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सर्दी से पहले दिल्ली पर गहराया प्रदूषण का खतरा, एक साल बाद भी 12 प्रमुख हॉटस्पॉट पर नहीं सुधरे हालात

Published: Fri, 02 Oct 2026 09:43 AM (IST)

दिल्ली में सर्दी से पहले वायु प्रदूषण का खतरा मंडरा रहा है, जहां सरकार के दावों के बावजूद 12 प्रमुख ...और पढ़ें

12 सबसे प्रमुख हॉटस्पॉट अभी भी बदहाली के आंसू रो रहे। AI जनरेटेड

12 सबसे प्रमुख हॉटस्पॉट अभी भी बदहाली के आंसू रो रहे। AI जनरेटेड

HighLights

  1. दिल्ली के 12 हॉटस्पॉट में प्रदूषण की स्थिति गंभीर बनी हुई है।

  2. एक साल बाद भी इन इलाकों में कोई खास सुधार नहीं हुआ।

  3. दीर्घकालिक उपायों और अंतर-विभागीय समन्वय की सख्त जरूरत है।

संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। जैसे-जैसे सर्दी का मौसम करीब आ रहा है, राजधानी दिल्ली में वैसे-वैसे हवा के जहरीले होने का खतरा फिर से मंडराने लगा है।

दिल्ली सरकार ने प्रदूषण से निपटने के लिए विंटर एक्शन प्लान तो तैयार कर लिया है, लेकिन धरातल पर दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा फासला नजर आ रहा है।

स्थिति सुधारने का दावा

प्रदूषण से सबसे ज्यादा प्रभावित हॉट स्पॉट को लेकर सामने आए आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। एक तरफ जहां सरकार कई इलाकों में स्थिति सुधारने का दावा कर रही है, वहीं शहर के 12 सबसे प्रमुख हॉटस्पॉट अभी भी बदहाली के आंसू रो रहे हैं।

दिल्ली की हवा को सांस लेने लायक बनाने के दावे हर साल किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत साल-दर-साल जस की तस बनी हुई है। राजधानी में प्रदूषण के लिहाज से कुल 62 हॉटस्पॉट की पहचान की गई थी।

20 हॉटस्पॉट आज भी प्रदूषण की चपेट में

दिल्ली सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, इनमें से 42 स्थानों पर सुधारात्मक कार्रवाई पूरी कर ली गई है। लेकिन सच यह भी है कि 20 हॉट स्पॉट आज भी प्रदूषण की चपेट में हैं और वहां स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है।

बताया कि इन 20 संवेदनशील इलाकों में से 8 स्थानों पर काम पूरा करने के लिए अक्टूबर तक का लक्ष्य तय किया गया है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल उन 12 हॉट स्पॉट पर खड़ा हो रहा है, जहां पूरे एक साल बाद भी कोई खास सुधार नहीं दिख रहा।

वहीं, अधिकारियों का मानना है कि इन 12 इलाकों में प्रदूषण से निपटने के लिए अब केवल अल्पकालिक कदम काफी नहीं हैं, बल्कि यहां लंबे समय तक चलने वाले सख्त और दीर्घकालिक उपाय करने बेहद जरूरी हो गए हैं।

पर्यावरण विभाग के अधिकारी बताते हैं कि बढ़ते प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली सरकार के विंटर एक्शन प्लान के तहत इस बार हर एक यातायात और वायु प्रदूषण हॉटस्पॉट के लिए अलग-अलग कस्टमाइज्ड एक्शन प्लान तैयार किया गया है।

कार्रवाई केवल हॉटस्पॉट तक सीमित न रहे

वहीं, इतना ही नहीं, किसी भी तरह की ढिलाई को रोकने के लिए संबंधित जिलों के नोडल सचिवों और आयुक्तों को सीधे तौर पर निगरानी की कमान सौंपी गई है। कार्रवाई केवल हॉटस्पॉट तक सीमित न रहे, इसलिए प्रत्येक चिह्नित इलाके के तीन किमी के पूरे दायरे को ध्यान में रखकर कदम उठाए जा रहे हैं।

कागजों पर सख्त योजनाएं और प्रशासनिक अधिकारियों को दी गई जिम्मेदारियां बेशक राहत का भरोसा दिलाती हैं, लेकिन अब सवाल समय का है। अक्टूबर का महीना शुरू हो चुका है और धुंध और स्माग का खतरा मंडरा रहा है।

अब देखना होगा कि 12 बेहाल हॉट स्पॉट पर सरकार के दीर्घकालिक उपाय कब तक असर दिखाते हैं, या इस बार भी दिल्ली वालों को जहरीली हवा में ही सांस लेने पर मजबूर होना पड़ेगा।

इन 8 हॉट स्पॉट पर ये समस्याएं जिम्मेदार

  • आनंद विहार : दिल्ली-उप्र सीमा पर स्थित होने के कारण अंतरराज्यीय बस टर्मिनस से अत्यधिक अंतरराज्यीय डीजल बसों की आवाजाही, पास ही में रेलवे स्टेशन, भारी ट्रैफिक जाम और कौशांबी बॉर्डर से उड़ने वाली धूल।
  • मुंडका : औद्योगिक कचरा और प्लास्टिक जलाना, भारी कमर्शियल वाहनों का निरंतर आवागमन और रोहतक रोड पर सड़कों की खराब स्थिति व निर्माण कार्य से उड़ने वाली धूल।
  • बवाना : अनधिकृत औद्योगिक इकाइयां, औद्योगिक अपशिष्ट/ प्लास्टिक कचरा जलाना और औद्योगिक क्षेत्रों में टूटी सड़कों के कारण लगातार धूल उड़ना।
  • नरेला : अनाज मंडी व औद्योगिक क्षेत्र से आने वाले भारी ट्रकों का जमावड़ा, खुले इलाकों से उड़ती धूल और सड़कों पर अनियंत्रित अतिक्रमण से लगने वाला ट्रैफिक जाम।
  • पंजाबी बाग : रिंग रोड का प्रमुख चौराहा होने के कारण अत्यधिक ट्रैफिक घनत्व, गाड़ियों से निकलने वाला धुआं और आसपास जारी निर्माण व पुनर्विकास परियोजनाओं से उड़ने वाले कण।
  • आर के पुरम : घनी आबादी और प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों के पास होने के कारण वाहनों की लगातार आवाजाही, तंग सड़कों पर जाम और स्थानीय तंदूरों व होटलों से निकलने वाला धुआं।
  • ओखला फेज-2 : भारी औद्योगिक गतिविधियां, कंटेनर डिपो के कारण भारी मालवाहक ट्रकों की आवाजाही और ओखला लैंडफिल साइट के निकट होने से हवा में पर्टिकुलेट मैटर (पीएम 2.5 / पीएम 10) की उच्च मात्रा।
  • विवेक विहार : दिल्ली-गाजियाबाद सीमा से सटा होना, आसपास के छोटे औद्योगिक क्षेत्रों से उत्सर्जन और सीमावर्ती सड़कों पर अवैध पार्किंग व ट्रैफिक बोटलनेक।

मूलभूत कारण जिससे सुधार होने में देरी हुई

एमसीडी, डीडीए, पीडब्ल्यूडी और ट्रैफिक पुलिस के बीच अंतर-विभागीय तालमेल की कमी।
सड़कों की मरम्मत और री-कार्पेटिंग में रुकावट : मानसून और बजट आवंटन की वजह से बुनियादी ढांचे का काम अटकना।
एंटी-स्माग गन और मैकेनिकल स्वीपिंग मशीनरी की अनुपलब्धता : कई क्षेत्रों में नियमित रूप से पानी का छिड़काव और मशीनी सफाई समय पर शुरू न हो पाना।

12 हॉट स्पॉट जहां स्थिति है बदहाल

  • इन 12 हॉट स्पॉट में केवल तात्कालिक या मौसमी उपाय (जैसे पानी का छिड़काव या एंटी-स्माग गन) काफी नहीं हैं, क्योंकि यहां समस्या का कारण भौगोलिक बनावट, अनियंत्रित शहरीकरण और अनधिकृत औद्योगिक ढांचा है। यही वजह है कि यहां दीर्घकालिक योजना की जरूरत महसूस हुई।
  • आयानगर : दिल्ली-गुरुग्राम बॉर्डर पर स्थित होना, कच्ची सड़कें, हरियाणा की तरफ से आने वाली धूल भरी हवाएं और बुनियादी ड्रेनेज व रोड नेटवर्क का अभाव।
  • नजफगढ़ : बहुत बड़ा ग्रामीण व अर्ध-शहरी दायरा, भारी कमर्शियल वाहनों का बाईपास न होना, कृषि अवशेष (पराली) जलाने का असर और धूल भरी कच्ची सड़कें।
  • वजीरपुर : बर्तन और स्टील पालिशिंग की पुरानी औद्योगिक इकाइयां, केमिकल व धातु प्रदूषण, और बेहद संकरी गलियों में भारी मालवाहक वाहनों का आवागमन।
  • जहांगीरपुरी : कबाड़ व स्क्रैप मार्केट में अवैध प्लास्टिक-मेटल बर्निंग, भलस्वा लैंडफिल साइट की निकटता और अत्यधिक घनी आबादी के बीच अनियंत्रित ट्रैफिक।
  • ख्याला : घनी आबादी के बीच छोटे-छोटे गारमेंट व डाइंग उद्योग, अनधिकृत आटो-रिपेयर व स्क्रैप हब, और संकरी सड़कों पर दिन-रात ट्रैफिक जाम।
  • शास्त्री पार्क : आइएसबीटी और उत्तर-पूर्वी दिल्ली को जोड़ने वाली मुख्य सड़कों का इंटरसेक्शन, लगातार ट्रैफिक बोटलनेक, निर्माण गतिविधियां और यमुना खादर के पास खुले पक्के/कच्चे क्षेत्रों से उड़ती धूल।
  • विश्वास नगर : केबल और पीवीसी निर्माण की सैकड़ों अवैध/छोटे पैमाने की इकाइयां, प्लास्टिक कचरे का जमावड़ा और आवासीय इलाकों के बीच औद्योगिक गतिविधियां।
  • हरकेश नगर : ओखला औद्योगिक क्षेत्र के पास संकरी आवासीय बस्ती, गारमेंट व टेक्सटाइल वेस्ट का जलना और दैनिक आवाजाही के लिए बेहतर रोड इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी।
  • हरि नगर : भारी वाहनों का कमर्शियल रूट, बस डिपो और मायापुरी स्क्रैप मार्केट की निकटता के कारण लगातार उठने वाली मेटल, सड़क की धूल।
  • दिल्ली गेट : पुरानी दिल्ली का अत्यधिक व्यस्त और संकरा क्षेत्र, एलएनजेपी अस्पताल व कमर्शियल हब के कारण 24 घंटे वाहनों का दबाव, और पुरानी इमारतों/पुनर्विकास कार्यों से लगातार उड़ती धूल।
  • सावदा-मुबारकपुर डबास क्लस्टर : पुनर्वास बस्तियों का अविकसित होना, बिना पक्की सड़कें, खुले में कचरा डंपिंग और आसपास के ग्रामीण इलाकों से उड़ने वाली धूल।
  • भलस्वा - नंद नगरी - गोकुलपुरी - बक्करवाला क्लस्टर : भलस्वा कचरे के पहाड़ से लगातार उठने वाली मीथेन गैस व धुएं की आग, अंतरराज्यीय सीमा (उप्र/हरियाणा) से सटा होना और कबाड़ रीसाइक्लिंग की अनधिकृत गतिविधियां।

दीर्घकालिक उपाय क्यों जरूरी हैं

  • लैंड यूज और रि-जोनिंग : आवासीय इलाकों से अनधिकृत उद्योगों को पूरी तरह शिफ्ट करना।
  • मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर : कच्ची सड़कों का शत-प्रतिशत पक्कीकरण और बाईपास/एलिवेटेड कारिडोर का निर्माण ताकि भारी वाहन रिहायशी इलाकों से बाहर रहें।
  • लैंडफिल मैनेजमेंट : भलस्वा जैसी लैंडफिल साइट्स का पूरी तरह वैज्ञानिक निस्तारण।
  • अंतरराज्यीय समन्वय : सीमावर्ती इलाकों (हरियाणा व उप्र) से आने वाले वाहनों और धूल के नियंत्रण के लिए स्थायी पालिसी लागू करना।

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