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दिल्ली के आसमान में 'फुस्स' हो गया हॉट एयर बलून, क्या अब उड़ भी पाएगा तुर्किये के कप्पाडोसिया वाला गुब्बारा?

Published: Mon, 27 Apr 2026 11:59 PM (IST)

दिल्ली के बांसेरा में शुरू की गई हॉट एयर बलून राइड उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाई और सिर्फ 8-10 ...और पढ़ें

दिल्ली के पूर्व एलजी वीके सक्सेना ने जोर-शोर के साथ किया था शुभारंभ। फोटो: आर्काइव

दिल्ली के पूर्व एलजी वीके सक्सेना ने जोर-शोर के साथ किया था शुभारंभ। फोटो: आर्काइव

HighLights

  1. बांसेरा हॉट एयर बलून राइड 8-10 दिन चली

  2. अधिक किराया, ऑनलाइन बुकिंग न होना असफलता के कारण

  3. मौसम और प्रदूषण ने भी बिगाड़ा राइड का अनुभव

संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। दिल्ली वालों ने सोचा था कि वे तुर्किये के कप्पाडोसिया जैसा एहसास अब यमुना किनारे 'बांसेरा' में ले सकेंगे। लेकिन, बड़े ताम-झाम के साथ पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए शुरू हुई हॉट एयर बलून राइड उम्मीदों की उड़ान भरने से पूर्व ही जमीन पर आ गिरी।

25 नवंबर 2025 को तत्कालीन एलजी वीके सक्सेना द्वारा शुरू किया गया यह रोमांच सिर्फ आठ से 10 दिन की राइड में ही सिमट कर रह गया। अब भीषण गर्मी ने इस पर ब्रेक लगा दिया है और सर्दियों में यह बलून फिर से उड़ेगा या नहीं, इसे लेकर डीडीए के पास भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं है।

बांसेरा का हाल देखते हुए प्रोजेक्ट पर सवाल 

डीडीए ने बांसेरा के अलावा असिता, यमुना स्पोर्ट्स काॅम्प्लेक्स और राष्ट्रमंडल खेलगांव में भी ऐसी ही राइड शुरू करने का वादा किया था, लेकिन बांसेरा के हाल को देखते हुए अब इस प्रोजेक्ट के भविष्य पर भी सवालिया निशान लग गया है।

डीडीए अधिकारियों का कहना है कि हॉट एयर बलून आग की गर्मी से उड़ता है। दिल्ली की झुलसाने वाली गर्मी में इस राइड के भीतर का तापमान सहना नामुमकिन है। इसीलिए फिलहाल इसे गर्मियों व मानसून में बंद कर दिया गया है। लेकिन सर्दियों में भी यह रोमांचक राइड दोबारा से शुरू होगी या नहीं, इसे लेकर डीडीए अधिकारी कोई आश्वासन नहीं दे पाते।

hot air balloon

एक नजर में हॉट एयर बलून की राइड

  • दूरी : जमीन से महज 100-150 फीट की ऊंचाई।
  • समय : सिर्फ 7 से 12 मिनट की राइड।
  • कीमत : शुरुआत में 3000, बाद में घटाकर 2300 (प्रति व्यक्ति)।
  • रिस्पाॅन्स : एक दिन में औसतन सिर्फ 20 लोग।

आखिर क्यों नहीं हो पाया कामयाब? 

इस प्रोजेक्ट के फ्लाप होने के पीछे कोई एक नहीं, बल्कि वजहों की लंबी फेहरिस्त है-

  • अधिक किराया : 10 मिनट की राइड के लिए 3000 रुपये खर्च करना दिल्ली वालों को रास नहीं आया। बाद में कीमत कम की गई, लेकिन तब तक हवा निकल चुकी थी।
  • ऑनलाइन बुकिंग का अभाव : आज के दौर में जब चाय भी ऑनलाइन पेमेंट से मिलती है, इस राइड के लिए ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा ही नहीं थी। लोगों को पता ही नहीं चल पाता था कि राइड चालू है या बंद।
  • मौसम और प्रदूषण की मार : जनवरी में वर्षा ने बाधा डाली, तो वहीं दिल्ली के स्माग ने मजा किरकिरा कर दिया। 150 फीट की ऊंचाई से लोगों को शानदार नज़ारे के बजाय सिर्फ धुंध दिखाई दी।
  • आयोजनों की भीड़ में खो गई राइड : बांसेरा में जश्न-ए-रेख्ता और पलाश फ्लावर शो जैसे बड़े इवेंट हुए, जिसके मद्देनजर सुरक्षा कारणों या अन्य वजहों से बलून राइड को बार-बार रोकना पड़ा।

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