दिल्ली में झुग्गियों की जगह पक्के मकान, 45 जेजे क्लस्टरों की बदलेगी तस्वीर; 21 हजार परिवारों को मिलेगा घर
डीडीए ने दिल्ली के 45 झुग्गी-झोपड़ी क्लस्टरों के इन-सिटू पुनर्वास के लिए व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार करने हेतु सलाहकार नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू की है।

दिल्ली में जहां झुग्गियां थीं, वहां पर अब पक्के मकान बनाए जाएंगे। फोटो: एआई जनरेटेड
HighLights
डीडीए ने 45 जेजे क्लस्टरों के पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू की
21,229 परिवारों को मिलेगा इन-सिटू बेहतर आवास और सुविधाएं
मास्टर प्लान-2047 के तहत एक लाख से अधिक लोग लाभान्वित होंगे
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। दिल्ली में झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों (जेजे क्लस्टर) में रहने वाले परिवारों के लिए बेहतर आवास और मूलभूत सुविधाओं की राह खुलने लगी है।
दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने मास्टर प्लान-2047 के तहत जेजे क्लस्टरों के इन-सिटू पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पहले चरण में दिल्ली के 45 जेजे क्लस्टरों को शामिल करते हुए 15 परियोजनाओं की व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
45 जेजे क्लस्टरों का होगा पुनर्वास अध्ययन
इसके लिए डीडीए ने तीन सलाहकार नियुक्त करने को प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं। ये एजेंसियां संबंधित क्लस्टरों में पुनर्वास की जरूरत, उपलब्ध जमीन की विकास क्षमता, बुनियादी ढांचे की आवश्यकता, परियोजना की वित्तीय व्यवहार्यता और उसे लागू करने के उपयुक्त मॉडल का अध्ययन करेंगी।
21 हजार से अधिक परिवारों को लाभ
इन 45 जेजे क्लस्टरों में करीब 21,229 परिवार रहते हैं और ये लगभग 135.74 एकड़ जमीन पर फैले हैं। डीडीए के मुताबिक प्रस्तावित परियोजनाओं से एक लाख से अधिक लोगों को लाभ मिलने की संभावना है।
इन-सिटू पुनर्वास का मतलब मौजूदा स्थान पर ही झुग्गीवासियों को बेहतर और सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें विस्थापन का सामना न करना पड़े।
650 से अधिक क्लस्टरों का है लक्ष्य
दिल्ली के मास्टर प्लान-2047 में राजधानी के 650 से अधिक जेजे क्लस्टरों में रहने वाले करीब 17 लाख लोगों के पुनर्वास का प्रावधान किया गया है। ऐसे में शुरुआती 45 क्लस्टरों के लिए व्यवहार्यता अध्ययन को इस व्यापक योजना की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
खास बात यह है कि पुनर्वास के साथ इन क्षेत्रों की जमीन का नियोजित और बेहतर उपयोग भी किया जा सकेगा। डीडीए के अनुसार, परियोजनाओं से नए आवासीय स्टॉक के साथ व्यावसायिक स्थान विकसित करने की संभावनाएं भी खुलेंगी।
इससे एक ओर मौजूदा निवासियों को बेहतर जीवन परिस्थितियां मिलेंगी, वहीं दूसरी ओर दिल्ली में आवास और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए अतिरिक्त स्थान उपलब्ध हो सकता है।
व्यवहार्यता रिपोर्ट बनेगी आधार
एलजी तरनजीत सिंह संधू के निर्देश पर शुरू की गई इस प्रक्रिया के तहत तैयार होने वाली व्यवहार्यता रिपोर्ट आगे परियोजनाओं की तकनीकी और वित्तीय संरचना तय करने का आधार बनेगी।
डीडीए का दावा है कि इससे पुनर्वास परियोजनाओं को व्यवस्थित, पारदर्शी और टिकाऊ तरीके से लागू करने में मदद मिलेगी।
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