एनसीआर में प्रदूषण पर चला 'चाबुक': चार साल में 24,691 इकाइयों का निरीक्षण और 1,609 इकाइयों पर हुई पाबंदी
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने एक RTI के जवाब में दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए उठाए ...और पढ़ें
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प्रदूषण से एनसीआर में रहने वाले हो गए हैं परेशान। प्रतीकात्मक तस्वीर
HighLights
24,691 इकाइयों का निरीक्षण, 1,609 को बंद करने के निर्देश।
3,003 ईंट भट्ठों का जिग-जैग तकनीक में रूपांतरण किया गया।
पराली प्रबंधन हेतु ₹3,955 करोड़ से अधिक की वित्तीय सहायता।
संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। भले ही इन सर्दियों में भी दिल्ली समेत एनसीआर भर में वायु गुणवत्ता ज्यादातर दिन 'बहुत खराब' ही रही है, लेकिन कागजी स्तर पर इससे निपटने की सख्ती भी खूब की गई है। एक आरटीआइ के आठ पेज लंबे जवाब में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने ऐसे तमाम कागजी कदमों की जानकारी भी साझा की है।
सामाजिक कार्यकर्ता अमित कुमार द्वारा लगाई गई इस आरटीआइ के जवाब में सीपीसीबी ने दिसंबर 2021 से दो जनवरी 2026 तक की सभी कार्रवाई साझा की है। सीपीसीबी ने सभी एजेंसियों के हवाले से यह भी दावा किया है कि वायु गुणवत्ता की स्थिति में पूर्व सालों की तुलना में लगातार सुधार देखने को मिल रहा है।
चार सालों के दौरान प्रदूषण से जंग में उठाए गए प्रमुख कदम
- निरीक्षण एवं बंद करने के आदेश : सीपीसीबी ने दिसंबर 2021 से दिल्ली और एनसीआर में 40 निरीक्षण दल तैनात किए हैं। 2 जनवरी 2026 तक 24,691 इकाइयों और परियोजनाओं का निरीक्षण किया गया और उल्लंघन के लिए 1,609 बंद करने के निर्देश जारी किए गए।
- ईंट भट्ठों का रूपांतरण : सीएक्यूएम के निर्देशों के अनुसार दिल्ली और एनसीआर में स्थित 4,608 ईंट भट्ठों में से 3,003 को जिग-जैग तकनीक में रूपांतरित कर दिया गया है। जिन ईंट भट्ठों का रूपांतरण नहीं हुआ है, उन्हें संचालन की अनुमति नहीं है।
- पराली जलाने पर नियंत्रण उपाय : 2018 में शुरू की गई फसल अवशेष प्रबंधन योजना के तहत दिल्ली और एनसीआर राज्यों में धान की पराली के इन-सीटू और एक्स-सीटू प्रबंधन के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। 2018-19 से 2025-26 तक, ₹3,955.45 करोड़ जारी किए गए हैं, 3,94,880 फसल अवशेष प्रबंधन मशीनें वितरित की गई हैं और 42,283 कस्टम हायरिंग सेंटर (सीएचसी) स्थापित किए गए हैं।
- ईंट भट्टों में बायोमास का उपयोग : सीएक्यूएम ने एनसीआर से बाहर के जिलों में स्थित ईंट भट्टों में धान के भूसे से बने बायोमास पेलेट्स और ब्रिकेट के अनिवार्य उपयोग के निर्देश जारी किए हैं।
- औद्योगिक ईंधन परिवर्तन : एनसीआर में एक जनवरी 2023 से अनुमोदित ईंधन सूची लागू है। 7,759 ईंधन आधारित उद्योगों में से 7,449 ने अनुमोदित स्वच्छ ईंधनों का उपयोग शुरू कर दिया है।
- उद्योगों में उत्सर्जन निगरानी : दिल्ली और एनसीआर में लाल श्रेणी के उद्योगों के लिए आनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (ओसीईएमएस) की स्थापना अनिवार्य कर दी गई है।
- विद्युत संयंत्रों में बायोमास सह-दहन : दिल्ली से 300 किमी के दायरे में स्थित तापीय विद्युत संयंत्रों, जिनमें एनसीआर उद्योगों के कैप्टिव विद्युत संयंत्र भी शामिल हैं, में पांच से 10 प्रतिशत बायोमास सह-दहन के निर्देश जारी किए गए हैं।
- निर्माण स्थल पर धूल नियंत्रण उपाय : सीएक्यूएम ने निर्माण और विध्वंस स्थलों के लिए एंटी-स्माग गन लगाने, धूल नियंत्रण और प्रबंधन प्रकोष्ठों के गठन और एक ऑनलाइन निगरानी पोर्टल के उपयोग का निर्देश दिया है।
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