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इटली और लंदन की आधुनिक मशीनों से होगी सड़कों की सफाई, दिल्ली में प्रदूषण से निपटने की तैयारी तेज

Published: Fri, 02 Oct 2026 07:54 AM (IST)

दिल्ली में प्रदूषण से निपटने के लिए एमसीडी इटली और लंदन से आयातित आधुनिक मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों का उपयोग ...और पढ़ें

HighLights

  1. एमसीडी इटली और लंदन से आयातित मशीनों का उपयोग करेगी।

  2. सर्दियों में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए यह कदम उठाया गया।

  3. कुल 70 नई मशीनें नवंबर के मध्य तक तैनात होंगी।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली में सर्दियों में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए एमसीडी अब इटली और लंदन की आधुनिक मैकेनिकल रोड स्वीपिंग (एमआरएस) मशीनों से सड़कों की धूल साफ करेगा।

इसके लिए यूरोप से आयातित नई इलेक्ट्रिक मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों का फील्ड ट्रायल शुरू हो गया है। कुल 70 मशीनें मंगाई गई हैं, जिनमें 55 इलेक्ट्रिक और 15 सीएनजी मशीनें हैं।

करीब 10 दिन तक चलने वाले इस ट्रायल में मशीनों की सफाई क्षमता, ब्रश, वैक्यूम सिस्टम और सेंसर की कार्यप्रणाली को अलग-अलग परिस्थितियों में परखा जा रहा है।

एमसीडी देगा चलाने की मंजूरी

इस ट्रायल को केंद्र सरकार की एजेंसी आईकैट (अंतरराष्ट्रीय आटोमोटिव प्रौद्योगिकी केंद्र) कर रहा है। उसके मानकों पर खरे उतरने और उसकी रिपोर्ट के बाद एमसीडी इसे चलाने की मंजूरी दे देगा।

नवंबर के मध्य से यह मशीनें सड़कों पर होंगी। फिलहाल 60 फीट से अधिक चौड़ी पीडब्ल्यूडी की सड़कों की सफाई जहां एक दिन छोड़कर एक दिन होती है। अब इस मशीन से रोजाना हुआ करेगी। क्योंकि एमसीडी के पास कुल 140 मशीनों का बेड़ा हो जाएगा।

मानेसर को ट्रायल के लिए चुना

बृहस्पतिवार को एमसीडी आयुक्त संजीव खिरवार ने इन मशीनों के फील्ड ट्रायल का निरीक्षण किया। अधिकारियों के अनुसार, मशीनों को दिल्ली लाने के बाद मानेसर में भी ट्रायल किया जा रहा है। वहां अलग-अलग मात्रा में धूल वाले स्थानों पर मशीनों की कार्यक्षमता जांची जा रही है। जो एजेंसी ट्रायल करवा रही है उसका केंद्र मानेसर में भी है, इसलिए मानेसर को ट्रायल के लिए चुना गया।

ट्रायल की रिपोर्ट के आधार पर मशीनों के संचालन से जुड़े अंतिम निर्णय लिए जाएंगे। एमसीडी अधिकारी ने बताया कि हमारी योजना नवंबर के मध्य से दिल्ली में इन मशीनों के तैनात करने की है।

जमा धूल और मलबे हटेंगे

एमसीडी के अधिकारी ने बताया कि लंदन और इटली में जिन मशीनों से सफाई होती है, उन्हें विशेष तौर पर भारत की परिस्थिति के हिसाब से तैयार कराया गया है। जिसमें कैमरा, ब्रश सेंसर समेत अन्य कई उपकरण लगाए गए हैं। इससे सड़क के किनारे और सतह पर जमा धूल एवं मलबे को अधिक प्रभावी ढंग से हटाने में मदद मिलेगी।

मशीन के साफ्टवेयर के जरिये यह भी देखा जा सकेगा की वैक्यूम सिस्टम चालू है या नहीं और सफाई के दौरान मशीन ठीक तरीके से काम कर रही है या नहीं।

उन्होंने आगे बताया कि 55 मशीनें दो घन मीटर की क्षमता की हैं, जबकि 15 मशीनें करीब छह घन मीटर वाली क्षमता की हैं। फिलहाल एमसीडी स्वदेशी मशीनों का इस्तेमाल कर रहा था लेकिन प्रभावी और जल्दी इस कार्य को करने के लिए यह मशीनें आयातित की गई हैं।

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