वाहन रोजी-रोटी का आधार होता है। ईवी नीति में उनका ध्यान रखा गया है। ईवी खरीदने, पुराने वाहन स्क्रैप कराने में प्रोत्साहन राशि देने के साथ ही रोड टैक्स और पंजीकरण शुल्क में पूरी छूट मिलेगी।

केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ भी लोगों तक पहुंचाया जाएगा। हमारा प्रयास है कि वाहन खरीदने का शुरुआती खर्च कम हो और आगे चलकर ईंधन तथा रखरखाव पर होने वाली बचत उनकी आमदनी बढ़ाए।

जलभराव की समस्या न हो, इसके लिए दिल्ली सरकार की क्या तैयारी है?

दिल्लीवासियों ने वर्षों तक वर्षा के दौरान जो परेशानियां झेली हैं, उन्हें हम दोहराना नहीं चाहते। इस बार हमने मानसून से पहले ही व्यापक तैयारी शुरू कर दी थी। सभी प्रमुख और छोटे नालों की समयबद्ध सफाई कराई गई है। नालों से तीन लाख मीट्रिक टन गाद निकाली गई है।

चिह्नित जलभराव वाले प्रत्येक स्थान पर नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं और उनकी जवाबदेही तय की गई है। 24 घंटे काम करने वाला केंद्रीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष सक्रिय है। आधुनिक तकनीक की मदद से वर्षा और जलस्तर की निगरानी की जा रही है। जहां जरूरत होगी, वहां मोबाइल पंप तुरंत भेजे जाएंगे।

संवेदनशील क्षेत्रों के लिए अलग से कार्ययोजना बनाई गई है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। हमारी कोशिश जलभराव की स्थिति बनने से पहले उसे रोकने की है। प्रयास है कि मानसून परेशानी का नहीं, राहत का मौसम बने।

यमुना की सफाई में पड़ोसी राज्यों का कितना सहयोग मिल रहा है?

यमुना कई राज्यों से होकर गुजरती है, इसलिए इसकी सफाई भी सामूहिक प्रयास से ही संभव है। हम लगातार केंद्र सरकार और पड़ोसी राज्यों के साथ समन्वय कर रहे हैं।

कई विषय ऐसे हैं, जिनका समाधान अकेले दिल्ली नहीं कर सकती, जैसे अपस्ट्रीम से आने वाला प्रदूषण और नदी में गिरने वाला अनुपचारित जल। दिल्ली सरकार अपने हिस्से की जिम्मेदारी पूरी गंभीरता से निभा रही है।

सीवरेज ट्रीटमेंट, नालों की सफाई, अवैध डिस्चार्ज पर कार्रवाई और नदी तटों के सुधार पर तेजी से काम हो रहा है। यमुना राजनीति का विषय नहीं, आने वाली पीढ़ियों की जिम्मेदारी है। मुझे विश्वास है कि सभी सरकारें मिलकर इस दिशा में सकारात्मक परिणाम देंगी।