दिल्ली की महिलाओं में क्यों बढ़ रही खून की कमी? संसद में पेश हेल्थ रिपोर्ट में एनीमिया के चौंकाने वाले आंकड़े
राजधानी दिल्ली में लगभग आधी महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं, दो दशकों में यह समस्या 12% बढ़ी है। पंजाब, गुजरात ...और पढ़ें

दिल्ली में महिलाओं में एनीमिया की बीमारी बढ़ी। फोटो: एआई जनरेटेड
HighLights
दिल्ली में हर दूसरी महिला एनीमिया से ग्रस्त, 12% वृद्धि
ऑनलाइन अपराधों में तेजी से बढ़ोतरी, फर्जी प्रोफाइल मुख्य
महिलाओं के लिए पोषण और डिजिटल सुरक्षा बड़ी चुनौती
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ाने वाली तस्वीर सामने आई है। देश की आजादी के 78 साल बाद भी दिल्ली में 15 से 49 वर्ष की लगभग हर दूसरी महिला एनीमिया (खून की कमी) से जूझ रही है।
संसद में पेश स्वास्थ्य रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार पिछले दो दशकों में दिल्ली में महिलाओं में एनीमिया के मामलों में करीब 12.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक 2005-06 में दिल्ली में 44.3 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से पीड़ित थीं, जबकि हालिया आंकड़ों में यह बढ़कर 49.9 प्रतिशत तक पहुंच गया है। यानी राजधानी में अब लगभग आधी महिला आबादी खून की कमी से प्रभावित है।

कई राज्यों में भी बिगड़ी स्थिति
महिलाओं में एनीमिया की समस्या केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है। बीते 20 वर्षों में कई बड़े राज्यों में भी स्थिति खराब हुई है। सबसे ज्यादा वृद्धि पंजाब में 54.4 प्रतिशत दर्ज की गई, जहां 38 प्रतिशत से बढ़कर यह आंकड़ा 58.7 प्रतिशत तक पहुंच गया।
इसके अलावा गुजरात में 17.5 प्रतित, महाराष्ट्र में 11.9 प्रतिशत और हरियाणा में 7.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि कुछ राज्यों में मामूली सुधार भी देखा गया है। बिहार में 5.7 प्रतिशत और मध्य प्रदेश में 2.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
विभिन्न राज्यों में महिलाओं में एनीमिया की स्थिति
| राज्य | 2005-06 (NFHS-3) | 2026 रिपोर्ट (NFHS-5) | बदलाव |
|---|---|---|---|
| पंजाब | 38% | 58.7% | 54.4% |
| हरियाणा | 56.1% | 60.4% | 7.6% |
| दिल्ली (NCT) | 44.3% | 49.9% | 12.6% |
| गुजरात | 55.3% | 65% | 17.5% |
| महाराष्ट्र | 48.4% | 54.2% | 11.9% |
| छत्तीसगढ़ | 57.5% | 60.8% | 5.7% |
| राजस्थान | 53.1% | 54.4% | 2.4% |
| झारखंड | 69.5% | 65.3% | 6% |
| बिहार | 67.4% | 63.5% | 5.7% |
| मध्य प्रदेश | 56% | 54.7% | 2.3% |
लद्दाख में सबसे ज्यादा गंभीर स्थिति
महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने राज्यसभा में बताया कि देश में लद्दाख में 92.8 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं, जो सबसे चिंताजनक स्थिति है।
| क्षेत्र | एनीमिया से पीड़ित महिलाएं (%) |
|---|---|
| लद्दाख | 92.8% |
| पश्चिम बंगाल | 71.4% |
| त्रिपुरा | 67.2% |
| असम | 65.9% |
| जम्मू-कश्मीर | 65.9% |
इसके अलावा पश्चिम बंगाल (71.4%), त्रिपुरा (67.2%), असम (65.9%) और जम्मू-कश्मीर (65.9%) में भी बड़ी संख्या में महिलाएं खून की कमी से प्रभावित हैं।वहीं मणिपुर (29.4%) और केरल (36.3%) में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर बताई गई है।
बेहतर स्थिति वाले क्षेत्र
| क्षेत्र | एनीमिया (%) |
|---|---|
| लक्षद्वीप | 25.8% |
| नगालैंड | 28.9% |
| मणिपुर | 29.4% |
| केरल | 36.3% |
महिलाओं के सामने ऑनलाइन अपराध का नया खतरा
इसी बीच महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एक और चिंता सामने आई है। गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार के अनुसार देश में महिलाओं के खिलाफ ऑनलाइन और सोशल मीडिया से जुड़े अपराध पिछले पांच वर्षों में तेजी से बढ़े हैं।
- 2021 में कुल 72,301 शिकायतें दर्ज हुई थीं।
- 2025 तक यह संख्या बढ़कर 1,73,766 हो गई।
सबसे ज्यादा वृद्धि फर्जी या किसी और के नाम से बनाई गई प्रोफाइल के मामलों में देखी गई है।
- 2021 में ऐसे 15,843 मामले थे, जो 2025 में बढ़कर 46,784 हो गए, यानी लगभग 195 प्रतिशत की वृद्धि।
इसके अलावा साइबर बुलिइंग, स्टाकिंग और सेक्सटिंग के मामले भी 21,589 से बढ़कर 45,832 तक पहुंच गए। प्रोफाइल हैकिंग और पहचान की चोरी के मामलों में भी तेज उछाल देखा गया है, जो 10,650 से बढ़कर 34,533 हो गए।
| अपराध श्रेणी | 2021 | 2025 | बढ़ोतरी |
|---|---|---|---|
| कुल शिकायतें | 72,301 | 1,73,766 | बड़ा उछाल |
| फर्जी/दूसरे नाम से प्रोफाइल | 15,843 | 46,784 | 195% |
| साइबर बुलिइंग, स्टाकिंग, सेक्सटिंग | 21,589 | 45,832 | 112% |
| प्रोफाइल हैकिंग/पहचान की चोरी | 10,650 | 34,533 | वृद्धि |
पोषण और डिजिटल सुरक्षा दोनों बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं में एनीमिया की बढ़ती समस्या और ऑनलाइन अपराधों में तेज इजाफा यह संकेत देता है कि महिलाओं के सामने स्वास्थ्य और डिजिटल सुरक्षा दोनों मोर्चों पर नई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। दिल्ली जैसे बड़े शहर में भी स्थिति चिंताजनक होना नीति और जागरूकता दोनों स्तरों पर बड़े हस्तक्षेप की जरूरत को दिखाता है।
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