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दिल्ली प्रदर्शन के कारण हर दिन 250 करोड़ का नुकसान, व्यापारियों ने PM मोदी, CJI और राहुल गांधी को लिखा पत्र

Published: Fri, 16 Oct 2026 07:11 PM (IST)

दिल्ली के व्यापारी संगठनों ने प्रधानमंत्री मोदी, राहुल गांधी और केजरीवाल से राष्ट्रीय राजधानी में चल रहे प्रदर्शनों को रोकने ...और पढ़ें

दिल्ली में चल रहा प्रदर्शन, फोटो- चंद्र प्रकाश मिश्रा।

दिल्ली में चल रहा प्रदर्शन, फोटो- चंद्र प्रकाश मिश्रा।

HighLights

  1. दिल्ली में प्रदर्शनों पर 31 जनवरी 2027 तक रोक लगाने की मांग।

  2. कैट दिल्ली भर के व्यापारी संगठनों की जल्द बैठक कर बनाएगी रणनीति।

  3. सुप्रीम कोर्ट ने व्यापारियों की आजीविका संबंधी चिंताओं पर संज्ञान लिया।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में लगातार होने वाले राजनीतिक प्रदर्शनों, चक्का जाम और यातायात प्रतिबंधों से परेशान होकर व्यापारी संगठन भारतीय उद्योग व्यापार मंडल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, विपक्ष के नेता राहुल गांधी और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है।

संगठन ने पत्र भेजकर आगामी त्योहारी और विवाह सीजन के मद्देनजर दिल्ली में सभी राजनीतिक प्रदर्शनों को 31 जनवरी 2027 तक स्थगित करने की मांग की है।

व्यापार और आम जनजीवन पर भारी असर

व्यापारी मंडल के प्रतिनिधियों ने कहा कि आगामी नवरात्र, दीपावली, गुरुपर्व, क्रिसमस तथा विवाह समारोहों का मौसम व्यापार की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। बार-बार होने वाले राजनीतिक प्रदर्शनों, मेट्रो स्टेशनों के बंद होने, सड़कों पर जाम और रूट डायवर्जन के कारण बाजारों तक ग्राहकों और माल की आवाजाही पूरी तरह प्रभावित होती है।

सोनीपत, पानीपत, गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा और गाजियाबाद जैसे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के आसपास के शहरों से प्रतिदिन खरीदारी के लिए दिल्ली आने वाले ग्राहकों का आवागमन बाधित होता है।

इससे न केवल व्यापारियों को प्रतिदिन करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है, बल्कि आम जनता का कीमती समय भी नष्ट होता है।

दिहाड़ी मजदूरों की आजीविका पर संकट

पत्र में स्पष्ट किया गया है कि बाजारों में बिक्री घटने का सीधा असर वहां काम करने वाले लाखों श्रमिकों, दिहाड़ी मजदूरों और ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़े लोगों पर पड़ता है।

बिक्री में गिरावट के कारण व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए कर्मचारियों का वेतन, दुकानों का किराया और अन्य वित्तीय दायित्वों को समय पर पूरा करना बेहद कठिन हो जाता है।

अधिकारों और जनहित के बीच संतुलन जरूरी

व्यापारी नेताओं ने स्पष्ट किया कि उनकी यह अपील किसी के लोकतांत्रिक अधिकारों के विरोध में नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य व्यापार, रोजगार, जनसुविधा और व्यापक जनहित की रक्षा करना है।

संगठन ने मांग की है कि लोकतांत्रिक अधिकारों और आम नागरिकों की सुविधाओं के बीच संतुलन बनाते हुए ऐसे व्यावहारिक उपाय किए जाएं, जिससे विरोध-प्रदर्शनों के कारण होने वाली परेशानियों को कम किया जा सके।

व्यापारियों ने उम्मीद जताई है कि सरकार और संबंधित प्राधिकारी इस संवेदनशील मुद्दे की गंभीरता को समझते हुए जनहित में आवश्यक कदम उठाएंगे। इस अपील पर भारतीय उद्योग व्यापार मंडल, दिल्ली के महामंत्री हेमन्त गुप्ता, राकेश यादव और प्रदीप गुप्ता के हस्ताक्षर शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने रिट याचिका पर की सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट पहुंचे दिल्ली के व्यापारी, सुप्रीम कोर्ट ने व्यापारियों की आजीविका से जुड़ी चिंताओं पर लिया संज्ञान, कहा– हम कार्रवाई करेंगे

इस बीच, सर्वोच्च न्यायालय ने आज दिल्ली किराना कमेटी तथा दिल्ली आयरन एंड हार्डवेयर मर्चेंट्स एसोसिएशन द्वारा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 32 के अंतर्गत दायर रिट याचिका पर सुनवाई की।

क्या है व्यापारियों की अपील

याचिका में व्यापारियों की आजीविका की रक्षा करने तथा वर्तमान त्योहारी एवं विवाह सीजन के दौरान दिल्ली के प्रमुख व्यावसायिक बाजारों तक निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करने की मांग की गई है।

सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने छोटे दुकानदारों, फेरीवालों और स्टाल संचालकों को हो रही कठिनाइयों को स्वीकार करते हुए कहा कि इन महत्वपूर्ण दिनों में ही वे अपनी आजीविका कमाते हैं और इस दौरान उनके परिवारों को कठिनाइयों, परेशानियों तथा संकट का सामना करना पड़ता है।

प्रदर्शनों के कारण 250 करोड़ रुपये का नुकसान

याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने मामले की गंभीरता और तात्कालिकता को रेखांकित करते हुए न्यायालय को बताया कि प्रदर्शनों के कारण दिल्ली में प्रतिदिन 250 करोड़ रुपये से अधिक के व्यापारिक नुकसान का अनुमान है।

कनफेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय संयुक्त महासचिव सुमित अग्रवाल ने कहा कि याचिका का उद्देश्य शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लोकतांत्रिक अधिकार को सीमित करना नहीं है। इसका उद्देश्य प्रदर्शन के अधिकार तथा व्यापारियों, श्रमिकों और आम जनता के आजीविका, व्यापार एवं आवागमन से जुड़े मौलिक अधिकारों के बीच एक उचित संतुलन स्थापित करना है।

याचिका में क्या की गई मांग?

याचिका में अक्टूबर 2026 से जनवरी 2027 तक की अवधि के दौरान यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देश देने की मांग की गई है कि प्रदर्शन, जुलूस, धरने, बैठकों और सड़क अवरोधों के कारण चांदनी चौक, सदर बाजार, कनॉट प्लेस और खान मार्केट सहित प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों में आने-जाने का मार्ग बाधित न हो।

इसके अतिरिक्त, व्यावसायिक क्षेत्रों से दूर उपयुक्त प्रदर्शन स्थलों की पहचान कर उन्हें अधिसूचित करने, प्रदर्शनों के समय और तरीके का उचित नियमन करने तथा बाजारों तक निर्बाध पहुंच और सार्वजनिक परिवहन सुनिश्चित करते हुए प्रदर्शन के अधिकार के साथ संतुलन स्थापित करने के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने की मांग भी की गई है।

दूसरे राज्यों से आते हैं लाखों व्यापारी

अग्रवाल ने आगे कहा कि दिल्ली में 10 लाख से अधिक व्यावसायिक प्रतिष्ठान हैं, जिनसे एक करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है। इसके अतिरिक्त, प्रतिदिन लगभग पांच लाख व्यापारी दूसरे राज्यों से कारोबार के सिलसिले में दिल्ली आते हैं। दिल्ली में प्रतिदिन 500–600 करोड़ रुपये के व्यापारिक कारोबार का अनुमान है।

व्यापारिक संगठनों की होगी बैठक

व्यापारिक संगठनों का आकलन है कि पुराने और नई दिल्ली के प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों में आवागमन एवं व्यापारिक गतिविधियों में व्यवधान के कारण प्रतिदिन लगभग 250 करोड़ रुपये का कारोबार प्रतिकूल रूप से प्रभावित हो सकता है।उन्होंने बताया कि कैट शीघ्र ही दिल्ली के विभिन्न व्यापारिक संगठनों की बैठक बुलाएगा।

जिसमें व्यापारियों के हितों की रक्षा करने, व्यावसायिक बाजारों तक निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करने तथा त्योहारी एवं विवाह सीजन के दौरान व्यापारिक गतिविधियों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित होने से बचाने के लिए एक समन्वित रणनीति तैयार की जाएगी।

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