विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

रोड पर 30km/h हो जाएगी स्पीड लिमिट, 2030 तक हादसे में मौतें आधी करने का प्लान; 'विजन जीरो' रोडमैप तैयार

Published: Wed, 07 Oct 2026 08:57 PM (IST)

भारत में 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को आधा करने के लक्ष्य के साथ 'विजन जीरो' कार्ययोजना ...और पढ़ें

अर्बन अड्डा' के समापन पर विजन जीरो कार्ययोजना जारी करते केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अपर सचिव महमूद अहमद, राहगीरी फाउंडेशन की सह संस्थापक सारिका पांडा भट्ट एवं अन्य। फोटो: जागरण

अर्बन अड्डा' के समापन पर विजन जीरो कार्ययोजना जारी करते केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अपर सचिव महमूद अहमद, राहगीरी फाउंडेशन की सह संस्थापक सारिका पांडा भट्ट एवं अन्य। फोटो: जागरण

HighLights

  1. 2030 तक सड़क दुर्घटना मौतों को आधा करने का लक्ष्य

  2. साझा सड़कों पर वाहनों की गति 30 किमी/घंटा करने की सिफारिश

  3. दिल्ली-एनसीआर की 15 हजार स्कूल बसों का विद्युतीकरण रोडमैप जारी

राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। भारत में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को 2030 तक आधा करने के लक्ष्य को शून्य मौतों की दिशा में पहला पड़ाव माना जाना चाहिए। इसके लिए हर राज्य और जिले को अपने स्तर पर सड़क मौतों में कमी का लक्ष्य तय करना होगा।

अर्बन अड्डा 2026 के अंतिम दिन राहगीरी फाउंडेशन ने ‘इंडिया टुवर्ड्स विजन जीरो’ कार्ययोजना जारी करते हुए साझा सड़कों पर वाहनों की अधिकतम गति 30 किमी प्रति घंटा करने की भी सिफारिश की।

वर्ष 2024 में देश में सड़क दुर्घटनाओं में 1,77,175 लोगों की मौत हुई। इनमें 46.2 प्रतिशत दोपहिया चालक और 20.6 प्रतिशत पैदल यात्री थे। यानी दोपहिया सवारों और पैदल चलने वालों की हिस्सेदारी दो-तिहाई से अधिक रही।

30 किमी प्रति घंटे की सीमा लागू होगी

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अपर सचिव महमूद अहमद ने कहा कि सड़क ढांचे का विकास केवल वाहनों की आवाजाही तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि पैदल यात्रियों और दोपहिया सवारों की सुरक्षा प्राथमिकता होनी चाहिए।

कार्ययोजना में पैदल यात्रियों, दोपहिया वाहनों और मोटर वाहनों की आवाजाही वाली सड़कों पर 30 किमी प्रति घंटे की सीमा लागू करने, उभरे हुए क्रॉसिंग, संकरी लेन और लगातार फुटपाथ बनाने की सिफारिश की गई है।

देश में सबसे अधिक दोपहिया मौतों वाले 100 गलियारों को दुर्घटना आंकड़ों के आधार पर प्राथमिकता देने और हर जिले में जोखिम वाले स्थानों की सालाना पहचान कर छह महीने में आसान सुधार पूरे करने का सुझाव भी दिया गया है।

79 प्रतिशत सड़कें पैदल यात्रियों के लिए खराब

वॉक 21, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम और सीईपीटी विश्वविद्यालय की क्षेत्रीय वाकिंग रिपोर्ट के अनुसार भारत में आकलन की गई 79 प्रतिशत सड़कें पैदल सुरक्षा के अंतरराष्ट्रीय मानकों पर दो स्टार या उससे कम रेटिंग वाली हैं।

इनमें 44 प्रतिशत को केवल एक स्टार मिला। देश में केवल 34 प्रतिशत आबादी 500 मीटर के भीतर सार्वजनिक परिवहन की सुविधा से जुड़ी है।

15 हजार स्कूल बसें होंगी इलेक्ट्रिक

अर्बन अड्डा में दिल्ली सहित एनसीआर की करीब 15 हजार स्कूल बसों के विद्युतीकरण का रोडमैप भी जारी हुआ। दिल्ली, गुरुग्राम और नोएडा में ये बसें रोज 2.5 से 7.2 लाख बच्चों को स्कूल ले जाती हैं। सुबह आठ से नौ बजे के बीच इनका परिचालन पीएम 2.5 के 165 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर के चरम स्तर के साथ होता है।

रोडमैप में मार्च 2030 तक दिल्ली में 30 प्रतिशत स्कूल बसों को इलेक्ट्रिक करने के लक्ष्य को गुरुग्राम और नोएडा तक बढ़ाने और मार्च 2035 तक पूरी तरह इलेक्ट्रिक करने का सुझाव दिया गया है।

प्रति बस 20-25 लाख रुपये सहायता की सिफारिश है। रिपोर्ट के अनुसार इलेक्ट्रिक बस का प्रति किमी संचालन खर्च 54 प्रतिशत कम है, हालांकि मौजूदा कीमतों पर 10 साल की कुल लागत 91 प्रतिशत अधिक पड़ती हैं।

यह भी पढ़ें- दिल्ली में झुग्गियों की जगह पक्के मकान, 45 जेजे क्लस्टरों की बदलेगी तस्वीर; 21 हजार परिवारों को मिलेगा घर