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दिल्ली में 33 लाख वोटर्स का वेरिफिकेशन बना मुसीबत, 700-700 मतदाताओं का बोझ संभाल रहे BLO

Published: Tue, 06 Oct 2026 07:59 PM (IST)Updated: Tue, 06 Oct 2026 08:06 PM (IST)

दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान 33 लाख मतदाताओं के सत्यापन का कार्य बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

सांकेतिक तस्वीर एआई जनरेटेड

सांकेतिक तस्वीर एआई जनरेटेड

HighLights

  1. दिल्ली में 33 लाख मतदाताओं का सत्यापन बड़ी चुनौती।

  2. कुछ बीएलओ को 700 से अधिक वोटर्स जांचने हैं।

  3. प्रत्येक सत्यापन में 15-25 मिनट का समय लगता है।

संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान करीब 33 लाख मतदाताओं को जारी नोटिसों के सत्यापन की जिम्मेदारी अब बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।

बूथवार आंकड़ों के विश्लेषण से सामने आया है कि दिल्ली के 14,946 बीएलओ में से करीब आधे को 215 या इससे अधिक मतदाताओं का सत्यापन करना है। कुछ मामलों में यह संख्या 700 के पार पहुंच गई है। हरिनगर विधानसभा क्षेत्र में एक बीएलओ के जिम्मे 741 मतदाताओं के सत्यापन का मामला सामने आया है।

एक मामले में 15-25 मिनट का लगता है समय

नोटिस मिलने के बाद मतदाताओं से संपर्क कर उनके दावों और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच की जा रही है। बीएलओ के अनुसार, प्रत्येक मामले में जानकारी जुटाने और उसे सत्यापित करने में करीब 15 से 25 मिनट तक लग जाते हैं।

ऐसे में एक बीएलओ के लिए बड़ी संख्या में मतदाताओं तक पहुंचना समय और संसाधन दोनों की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण है। कई स्थानों पर मतदाताओं को बीएलओ के घर, स्कूल अथवा अन्य निर्धारित स्थानों पर बुलाकर भी सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।

एक बूथ पर 635 में 609 को नोटिस

एसआईआर के दौरान कुछ बूथों पर नोटिस पाने वाले मतदाताओं का अनुपात बेहद अधिक है। बल्लीमारान विधानसभा क्षेत्र के एक बूथ पर ड्राफ्ट मतदाता सूची में 635 मतदाता दर्ज थे, जिनमें 609 को नोटिस दिया गया है। यानी इस बूथ के करीब 96 प्रतिशत मतदाता सत्यापन के दायरे में आ गए हैं।

पहले भी हो चुका है घर-घर संपर्क

बीएलओ पहले ही एसआईआर की गणना प्रक्रिया के दौरान घर-घर जाकर मतदाताओं से जानकारी जुटा चुके हैं। अब नोटिस जारी होने के बाद कई मामलों में दोबारा संपर्क करना पड़ रहा है। इसके कारण बीएलओ पर अतिरिक्त कार्यभार बढ़ा है।

खासतौर पर वे बीएलओ जो सरकारी स्कूलों में शिक्षक समेत अन्य विभागीय जिम्मेदारियां भी निभा रहे हैं, उनके लिए समय का प्रबंधन महत्वपूर्ण चुनौती बन गया है।

हालांकि निर्वाचन प्रक्रिया में सत्यापन का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना है, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर नोटिस जारी होने के बाद उसकी जमीनी प्रक्रिया को पूरा करना प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण कार्य बन गया है। हालांकि मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि समस्या इतनी बड़ी नहीं है। समय प्रबंधन के साथ सभी मामले निपटाए जा सकते हैं।

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