'शहर' बने दिल्ली के पुराने गांवों की खस्ता हालत, अब फिर 48 विलेज की लिस्ट तैयार; सरकार के फैसले पर उठे सवाल
दिल्ली सरकार ने 48 गांवों को शहरीकृत श्रेणी में शामिल करने का फैसला लिया है। सरकार के इस फैसले से ...और पढ़ें
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दिल्ली के 48 गांवों शहरीकृत श्रेणी में शामिल, जागरण।
HighLights
दिल्ली के 48 गांव शहरीकृत श्रेणी में शामिल होंगे।
सड़क, सीवर, पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं मिलेंगी।
विधायक-पार्षद निधि से विकास कार्य संभव होंगे।
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने राजधानी के 48 गांवों को शहरीकृत श्रेणी में शामिल करने का निर्णय लिया है। इससे इन गांवों में सड़क, सीवर, जल निकासी, पेयजल और स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी सुविधाओं के विकास का रास्ता खुलने की उम्मीद है।
साथ ही, जमीन के बेहतर नियोजन और बढ़ती आबादी के अनुसार नागरिक सुविधाओं का विस्तार करने में भी मदद मिल सकती है।
शहरीकृत गांवों के हाल पर उठ रहे सवाल
शहरीकृत श्रेणी में आने से नियमानुसार पात्र विकास कार्यों के लिए विधायक और निगम पार्षद निधि का उपयोग करने का अवसर भी मिलेगा। हालांकि, पहले शहरीकृत किए गए गांवों में बुनियादी सुविधाओं की बदहाली को देखते हुए इस फैसले के वास्तविक लाभ पर सवाल भी उठ रहे हैं।
विधायक और पार्षद निधि से भी होंगे विकास कार्य
शहरीकृत श्रेणी में शामिल होने के बाद गांवों में विकास कार्यों के लिए जनप्रतिनिधियों की निधि का उपयोग भी अहम हो सकता है। नियमानुसार पात्र कार्यों के लिए विधायक और निगम पार्षद निधि के साथ सांसद निधि से भी विकास कार्य कराए जा सकेंगे।
इससे गलियों और सड़कों की मरम्मत, जल निकासी, प्रकाश व्यवस्था और दूसरी स्थानीय जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसके लिए संबंधित नियमों और स्वीकृति की प्रक्रिया का पालन करना होगा।
विकास कार्य में आएगी तेजी
ग्रामीण विकास बोर्ड के अध्यक्ष और विधायक राजकुमार चौहान ने कहा कि 48 गांवों के शहरीकृत श्रेणी में शामिल होने से विकास कार्यों में तेजी आएगी।
ग्रामीण विकास बोर्ड शहरीकृत और गैर-शहरीकृत, दोनों तरह के गांवों में विकास कार्य करा रहा है और इसके लिए धनराशि भी उपलब्ध कराता है। अब गांवों में जनप्रतिनिधियों को मिलने वाली विकास निधि का भी उपयोग हो सकेगा। इससे स्थानीय जरूरतों के अनुसार काम कराने में मदद मिलेगी।
पहले जैसे हालात रहे तो शहरीकरण का क्या लाभ?
वहीं दूसरी ओर, पहले शहरीकृत किए गए गांवों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को लेकर चिंता जताई जा रही है। बाहरी दिल्ली के औचंदी, निजामपुर, टटेसर और कंझावला क्षेत्र के कई गांवों में सड़क, सफाई, जल निकासी और यातायात की समस्याएं बनी हुई हैं।
ऐसे में नए गांवों को शहरीकृत श्रेणी में शामिल करने के फैसले से लोगों को कितना लाभ मिलेगा, यह इसके क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।
औचंदी गांव निवासी और भारतीय किसान कामगार अधिकार मोर्चा के अध्यक्ष सतेंद्र लोहचब ने कहा कि पहले शहरीकृत किए गए गांवों में जमीन की कीमतें तो बढ़ी हैं, लेकिन मूलभूत सुविधाओं की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है, यह स्थिति अब बदलनी चाहिए।
