दिल्ली में बारिश थमते ही बढ़ा प्रदूषण, 92 दिनों में सिर्फ एक दिन मिली 'स्वच्छ हवा'; 48 घंटे में 38% बढ़ा पॉल्यूशन
मानसून की भारी वर्षा के बावजूद, जून से अगस्त तक दिल्ली में केवल एक दिन वायु गुणवत्ता 'अच्छी' रही। सेंटर ...और पढ़ें

दिल्ली में बारिश थमते ही बढ़ा प्रदूषण।
HighLights
मानसून में दिल्ली की हवा 92 में से एक दिन 'अच्छी' रही।
वर्षा रुकने के 48 घंटे बाद पीएम 2.5 में 37.9% वृद्धि।
सीएसई ने प्रदूषण के मूल स्रोतों पर नियंत्रण की वकालत की।
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। मानसून की 576.9 मिमी वर्षा भी दिल्ली की हवा को पूरी तरह साफ नहीं कर सकी। सेंटर फार साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) के नए आकलन के मुताबिक जून से अगस्त तक 92 दिनों में दिल्ली में सिर्फ एक दिन वायु गुणवत्ता ‘अच्छी’ रही। वर्षा थमने के 24 घंटे बाद पीएम 2.5 का स्तर 10.7 प्रतिशत और 48 घंटे बाद 37.9 प्रतिशत बढ़ गया।
सीएसई के अनुसार, नौ जुलाई को 67.75 मिमी वर्षा के बीच ही इस मानसून का एकमात्र ‘अच्छी’ हवा वाला दिन दर्ज हुआ। आठ अगस्त को मानसून की सबसे अधिक 101.05 मिमी वर्षा हुई, लेकिन इसके बावजूद वायु गुणवत्ता केवल ‘संतोषजनक’ रही। मानसून में औसत पीएम 2.5 स्तर 40.2 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा, जो गर्मियों के 60.2 माइक्रोग्राम से 33.2 प्रतिशत कम था।
प्रदूषण में आई कमी ज्यादा देर कायम नहीं रही
हालांकि वर्षा के दौरान प्रदूषण में आई कमी ज्यादा देर कायम नहीं रही। छह अलग-अलग वर्षा की घटनाओं के विश्लेषण में वर्षा से पूर्व पीएम 2.5 का औसत स्तर 40.6 माइक्रोग्राम था, जो वर्षा के दौरान घटकर 32.7 माइक्रोग्राम रह गया। लेकिन 24 घंटे बाद यह 36.2 और 48 घंटे बाद 45.1 माइक्रोग्राम पर पहुंच गया। यानी वर्षा के दो दिन बाद स्तर वर्षा के दौरान के मुकाबले 37.9 प्रतिशत अधिक हो गया और वर्षा से पहले के स्तर से भी 11.1 प्रतिशत ऊपर पहुंच गया।
मानसून के 53 दिन यानी 57.6 प्रतिशत दिन ‘मध्यम’ वायु गुणवत्ता श्रेणी में रहे। 35 दिन ‘संतोषजनक’, तीन दिन ‘खराब’ और केवल एक दिन ‘अच्छी’ श्रेणी में रहा। सीएसई के मुताबिक, वर्षा से कण प्रदूषक तो धुल जाते हैं, लेकिन गैसीय प्रदूषक बने रहते हैं। मानसून के 20 दिनों में जमीन के करीब बनने वाली ओजोन प्रमुख प्रदूषक रही। नाइट्रोजन डाइआक्साइड और कार्बन मोनोआक्साइड की मौजूदगी भी महत्वपूर्ण रही।
समन्वित तरीके से उत्सर्जन कम करना होगा
सीएसई की कार्यकारी निदेशक (शोध एवं वकालत) अनुमिता रायचौधरी ने कहा कि वर्षा अस्थायी राहत देती है, लेकिन प्रदूषण के मूल स्रोतों को खत्म नहीं करती। उन्होंने कहा कि सर्दियों में अस्थायी उपायों पर निर्भर रहने के बजाय पूरे एनसीआर में सालभर और सभी क्षेत्रों में समन्वित तरीके से उत्सर्जन कम करना होगा। सीएसई ने परिवहन में बिजली आधारित व्यवस्था, स्वच्छ औद्योगिक ईंधन, खुले में कचरा जलाने पर रोक, निर्माण कचरे के पुनर्चक्रण, निर्बाध बिजली आपूर्ति और पूरे एनसीआर के लिए एकीकृत ‘एयरशेड’ व्यवस्था लागू करने पर भी जोर दिया है।
मानसून में दिल्ली के पीएम 2.5 पर असर (माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर में)
-वर्षा से पहले - 40.6
-वर्षा के दौरान - 32.7
-24 घंटे बाद - 36.2
-48 घंटे बाद - 45.1
-वर्षा के दौरान कमी - 19.5 प्रतिशत
-24 घंटे बाद वृद्धि - 10.7 प्रतिशत
-48 घंटे बाद वृद्धि - 37.9 प्रतिशत
