दिल्ली SIR पर विवाद, घर में गैरमौजूद मिले VIP के नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में बरकरार; प्रक्रिया पर उठे सवाल
दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान बीएलओ द्वारा अनुपस्थित पाए गए वीआईपी मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट ...और पढ़ें
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दिल्ली में एसआईआर की प्रक्रिया पर उठे सवाल।
HighLights
बीएलओ ने वीआईपी मतदाताओं को 'स्थानांतरित' या 'अनुपस्थित' दर्ज किया।
इसके बावजूद, उनके नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में बनाए रखे गए।
कुछ प्रमुख वीआईपी को विसंगतियों पर नोटिस भी मिले।
संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान वीआइपी मतदाताओं को लेकर प्रक्रिया पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। घर-घर सत्यापन के दौरान कुछ प्रमुख लोगों के बारे में बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) ने ‘स्थायी रूप से स्थानांतरित’ या ‘अनुपस्थित/पता नहीं चला’ दर्ज किया। इसके बावजूद बाद में इन्हीं नामों को अलग डेटाबेस से मिलान कर ड्राफ्ट मतदाता सूची में बनाए रखा गया।
मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सामान्य मतदाताओं के सत्यापन में दर्ज जानकारी के आधार पर आगे की प्रक्रिया होती है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि बीएलओ के सत्यापन में किसी मतदाता के घर पर नहीं मिलने या स्थानांतरित होने की जानकारी दर्ज होने के बाद उसे बाद की प्रक्रिया में किस आधार पर बदल दिया गया।
चुनाव अधिकारियों के अनुसार, जनप्रतिनिधियों, कुछ घोषित पदों पर रहने वाले लोगों और विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख हस्तियों को ‘चिन्हित निर्वाचक’ के तौर पर चुनावी डेटाबेस में अलग से चिह्नित करने की व्यवस्था पहले से है। निर्वाचन आयोग के 2023 के मैनुअल में भी ऐसे मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में सुनिश्चित करने की बात कही गई है, ताकि दावे-आपत्तियों के दौरान जरूरी दस्तावेज जुटाए जा सकें। हालांकि, ऐसे मतदाताओं को नोटिस या दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया से छूट नहीं है।
दिल्ली में करीब 3,000 वीआईपी मतदाता
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय के मुताबिक राजधानी में करीब 3,000 वीआइपी मतदाता हैं। चुनाव आयोग के नियम और मैनुअल में 2018 से वीआइपी मतदाताओं से संबंधित प्रविधान मौजूद हैं। ऐसे मतदाताओं को ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल करने की प्रक्रिया में विशेष सुविधा दी जा सकती है, लेकिन उन्हें दावे-आपत्तियों या सत्यापन से पूरी तरह छूट नहीं है।
ऐप के जरिए अब बीएलओ घर-घर सत्यापन के दौरान किसी मतदाता को वीआइपी के रूप में चिन्हित कर सकते हैं। बाद में यह जानकारी एईआरओ, ईआरओ और मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के स्तर पर सत्यापित की जाती है। खास बात है कि यह सुविधा एसआइआर की प्रक्रिया शुरू होने के बाद जोड़ी गई।
सीईओ कार्यालय ने बताया कि बीएलओ ऐप में यह बदलाव 30 जुलाई को किया गया था। एप्पल के ऐप स्टोर पर चार अगस्त के अपडेट में इसका विवरण “मार्क वीआइपी निर्वाचक से जुड़ी जानकारी में बदलाव।” पहले से है।
फिर नोटिस की सूची में भी आए नाम
दिलचस्प यह है कि चिन्हित निर्वाचक के तौर पर ड्राफ्ट सूची में बनाए रखे गए कई नाम बाद में मतदाता रिकार्ड में ‘नो मैपिंग’ या दूसरी तार्किक विसंगतियों के कारण नोटिस के लिए चिन्हित हुए। इनमें विदेश मंत्री एस. जयशंकर, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू समेत कई प्रमुख नाम शामिल बताए गए हैं। यानी ‘चिन्हित निर्वाचक’ होना नोटिस से पूरी तरह सुरक्षा नहीं देता।
सबसे अहम सवाल उन मामलों को लेकर है, जहां चिन्हित निर्वाचक की सूची में मृत या दोहरे नाम भी रह गए। पूर्व प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष रहे बिबेक देबराय का नाम भी ड्राफ्ट सूची में रहने और बाद में ‘नो मैपिंग’ के कारण नोटिस के लिए चिन्हित होने का मामला सामने आया है।
अब ऐसे मामलों में निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी के निर्देश पर बीएलओ संबंधित पते पर जाकर दोबारा सत्यापन करेंगे। इसके बाद रिकॉर्ड में मिली विसंगतियों को दूर किया जाएगा।
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