दिल्ली में खतरनाक हालात... आपके घर में पानी नहीं आ रहा 'जहर'; सरकार को सुधारने में खर्च करने होंगे 30 हजार करोड़
दिल्ली का जल आपूर्ति नेटवर्क वर्षों की अनदेखी से जर्जर हो गया है, जिससे लगभग 50% पेयजल बर्बाद हो रहा ...और पढ़ें
-1767787151889_m.webp)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
संतोष कुमार सिंह, नई दिल्ली। दिल्ली अपने निवासियों की लगभग 90 प्रतिशत पेयजल आवश्यकता पूरी करने के लिए पड़ोसी राज्यों पर निर्भर है। इसके बावजूद उपलब्ध पानी को सहेजकर अपने वैध उपभोक्ताओं तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने में विफल है।
वर्षों की अनदेखी के कारण स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि जल उपचार संयंत्रों (डब्ल्यूटीपी) और अन्य स्रोतों से उपलब्ध पेयजल का लगभग 50 प्रतिशत ही उपभोक्ताओं तक पहुंच रहा है। शेष पानी या तो रिसाव से बर्बाद हो रहा है या फिर चोरी हो रहा है।
बताया गया कि अधिकांश स्थानों पर पानी की पाइपलाइन के साथ सीवर लाइन चल रही है। इस कारण कई क्षेत्रों में दूषित पानी की आपूर्ति की समस्या है। पेयजल आपूर्ति की स्थिति सुधारने के लिए लगभग 30 हजार करोड़ रुपये की आवश्यकता है।
दूषित पानी की आपूर्ति को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट और एनजीटी कई बार नाराजगी जता चुके हैं। योजना विहार, आनंद विहार, जनकपुरी सहित कई स्थानों पर दूषित पानी की आपूर्ति का मामला अदालत तक पहुंच चुका है।
सरकार का दावा है कि 93 प्रतिशत से अधिक घरों में नल से पानी की आपूर्ति होती है, परंतु सच्चाई इससे अलग है। संगम विहार, देवली सहित कई अनधिकृत कॉलोनियों व झुग्गी बस्तियों में पानी कनेक्शन नहीं है। कई स्थानों पर नियमित पानी नहीं आता या फिर दूषित आता है। इसका लाभ उठाकर टैंकर माफिया इन्हें चोरी का पानी बेचते हैं।
दिल्ली जल बोर्ड के सामने पानी की बर्बादी रोकने की बड़ी चुनौती है, लेकिन उसे यह भी नहीं मालूम कि रिसाव के कारण कितना पानी सड़कों पर व नालियों में बह जाता है।
पिछले वर्षों में आम आदमी पार्टी की सरकार और केंद्र सरकार के बीच विवाद से स्थिति और अधिक खराब हुई। जल बोर्ड में भ्रष्टाचार के कारण उसका घाटा बढ़ा। भ्रष्टाचार की शिकायतों के कारण वर्ष 2023-24 में दिल्ली सरकार के वित्त विभाग ने दिल्ली जल बोर्ड को फंड जारी करने में भी देरी की। इससे रखरखाव का काम बुरी तरह प्रभावित हुआ।
यह भी पढ़ें- गाजियाबाद के खोड़ा में नियमित होगी गंगाजल की आपूर्ति, प्रत्येक टैंकर का बनेगा रूटमैप
नई सरकार बनने के बाद फंड आवंटन की समस्या दूर हुई है, लेकिन जल आपूर्ति की स्थिति और पाइपलाइन बदलने के काम में बहुत अधिक सुधार नहीं हुआ है।
18 प्रतिशत से अधिक पाइपलाइन 30 वर्ष बहुत पुरानी
दिल्ली जल बोर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, राजधानी की 15,600 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन में से 2800 किलोमीटर (लगभग 18 प्रतिशत) तीन दशक से अधिक पुरानी है। इनके क्षतिग्रस्त होने के कारण घरों में दूषित पानी पहुंचने का खतरा रहता है। इन्हें बदलने की आवश्यकता है।
जापान इंटरनेशनल कोआपरेशन एजेंसी (जेआइसीए) या अन्य तकनीकी विशेषज्ञों से जल आपूर्ति नेटवर्क का अध्ययन कराने का निर्णय लिया गया है। इसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे का कदम उठाया जाएगा। मध्य दिल्ली सहित कई क्षेत्रों में वर्षों पुरानी पाइपलाइन से पानी की आपूर्ति हो रही है।
यह भी पढ़ें- गाजियाबाद की आबादी शुद्ध पेयजल को तरस रही, 28 में से 19 जगहों पर टीडीएस 500 के पार
पूर्व की आप सरकार ने दावा किया था कि उसके कार्यकाल में लगभग 3500 किलोमीटर पुरानी पाइपलाइन बदली गई, लेकिन अभी भी अधिकांश क्षेत्रों में समस्या बनी हुई है। दिल्ली सरकार के जल मंत्री प्रवेश वर्मा का भी कहना है कि राजधानी में कई स्थानों पर पाइपलाइन 50 से 80 वर्ष तक पुरानी है। इन्हें बदलने के लिए 30 हजार करोड़ से अधिक फंड की आवश्यकता है। चरणबद्ध तरीके से इसका काम किया जाएगा।
पानी के नमूने असंतोषजनक मिले
दिल्ली जल बोर्ड की 22 से 26 दिसंबर की जल गुणवत्ता निगरानी रिपोर्ट के अनुसार विभिन्न स्थानों से लिए गए 7129 नमूनों में से 100 असंतोषजनक मिले हैं। कुछ नमूने भूमिगत जलाशयों और बूस्टर पंपिंग स्टेशनों से भी लिए गए थे। मानसरोवर पार्क, पूरण नगर, पालम डीडीए फ्लैट्स, द्वारका सेक्टर 13, उत्तम नगर के भगत एन्क्लेव, विजय विहार व किरण गार्डन, सिरसपुर बूस्टर स्टेशन, मोहम्मदपुर, बुराड़ी की विजय कालोनी, जोनापुर और घिटोरनी से नमूने लिए गए थे।
घरों में साफ पानी नहीं पहुंचने से हो रही पेयजल की बर्बादी
दिल्ली में जल शोधन संयंत्र (डब्ल्यूटीपी) का पानी गुणवत्ता मानकों के अनुरूप है, लेकिन क्षतिग्रस्त पाइपलाइन के कारण घरों तक पहुंचते-पहुंचते अक्सर दूषित हो जाता है। इस कारण लोग आरओ का प्रयोग करते हैं। दिल्ली में लगभग 80 लाख घरेलू आरओ लगे हुए हैं, जिससे प्रतिदिन चार करोड़ लीटर से ज्यादा पेयजल बर्बाद हो रहा है।
दिल्ली सरकार द्वारा उठाए गए कदम
- दिल्ली सरकार ने वर्ष 2025-26 के बजट में जल आपूर्ति और सीवर लाइन के लिए नौ हजार करोड़ रुपये का प्रविधान किया है।
- चंद्रावल जलग्रहण क्षेत्र सुधार परियोजना के अंतर्गत एक हजार किलोमीटर नई जल आपूर्ति पाइपलाइन बिछाई जाएगी। गांधी नगर, आइपी एक्सटेंशन, योजना विहार, जागृति एन्क्लेव, झिलमिल औद्योगिक क्षेत्र में नई पाइपलाइन बिछाने का काम चल रहा है।
- राजधानी में जल प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए आइआइटी कानपुर से समझौता किया गया है।
- पानी व सीवर की व्यवस्था सुधारने के लिए 68 विधानसभा क्षेत्रों को 734 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। पहली बार अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों के लिए फंड जारी हुआ है, जिससे समस्या के समाधान के लिए त्वरित कदम उठाए जा सकें।
अमृत-1 के अंतर्गत बदली गई 200 किलोमीटर पाइपलाइन
अटल मिशन फॉर रिजुवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन (अमृत) 1 योजना के अंतर्गत दिल्ली में 800 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इससे पुरानी दिल्ली सहित अन्य स्थानों पर 200 किलोमीटर से अधिक पुरानी पाइपलाइन बदली गई। इसके साथ ही पानी वितरण लाइनों पर फ्लो मीटर लगाए गए। मंगोलपुरी में जलाशय व बूस्टर पंपिंग स्टेशन बनाने के साथ ही सोनिया विहार व नजफगढ़ में पानी की भंडारण क्षमता बढ़ाई गई। इसके अतिरिक्त कई अन्य कार्य किए गए।
अमृत-2 योजना के अंतर्गत खर्च होंगे 2880 करोड़
राजधानी के हर घर में पेयजल व सीवर लाइन नेटवर्क उपलब्ध कराने और जल स्रोतों की दशा सुधारने के लिए केंद्र सरकार ने अमृत 2 के लिए 2880 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। 800 करोड़ रुपये से अनधिकृत कॉलोनियों में सीवेज नेटवर्क को मजबूत किया जाएगा। एनडीएमसी क्षेत्र में स्थित झुग्गियों में पेयजल उपलब्ध कराने के लिए काम होगा।
