निर्भया कांड के 13 साल बाद कहां खड़ी दिल्ली? 2013 से 2025 तक के आंकड़े खोल रहे महिला सुरक्षा की पोल
निर्भया कांड के 13 साल बाद भी दिल्ली में महिला सुरक्षा पर सवाल बरकरार हैं, जहां पुलिस के उच्च सॉल्व रेट के बावजूद अदालतों में दोषसिद्धि दर बेहद कम है।

महिला सुरक्षा को लेकर कहां खड़ी है दिल्ली। फोटो: सांकेतिक
HighLights
निर्भया के 13 साल बाद भी दिल्ली में महिला सुरक्षा एक चुनौती
पुलिस के उच्च सॉल्व रेट के बावजूद अदालती दोषसिद्धि दर 4.3%
सीसीटीवी, सार्वजनिक परिवहन सुरक्षा पर हाईकोर्ट के सवाल बरकरार
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। 2012 के निर्भया कांड के बाद दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा के लिए CCTV, स्ट्रीट लाइट, सार्वजनिक परिवहन की सुरक्षा, पुलिस व्यवस्था और हेल्पलाइन जैसे कई उपायों पर काम हुआ।
लेकिन 13 साल बाद भी सुरक्षा और न्याय की रफ्तार को लेकर सवाल बने हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR के हालिया यौन अपराधों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए 2012 के निर्भया कांड से दर्दनाक समानताएं बताईं।
दिल्ली पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक 2013 से 2025 के बीच राजधानी में 26,582 रेप केस दर्ज हुए। 2025 में 1,901 मामले दर्ज हुए, जो 2020 के बाद सबसे कम वार्षिक आंकड़ा बताया गया है।
दूसरी तरफ, 2021 से 2024 के बीच दिल्ली की पांच जिला अदालतों के RTI आंकड़ों में 3,097 मामलों में सिर्फ 133 दोषसिद्धियां हुईं। यह 4.3 प्रतिशत की दोषसिद्धि दर है।
13 साल में 26,582 रेप केस दर्ज
Delhi Police के आंकड़ों में 2013 से 2025 के बीच रेप मामलों की संख्या में उतार-चढ़ाव दिखता है। 2013 में 1,636 मामले दर्ज हुए थे। 2014 और 2015 में यह संख्या 2,000 के पार पहुंच गई।
2020 में कोविड लॉकडाउन के दौरान 1,699 मामले दर्ज हुए। इसके बाद संख्या फिर बढ़ी और 2023 में 2,141 मामलों तक पहुंची। 2024 में 2,076 और 2025 में 1,901 मामले दर्ज किए गए।
| वर्ष | दर्ज रेप केस |
|---|---|
| 2013 | 1,636 |
| 2014 | 2,166 |
| 2015 | 2,199 |
| 2019 | 2,168 |
| 2020 | 1,699 |
| 2021 | 2,076 |
| 2023 | 2,141 |
| 2024 | 2,076 |
| 2025 | 1,901 |
नोट: Delhi Police में दर्ज आंकड़ों के आधार पर।
केस दर्ज होने के बाद न्याय की रफ्तार
रेप के मामलों की संख्या के साथ अदालतों में उनकी स्थिति भी तस्वीर का अहम हिस्सा है। एक न्यूज रिपोर्ट के मुताबिक RTI के जरिए दिल्ली की जिला अदालतों से मिली जानकारी के विश्लेषण में 2021 से 2024 के बीच पांच जिला अदालतों में 3,097 मामलों का ट्रायल या निपटारा हुआ।
इनमें सिर्फ 133 मामलों में दोषसिद्धि हुई। इस आधार पर दोषसिद्धि दर 4.3 प्रतिशत रही। इस विश्लेषण में पटियाला हाउस, साकेत, तीस हजारी, रोहिणी और कड़कड़डूमा अदालतों की जानकारी शामिल थी। राउज एवेन्यू और द्वारका का डेटा इसमें शामिल नहीं था। POCSO एक्ट के मामले भी इस विश्लेषण का हिस्सा नहीं थे।
निर्भया के बाद सुरक्षा पर जोर
निर्भया कांड के तीन दिन बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले पर स्वतः संज्ञान लेकर कार्यवाही शुरू की थी। इसके बाद वर्षों में अदालत ने सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े कई निर्देश दिए।
इनमें पुलिस थानों और अपराध-प्रवण इलाकों में CCTV लगाने, अंधेरे और संवेदनशील क्षेत्रों में स्ट्रीट लाइट बढ़ाने, सार्वजनिक परिवहन में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और दिल्ली में पुलिस बल बढ़ाने से जुड़े निर्देश शामिल थे।
अदालत ने फॉरेंसिक सैंपल की जांच में देरी कम करने और यौन अपराधों के पीड़ितों को मुआवजा जल्द उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया।
CCTV से लेकर बस सुरक्षा तक
दिसंबर 2023 में दिल्ली हाईकोर्ट की सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार से DTC बसों में ड्राइवर और कंडक्टर की सीट के पास कैमरे और अलर्ट बटन लगाने की व्यवहार्यता पर जानकारी मांगी गई थी।
CCTV डेटा को सुरक्षित रखने की समयसीमा और CCTV सिस्टम के ऑडिट से जुड़ी जानकारी भी मांगी गई थी। जुलाई 2025 तक दिल्ली सरकार ने इन जानकारियों के लिए अतिरिक्त समय मांगा था।
इसके बाद PIL कई बार सूचीबद्ध हुई, लेकिन प्रभावी सुनवाई दर्ज नहीं हुई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 2023 के बाद हुई 12 सुनवाइयों में ज्यादातर कोर्ट रिकॉर्ड में अगली तारीख दिए जाने का उल्लेख मिला। मामला 9 सितंबर 2026 को फिर सूचीबद्ध हुआ और अब नवंबर में सुनवाई निर्धारित है।
दिल्ली में 6,630 CCTV कैमरे
दिल्ली सरकार ने 2023 में हाई कोर्ट को बताया था कि संवेदनशील इलाकों में 6,630 CCTV कैमरे लगाए गए हैं। इनकी निगरानी के लिए 50 मास्टर कंट्रोल रूम का नेटवर्क बताया गया था।
सरकार ने यह भी बताया था कि CCTV पोल्स पर पैनिक बटन लगाने का प्रस्ताव दिल्ली पुलिस की टेक्नोलॉजी डिविजन के विचाराधीन था।
2025 में रेप केस हुए कम
Delhi Police के आंकड़ों में 2025 में रेप मामलों में कमी दिखाई देती है।
2023: 2,141 मामले
2024: 2,076 मामले
2025: 1,901 मामले
पुलिस के मुताबिक 2025 में दर्ज 1,901 मामलों में से 1,844 से अधिक मामलों को FIR दर्ज होने के तीन महीने के भीतर सुलझाया गया और संदिग्धों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया। पुलिस ने रेप मामलों में करीब 97 प्रतिशत disposal/solving rate का दावा भी किया।
हालांकि केस दर्ज होना, पुलिस द्वारा केस सुलझाना और अदालत में दोषसिद्धि, तीनों अलग-अलग चरण हैं। इसलिए पुलिस के disposal आंकड़े और अदालत की conviction rate को एक ही पैमाने पर नहीं देखा जा सकता है।
निर्भया कांड के बाद सुरक्षा का ढांचा बढ़ने के बावजूद सार्वजनिक स्थानों की निगरानी और न्यायिक प्रक्रिया की लगातार निगरानी की जरूरत का मुद्दा फिर चर्चा में है।
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