आदर्श स्वच्छ शहर बनाने की घोषणा, पर MCD इलाके में कूड़े के ढेर और टूटी नालियां बनीं बड़ी चुनौती
दिल्ली को आदर्श स्वच्छ शहर बनाने की घोषणा के बावजूद, एमसीडी क्षेत्रों में कूड़े के ढेर और टूटी नालियां बड़ी ...और पढ़ें

एआई जेनेरेटेड इमेज।
HighLights
दिल्ली को आदर्श स्वच्छ शहर बनाने की घोषणा हुई।
एमसीडी क्षेत्रों में कूड़े के ढेर, टूटी नालियां चुनौती।
स्वच्छ सर्वेक्षण में एमसीडी की रैंकिंग खराब।
निहाल सिंह, नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली को एक बार स्वच्छता के लिए आदर्श शहर बनाने की घोषणा हुई है। इसमें लुटियंस दिल्ली यानि एनडीएमसी और छावनी यानि दिल्ली कैंट इलाके साथ ही एमसीडी इलाके को भी चयनित किया है। लेकिन, यह बहुत ही चुनौतीपूर्ण होगा।
क्योंकि एनडीएमसी और दिल्ली कैंट को छोड़ दें तो एमसीडी का इलाका आदर्श स्वच्छ शहर कैसे बनेगा जब यह शहर ही स्वच्छ बनने के लिए चुनौतियों से जूझ रहा है। अनियोजित कालोनियों में बढ़ती आबादी, टूटी नालियां, खराब पड़े सार्वजनिक शौचालय दिल्ली की स्वच्छता की बानगी की कहानी बता रहे हैं।
सड़कों-चौराहों पर कूड़े का अंबार
यह हाल तो तब है जब इसी दिल्ली से स्वच्छता अभियान की घोषणा हुई। पर आजतक दिल्ली के ज्यादातर इलाके स्वच्छ होने के लिए जूझ रहे हैं। सड़क और चौराहों पर सड़क किनारे लगे कूड़े के ढेर तो आसानी से मिल ही जाएगी।
वहीं, जहां-तहां लोगों द्वारा कूड़ा फैंकने की आदत में भी कोई खास सुधार नहीं हो रहा है। जिसको हर वर्ष होने वाला स्वच्छ सर्वेक्षण भी साबित कर रहा है।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का सबसे बड़ा निकाय एमसीडी क्षेत्र हैं लेकिन स्वच्छ रैकिंग में एमसीडी का प्रदर्शन पहले या दूसरे स्थान पर होना तो दूर शीर्ष दस तक में एमसीडी का नाम नहीं आया है। हालांकि एनडीएमसी और दिल्ली कैंट ने तो यह मुकाम हासिल किया है।
जबकि एमसीडी की हालत में कोई खास सुधार नहीं होता है। रैकिंग की बात करें वर्ष 2023 में एमसीडी को 446 में से 90 वां स्थान आया था और 2024 में 40 में से 31 वां स्थान आया था।
करोड़ों का खर्च, फिर भी जीरो वेस्ट कॉलोनियां दूर की कौड़ी
यह हाल तब है कि सालाना एमसीडी सफाई को लेकर कर्मचारियों और अधिकारियों के वेतन और मशीनरी के नाम पर पांच हजार करोड़ के करीब खर्च करती हैं। यहां पर जीरो वेस्ट कालोनियां की संख्या भी एक हजार नहीं पहुंच पाई है।
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बल्क वेस्ट ेजेनेरेटर का पंजीकरण ही हो रहा है। अभी भी 250 में से 50 वार्ड भी आदर्श वार्ड नहीं बन पाए हैं। जहां पर स्रोत पर ही गीला और सूखा कचरा निस्तारित हो रहा हो।
ये हैं चुनौतियां दिल्ली को साफ रखने में
- एमसीडी द्वारा सफाई के लिए तैनात कर्मचारियों द्वारा प्रभावी रूप से काम न करना
- कूड़ा उठाने वाली एजेंसियों द्वारा घर-घर से कूड़ा उठाने के मामले में लापरवाही
- कूड़ा उठाने वाली एजेंसियों द्वारा जमीन पर पर्याप्त वाहन और कर्मचारी न लगाना
- लोगों द्वारा जहां-तहां कूड़ा फेंकना
- सार्वजनिक शौचालयों के रखरखाव के लिए बेहतर व्यवस्था न बनाना
- सख्ती की कमी, चालान के नाम पर खानापूर्ति
- सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग के प्रतिबंध पर भी केवल खानापूर्ति होना
एमसीडी इलाके की स्वच्छता रैंकिंग
| निकाय | 2022 (45 में से) | 2021 (48 में से) |
|---|---|---|
| दक्षिणी निगम | 28 | 31 |
| उत्तरी निगम | 34 | 45 |
| पूर्वी निगम | 37 | 40 |
| निकाय | 2023 (446 में से) | 2024 (40 में से) |
|---|---|---|
| एमसीडी | 90 | 31 |
नोट: मई 2022 तक दिल्ली में तीन निगम थे, जिन्हें एकीकृत करके दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) का रूप दे दिया गया।
एनडीएमसी की रैंकिंग (तीन वर्षों की)
| निकाय | 2024 | 2023 (446 में से) | 2022 (383 में से) | 2021 (371 में से) |
|---|---|---|---|---|
| एनडीएमसी | सुपरलीग में सम्मानित | 7 | 3 | 1 |
दिल्ली कैंट रैंकिंग (तीन वर्षों की)
| निकाय | 2024 (58 में से) | 2023 (61 में से) | 2022 (62 में से) | 2021 (62 में से) |
|---|---|---|---|---|
| दिल्ली कैंट | 30 | 7 | 5 | 3 |
