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दिल्ली की सड़कों को सेफ बनाने तैयारी, 420 KM सड़कों का होगा सुरक्षा ऑडिट; 3.50 करोड़ का टेंडर जारी

Published: Thu, 29 Oct 2026 08:51 PM (IST)

दिल्ली पीडब्ल्यूडी ने सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने और यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए पहल की है। विभाग दिल्ली की ...और पढ़ें

दिल्ली को ट्रैफिक जाम से राहत दिलाने की तैयारी। फोटो: आर्काइव

दिल्ली को ट्रैफिक जाम से राहत दिलाने की तैयारी। फोटो: आर्काइव

राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। दिल्ली में सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने और यातायात व्यवस्था को सुरक्षित बनाने के लिए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने पहल की है। विभाग अपनी दिल्ली भर की सड़कों का सुरक्षा ऑडिट कराएगा।

पहले चरण में दक्षिण क्षेत्र में यातायात अनुकरण मॉडल तैयार करने और सड़क सुरक्षा ऑडिट कराने के लिए सलाहकार एजेंसी नियुक्त की जाएगी। इसके लिए 3.50 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया गया है।

परियोजना के तहत यातायात की स्थिति का अध्ययन कर दुर्घटनाओं की आशंका वाले स्थानों की पहचान और सुधार के उपाय सुझाए जाएंगे। कार्य पूरा करने के लिए 731 दिन निर्धारित किए गए हैं।

सितंबर में बनी थी योजना, अब टेंडर जारी

दिल्ली सरकार ने दक्षिणी दिल्ली की सड़कों पर यातायात जाम और दुर्घटनाओं को कम करने के लिए सितंबर 2026 में यातायात अध्ययन और सड़क सुरक्षा ऑडिट कराने की योजना सामने रखी थी। इसके तहत करीब 420 किलोमीटर लंबी सड़कें और 270 सड़क मार्ग अध्ययन के दायरे में रखे गए हैं।

क्यों जरूरी है यातायात मॉडल और सुरक्षा ऑडिट

दक्षिणी दिल्ली में वाहनों की बढ़ती संख्या, यातायात का दबाव और प्रमुख मार्गों पर लगने वाला जाम सड़क सुरक्षा के लिए चुनौती हैं। ऐसे में केवल दुर्घटना के बाद सुधार करने के बजाय पहले ही खतरनाक स्थानों की पहचान करना जरूरी है।

यातायात मॉडल से यह समझने में मदद मिलेगी कि अलग-अलग परिस्थितियों में वाहनों का दबाव किस तरह बदलता है और किन स्थानों पर जाम या दुर्घटना की आशंका अधिक है। सुरक्षा ऑडिट से सड़कों की खामियों और सुधार की जरूरत वाले हिस्सों को चिह्नित किया जा सकेगा।

कहां बनेंगी नई व्यवस्था, कहां होगा सुधार

अध्ययन में रिंग रोड, आउटर रिंग रोड, महरौली-बदरपुर रोड, लाला लाजपत राय मार्ग और श्री अरबिंदो मार्ग जैसे प्रमुख रास्तों को शामिल करने की योजना है।

अध्ययन के आधार पर यातायात प्रबंधन में बदलाव, कम लागत वाले इंजीनियरिंग उपायों और जरूरत के अनुसार फ्लाईओवर, अंडरपास या एलिवेटेड कॉरिडोर जैसे विकल्पों पर सुझाव दिए जा सकते हैं।

इससे सुधार के लिए प्राथमिकता तय करने और सरकारी धन का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी।

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