दोहरे टोल टैग के जाल में उलझा दिल्ली का ट्रांसपोर्ट, बॉर्डरों पर थमी रफ्तार और बढ़ा प्रदूषण
दिल्ली में वाणिज्यिक वाहनों के लिए फास्टैग और एमसीडी के आरएफआईडी टैग की दोहरी प्रणाली से ट्रांसपोर्टर परेशान हैं। यह ...और पढ़ें

दिल्ली में दोहरी टोल टैग प्रणाली। (एआई जेनरेटेड इमेज)
HighLights
दिल्ली में फास्टैग और एमसीडी आरएफआईडी टैग की दोहरी प्रणाली।
ट्रांसपोर्टरों को अलग-अलग टैग खरीदने और रिचार्ज करने में दिक्कत।
टोल नाकों पर जाम और वायु प्रदूषण का मुख्य कारण।
निहाल सिंह, नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में एमसीडी के टोल नाके जाम से जूझते हैं और वह प्रदूषण का कारण बनते हैं। बावजूद इसके राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और एमसीडी फास्टैग से निगम का टोल वसूलने के लिए राजी नहीं हुए। यही वजह है कि पूरे देश में फास्टैग सिस्टम लागू है, लेकिन दिल्ली की सीमाओं पर लगे टोल नाकों पर एमसीडी का आरएफआईडी टैग चल रहा है।
यह उन व्यावसायिक वाहन चालकों के लिए परेशानी का सबब बनता है, जो दूसरे राज्यों से पहली बार दिल्ली में प्रवेश करते हैं। एमसीडी का टैग न होने की वजह से पहले उन्हें टोल की लाइन में लगना पड़ता है और जब मौके पर पहुंचते हैं तो बिना टैग के एंट्री न होने पर नया आरएफआईडी टैग बनवाने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ती है।
जबकि पूरे देश में एनएचएआई की फास्टैग से टोल वसूलने वाली कंपनी आईएचएमसीएल (इंडियन हाइवेज मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड) ही फास्टैग से टोल वसूलती है। जबकि दिल्ली में यह कंपनी राजी नहीं है। सूत्र बताते हैं कि इसी वर्ष जनवरी से लेकर मई 2026 तक केंद्रीय वायु गुणवत्ता आयोग (सीएक्यूएम) ने एमसीडी, एनएचएआई और आईएसएसीएल को दिल्ली के वायु प्रदूषण को कम करने के लिए बुलाया था।
साथ ही टोल नाकों पर फास्टैग आधारित प्रणाली से टोल वसूलने के लिए सिस्टम को इंटीग्रेट करने की बात कही थी, लेकिन पांच मीटिंग होने के बाद भी यह कंपनी राजी नहीं हुई। इसकी वजह से दिल्ली में अभी एमसीडी की आरएफआईडी टैग प्रणाली से टोल वसूली जारी है।
2018 में एमसीडी ने अपना आरएफआईडी सिस्टम शुरू किया
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2018 में एमसीडी ने अपना आरएफआईडी सिस्टम शुरू किया था। उस दौरान भी एमसीडी ने एनएचएआई से संपर्क किया था, लेकिन उस समय एनएचएआई से सकारात्मक रुख नहीं मिला तो फिर एमसीडी ने अपने ही आरएफआईडी टैग सिस्टम को लागू कर दिया गया। इसके बाद 2021 में भी एमसीडी और एनएचएआई की बातचीत फास्टैग से टोल इंटीग्रेशन की बात चली।
चूंकि बदरपुर पर एनएचएआई और एमसीडी का टोल नजदीक ही था, यहां पर इसका ट्रायल करने की बात थी, लेकिन एनएचएआई ने मना कर दिया। हालांकि फास्टैग से एमसीडी टैग इंटीग्रेशन मामले में एनएचएआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि दो सरकारों के बीच का मामला है, नीतिगत निर्णय उन्हें लेना है। जबकि एमसीडी का कहना है कि फास्टैग और एमसीडी टैग में कई तकनीकी प्रावधान अलग हैं, जिससे यह व्यवस्था लागू नहीं हुई है।
अलग टैग रिचार्ज और खरीदने में ट्रांसपोर्टर को आती है दिक्कत
देशभर में एनएचएआई का फास्टैग टोल भुगतान के लिए चलता है, लेकिन दिल्ली में व्यावसायिक वाहनों के प्रवेश करने के लिए एमसीडी का आरएफआईडी टैग लेना पड़ता है। इस पर ट्रांसपोर्टर और ट्रक चालकों को दिक्कत होती है। क्योंकि दोनों ही टैग को अलग-अलग खरीदना और अलग-अलग रिचार्ज का हिसाब रखना पड़ता है। अब तक एमसीडी 16 लाख टैग बेच चुकी है। प्रत्येक टैग पर वाहन चालक को 236 रुपये का अलग से खर्च करना पड़ता है, जबकि फास्टैग लेने के लिए अलग खर्च करना पड़ता है।
दूसरे राज्य से जो व्यावसायिक वाहन पहली बार आते हैं, उन्हें पता नहीं होता कि एमसीडी का अलग टोल लगता है। इससे ट्रांसपोर्टर को समस्या होती है कि मौके पर जब ट्रक चालक पहुंचता है, वहां से ड्राइवर अलग टैग के लिए पैसे मांगता है और फिर वाहन के दस्तावेज आदि जमा करने पड़ते हैं। इससे वाहन चालक और ट्रांसपोर्टर दोनों परेशान होते हैं। - राजेंद्र कपूर, अध्यक्ष, ऑल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्टर एसोसिएशन
यह भी पढ़ें- दिल्ली में प्रदूषण जांच केंद्रों पर अब कैमरों से होगी कड़ी निगरानी, वाहन जांच व्यवस्था होगी और सख्त
