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एक-एक कागज का हिसाब! मतदाता सूची में नाम बनाए रखने के लिए दिल्ली में पुराने दस्तावेजों की तलाश तेज

Published: Tue, 15 Sep 2026 09:44 PM (IST)

एसआईआर नोटिस मिलने के बाद लोग मतदान के अधिकार को सुरक्षित रखने के लिए वर्षों पुराने दस्तावेज ढूंढ रहे हैं। ...और पढ़ें

मतदाता सूची में नाम के लिए नोटिस मिलने पर पुराने कागजात खंगाल रहे लोग। (एआई जेनरेटेड इमेज)

मतदाता सूची में नाम के लिए नोटिस मिलने पर पुराने कागजात खंगाल रहे लोग। (एआई जेनरेटेड इमेज)

HighLights

  1. एसआईआर नोटिस के बाद पुराने कागजात ढूंढ रहे मतदाता।

  2. मतदान अधिकार सुरक्षित रखने को दस्तावेज पेश कर रहे लोग।

  3. सुनवाई केंद्रों पर दावों और आपत्तियों का निपटारा जारी।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। एसआईआर का नोटिस आते ही लोगों को पुराने कागजों की चिंता सताने लगी है। जो बिजली, पानी के बिल समेत अन्य दस्तावेज वर्षों से किसी सामान व कागजों की गट्ठर में दबे पड़े थे, उन्हें अब ढूंढकर सुनवाई केंद्र तक बाइज्जत लाया जा रहा है।

इस क्रम में वो संदूक भी खंगाले जा रहे हैं, जो वर्षों से बंद पड़े थे और उनपर धूल की मोटी परत जमने लगी थी। क्योंकि, ये वर्षों पुराने दस्तावेज अब एसआइआर में मतदान के अधिकार को सुरक्षित रखने के उनके दावों में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

राउज एवेन्यू स्थित सर्वोदय कन्या विद्यालय में मंगलवार को बने सुनवाई केंद्र पर पहुंचे मतदाताओं की कहानी कुछ ऐसी ही रही। किसी को मैपिंग पर जवाब देना था तो किसी को वर्षों पुराना दस्तावेज पेश कर अपने दावे को पुख्ता करना था। केंद्र पर व्यवस्था सामान्य रही और लोगों की आपत्तियों की सुनवाई की गई।

मतदाता सोनू कोहली के सामने भी ऐसी ही मुश्किल आई

मतदाता सोनू कोहली के सामने भी ऐसी ही मुश्किल आई। उन्होंने बताया कि वह संयुक्त परिवार में रहते हैं और उनके तीन भाई भी साथ रहते हैं। सभी ने पिता के नाम के आधार पर 2002 की मतदाता सूची से मैपिंग कराई थी। उसके बावजूद नोटिस सिर्फ उन्हें मिला। सुनवाई के दौरान उनसे वर्ष 2011 का बिजली बिल मांगा गया।

सोनू ने कहा कि गनीमत रही कि उनके पिता की पुराने कागज संभालकर रखने की आदत उनके लिए वरदान साबित हुई है। अन्यथा 15 साल पुराना बिजली बिल मिलना असंभव ही था। राहत की सांस लेते हुए वह कहते हैं कि बिल मिल गया और उन्होंने उसे केंद्र पर जमा करा दिया है। अब उन्हें उम्मीद है कि उससे उनका नाम अंतिम मतदाता सूची में आने का रास्ता साफ हो जाएगा।

मटिया महल के साजेब भी नोटिस लेकर केंद्र पहुंचे

मटिया महल के साजेब भी नोटिस लेकर केंद्र पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि उनके परिवार के किसी अन्य सदस्य को नोटिस नहीं मिला, जबकि उन्हें पिता के साथ मैपिंग नहीं होने का हवाला देते हुए नोटिस दिया गया। उनका कहना था कि मैपिंग पहले ही हो चुकी थी। बीएलओ ने जो दस्तावेज मांगे थे, वे सभी जमा करा दिए गए हैं और उनका नोटिस भी निस्तारित हो चुका है।

साजेब ने बताया कि ऐसे कई लोग हैं, जिन्हें नोटिस मिला है, जबकि उन्होंने पहले ही जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर रखी थीं। लोगों की भीड़ एक साथ न जुटे, इसके लिए सुनवाई केंद्रों पर तीन स्लाट बनाए गए हैं। सुबह नौ से 12, दोपहर 12 से 2:30 और तीन से शाम पांच बजे तक लोगों को बुलाया जा रहा है।

हालांकि, कुछ केंद्रों पर भीड़ के कारण परेशानी की शिकायतें भी सामने आई हैं। सूत्रों के अनुसार, ड्राफ्ट रोल में शामिल करीब 97 लाख लोगों में से लगभग 33 लाख को नोटिस भेजे गए हैं। दावे और आपत्ति 30 सितंबर तक लिए जाएंगे, 29 अक्टूबर तक इनका निपटारा होगा और चार नवंबर को अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी।

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