अब AI संभालेगा दिल्ली का ट्रैफिक, जाम में नहीं फंसेंगे दिल्लीवाले; 24 महीने में लागू होगा नया सिस्टम
दिल्ली में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के सहारे ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारा जाएगा, जिसके लिए केंद्र सरकार ने इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) को मंजूरी दे दी है।

दिल्ली का ट्रैफिक अब एआई चलाएगा। फोटो: जागरण
HighLights
AI आधारित ट्रैफिक सिग्नल जाम कम करने में मदद करेंगे
आपातकालीन वाहनों के लिए ग्रीन कॉरिडोर की सुविधा मिलेगी
वाहन चालकों को रियल-टाइम ट्रैफिक जानकारी उपलब्ध होगी
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली में जाम से निपटने के लिए अब ट्रैफिक व्यवस्था को AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सहारे चलाने की तैयारी है।
केंद्र सरकार ने दिल्ली पुलिस के इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) को मंजूरी दे दी है। सीधे शब्दों में समझें तो अभी कई जगह ट्रैफिक सिग्नल तय समय या मैनुअल तरीके से चलते हैं।
ITMS में सड़क पर उस समय कितना ट्रैफिक है, कहां जाम है, कहां दुर्घटना हुई है और किस रास्ते पर वाहनों की गति कम है-इन जानकारियों के आधार पर ट्रैफिक को मैनेज करने की कोशिश होगी।
इस परियोजना पर 1,789.52 करोड़ रुपये खर्च होंगे और दिल्ली में चिह्नित किए गए 42 ट्रैफिक कॉरिडोर को तीन चरणों में इसके दायरे में लाया जाएगा।
आखिर ITMS क्यों लागू किया जा रहा?
दिल्ली में बड़ी संख्या में वाहन हैं और जाम शहर की प्रमुख समस्याओं में है। नई व्यवस्था का मकसद मौजूदा सड़कों का ही बेहतर इस्तेमाल करके ट्रैफिक को अधिक व्यवस्थित करना है।
परियोजना के तहत सड़क नेटवर्क को रियल-टाइम ट्रैफिक डेटा, एआई आधारित ट्रैफिक सिग्नल, ऑटोमेटेड एनफोर्समेंट और इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम से जोड़ा जाएगा।
यानी ट्रैफिक पुलिस को अलग-अलग जगहों की स्थिति का डेटा एक साथ मिल सकेगा और उसके आधार पर तुरंत फैसला लेने की क्षमता बढ़ेगी।
सिग्नल अब ट्रैफिक देखकर बदलेंगे
मान लीजिए किसी चौराहे पर एक तरफ वाहनों की लंबी कतार है और दूसरी तरफ सड़क लगभग खाली है। नई व्यवस्था में ट्रैफिक की स्थिति के अनुसार सिग्नल का समय बदला जा सकेगा। अगर कही अधिक जाम है तो उसे प्राथमिकता दी जाएगी।
एक ही कॉरिडोर पर लगातार आने वाले सिग्नलों के बीच भी बेहतर तालमेल बनाया जाएगा। इससे वाहन चालकों को हर थोड़ी दूरी पर अनावश्यक रूप से रुकना कम पड़ सकता है।
ट्रैफिक मैनेजमेंट में क्या करेगा AI?
AI ट्रैफिक को पढ़ेगा
सिस्टम रियल टाइम ट्रैफिक डेटा का विश्लेषण करेगा। यानी किस सड़क पर ट्रैफिक ज्यादा है, कहां वाहन धीमे चल रहे हैं और कहां जाम या दुर्घटना हुई है, इन स्थितियों को सिस्टम पहचानने में मदद करेगा।
AI के आधार पर सिग्नल बदलेंगे
AI आधारित एडैप्टिव ट्रैफिक सिग्नल ट्रैफिक की मौजूदा स्थिति के हिसाब से सिग्नल टाइमिंग बदलने में मदद करेंगे। यानी हर सिग्नल सिर्फ पहले से तय समय के हिसाब से नहीं चलेगा।
उदाहरण के लिए अगर एक दिशा में अचानक वाहनों की संख्या बढ़ गई, तो सिस्टम उस दिशा को ज्यादा ग्रीन टाइम देने का फैसला कर सकता है।
AI ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों को पकड़ेगा
कैमरों और AI आधारित एनालिटिक्स से इन चीजों की पहचान की जा सकेगी:
- लाल बत्ती या स्टॉप लाइन पार करना
- ओवरस्पीडिंग
- गलत दिशा में वाहन चलाना
- बिना हेलमेट या सीट बेल्ट
- अवैध पार्किंग
- ड्राइविंग के दौरान मोबाइल इस्तेमाल
AI वाहनों की पहचान में मदद करेगा
सिस्टम चोरी या हॉटलिस्टेड वाहनों, बार-बार नियम तोड़ने वाले वाहनों और हिट एंड रन से जुड़े वाहनों की पहचान में भी मदद कर सकेगा।
एंबुलेंस के लिए बना सकेंगे ग्रीन कॉरिडोर
ITMS का एक महत्वपूर्ण हिस्सा आपातकालीन वाहनों को प्राथमिकता देना होगा। एंबुलेंस और अन्य जरूरी वाहनों के लिए जरूरत के अनुसार ग्रीन कॉरिडोर बनाया जा सकेगा।
इसका मतलब है कि किसी आपात स्थिति में संबंधित रास्ते के ट्रैफिक सिग्नलों को इस तरह नियंत्रित किया जा सकेगा कि वाहन को आगे बढ़ने में कम बाधा आए।
जाम लगा तो पुलिस को तुरंत पता चलेगा
अभी जाम, दुर्घटना या किसी सड़क पर अचानक ट्रैफिक धीमा होने की जानकारी मिलने के बाद पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ती है। ITMS में ऐसी घटनाओं का रियल-टाइम पता लगाने की क्षमता विकसित की जाएगी।
अगर किसी जगह अचानक जाम लगता है या दुर्घटना होती है तो ट्रैफिक पुलिस वहां डायवर्जन या अन्य परिचालन कदम उठा सकेगी।जाम वाले रास्ते पर ट्रैफिक को जल्दी डायवर्ट करने और जाम को संभालने में मदद मिलेगी।
मोबाइल से पहले पता चलेगा, आगे जाम है
नई व्यवस्था का फायदा सिर्फ ट्रैफिक पुलिस को नहीं, वाहन चालकों को भी मिलेगा। वैरिएबल मैसेज साइन (VMS) बोर्ड और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए जाम, डायवर्जन, पार्किंग की उपलब्धता और यातायात की स्थिति की जानकारी दी जाएगी।
जरूरत के अनुसार यह जानकारी नेविगेशन सेवा देने वालों के साथ भी साझा की जा सकेगी।
VMS बोर्ड क्या करेंगे?
VMS यानी Variable Message Sign ऐसे डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड होते हैं, जिन पर जरूरत के हिसाब से मैसेज बदला जा सकता है। ITMS में अगर सिस्टम को किसी सड़क पर जाम, दुर्घटना या ट्रैफिक डायवर्जन की जानकारी मिलती है, तो ऐसी जानकारी सड़क पर लगे डिजिटल बोर्डों पर दिखाई जा सकती है।
मसलन, किसी रास्ते पर आगे जाम है तो बोर्ड पर ऐसा संदेश दिख सकता है कि “आगे ट्रैफिक ज्यादा है, वैकल्पिक मार्ग अपनाएं” या “आगे दुर्घटना के कारण यातायात प्रभावित” यानी ड्राइवर को रास्ते में ही पता चल सकेगा कि आगे क्या स्थिति है और उसे किस तरह आगे बढ़ना है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म से क्या पता चलेगा?
इसके अलावा यही ट्रैफिक जानकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध कराई जा सकती है। ट्रैफिक की स्थिति, डायवर्जन और पार्किंग की उपलब्धता जैसी जानकारी लोगो से साझा की जाएगी।
इसका मतलब यह हुआ कि जानकारी सिर्फ सड़क पर लगे बोर्ड तक सीमित नहीं रहेगी। इसे डिजिटल माध्यम से भी लोगों तक पहुंचाया जा सकेगा और नेविगेशन सर्विस देने वालों के साथ भी साझा किया जा सकता है। सफर शुरू करने से पहले या रास्ते में यह पता चल सकेगा कि आगे कहां पर जाम या डायवर्जन है।
नियम तोड़े तो कैमरे पकड़ेंगे
ITMS में ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन की तकनीक आधारित निगरानी भी मजबूत होगी। इसमें रेड लाइट और स्टाप लाइन तोड़ने, ओवरस्पीडिंग, गलत दिशा में वाहन चलाने, बिना हेलमेट या सीट बेल्ट के वाहन चलाने, अवैध पार्किंग और वाहन चलाते समय मोबाइल फोन इस्तेमाल करने जैसे मामलों का स्वचालित पता लगाने की क्षमता विकसित की जाएगी।
AI आधारित एनालिटिक्स से चोरी और हाट-लिस्टेड वाहनों, बार-बार नियम तोड़ने वालों और हिट एंड रन से जुड़ी गाड़ियों की पहचान में भी मदद मिलेगी।
कितनी बड़ी होगी यह व्यवस्था?
परियोजना में 1,092 अनुकूली ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम और 1,029 प्रवर्तन लोकेशन शामिल होंगी। दिल्ली के 42 ट्रैफिक कॉरिडोर को तीन चरणों में कवर किया जाएगा।
पूरी परियोजना को लागू करने में 24 महीने लगेंगे। इसके बाद पांच साल तक इसके संचालन और रखरखाव की व्यवस्था रहेगी।
एक नजर में पूरी योजना
| क्या | व्यवस्था |
|---|---|
| कुल लागत | 1,789.52 करोड़ रुपये |
| ट्रैफिक कॉरिडोर | 42 |
| चरण | 3 |
| लागू होने की अवधि | 24 महीने |
| अनुकूली ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम | 1,092 |
| प्रवर्तन लोकेशन | 1,029 |
| संचालन व रखरखाव | 5 साल |
तीन समितियां करेंगी निगरानी
परियोजना की निगरानी केंद्रीय गृह सचिव और दिल्ली पुलिस आयुक्त के नेतृत्व में गठित तीन समितियां करेंगी। इसे एक साथ पूरी तरह लागू करने के बजाय तीन चरणों में प्रदर्शन के आधार पर आगे बढ़ाया जाएगा।
हर चरण की टेस्टिंग, कमीशनिंग और प्रदर्शन का मूल्यांकन होगा। इसके बाद ही अगले चरण को मंजूरी मिलेगी। साथ ही सुरक्षित डेटा सेंटर और किसी आपदा की स्थिति में डेटा बहाल करने की व्यवस्था भी की जाएगी।
आसान भाषा में समझें तो क्या बदलेगा?
अभी: सिग्नल का समय कई जगह तय या मैनुअल व्यवस्था पर निर्भर है।
बाद में: सड़क पर मौजूद ट्रैफिक के हिसाब से सिग्नल का समय बदला जा सकेगा।
अभी: जाम या दुर्घटना के बाद पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ती है।
बाद में: सिस्टम रियल-टाइम स्थिति का पता लगाने में मदद करेगा और पुलिस जल्दी डायवर्जन कर सकेगी।
अभी: वाहन चालक को आगे के ट्रैफिक की जानकारी सीमित रूप से मिलती है।
बाद में: VMS और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जाम, डायवर्जन और पार्किंग की जानकारी मिल सकेगी।
अभी: ट्रैफिक नियमों की निगरानी में पुलिस की भूमिका अहम है।
बाद में: कैमरा और AI आधारित सिस्टम कई तरह के उल्लंघनों का स्वचालित पता लगाने में मदद करेगा।
यानी ITMS का मूल विचार यह है कि दिल्ली का ट्रैफिक सिर्फ सड़क पर खड़े पुलिसकर्मियों और तय समय वाले सिग्नलों से नहीं, बल्कि सड़क से लगातार मिल रहे डेटा के आधार पर मैनेज किया जाए।
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