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दिल्ली की हवा पर टोल का संकट! 9 नाकों पर MLFF की मंजूरी अटकी, सर्दी से पहले काम पूरा होना मुश्किल

Published: Tue, 15 Sep 2026 06:55 AM (IST)

राजधानी दिल्ली की सीमाओं पर टोल नाकों पर मल्टी लेन फ्री फ्लो (एमएलएफएफ) व्यवस्था लागू होने में देरी से इस ...और पढ़ें

एआई जेनेरेटेड इमेज।

एआई जेनेरेटेड इमेज।

HighLights

  1. एमएलएफएफ व्यवस्था लागू होने में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से मंजूरी लंबित।

  2. सर्दी से पहले व्यवस्था लागू न होने पर जाम-प्रदूषण का खतरा।

  3. नौ टोल नाकों पर एमएलएफएफ तकनीक स्थापित करना चुनौतीपूर्ण।

निहाल सिंह, नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली की सीमाओं पर टोल नाकों पर वाहनों के जाम से होने वाला प्रदूषण इस सर्दी में भी परेशानी का कारण बन सकता है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के तहत जिन नौ टोल नाकों पर मल्टी लेन फ्री फ्लो (एमएलएफएफ) व्यवस्था लागू होनी है, उसके लिए अभी राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) से मंजूरी नहीं मिली है।

ऐसे में सर्दी शुरू होने से पहले यह व्यवस्था लागू हो पाएगी या नहीं, इस पर सवाल उठ रहे हैं। वहीं, संबंधित एजेंसियों की धीमी कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है।

पिछले हफ्ते किया था सर्वे

जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने एनएचएआइ के राजमार्गों पर स्थित टोल नाकों पर मल्टी लेन फ्री फ्लो (एमएलएफएफ) व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए थे। प्राप्त जानकारी के अनुसार, एनएचएआइ ने पिछले सप्ताह ही इन स्थानों का सर्वे किया है।

अब मंजूरी देने की प्रक्रिया एनएचएआइ के स्तर पर है। ऐसे में यदि इसी सप्ताह मंजूरी मिल भी जाती है तो व्यवस्था स्थापित करने में कम से कम तीन माह का समय लग सकता है।

हालांकि, एमसीडी अधिकारियों का कहना है कि मंजूरी मिलने के बाद एनएचएआइ से जुड़े नौ टोल नाकों को एक से डेढ़ माह में एमएलएफएफ तकनीक से लैस करने का प्रयास किया जाएगा।

एमसीडी ने सीएक्यूएम को भी अपना प्लान इस संबंध में जमा किया था जिसमें नौ टोल नाकों पर 31 अक्टूबर तक काम पूरा किया जाना है जबकि शेष पर 31 दिसंबर तक पूरा होना है।

ऐसे में अक्टूबर से दिल्ली की वायु गुणवत्ता खराब होना शुरू हो जाती है तो टोल नाकों पर लगने वाला जाम भी प्रदूषण बढ़ाने में भूमिका निभा सकता है। पिछले पांच वर्षों के वायु गुणवत्ता के आंकड़े बताते हैं कि अक्टूबर में ही दिल्ली की हवा खराब श्रेणी में पहुंचना शुरू हो जाती है।

वर्ष 2025 में 14 अक्टूबर को दिल्ली की हवा पहली बार खराब श्रेणी में पहुंची थी। इसके बाद एक नवंबर को पहली बार बहुत खराब और 11 नवंबर को गंभीर श्रेणी में पहुंची थी।

एनएचएआइ से इस संबंध में जवाब मांगा गया, लेकिन खबर लिखे जाने तक जवाब नहीं मिला था। एमसीडी अधिकारियों का कहना है कि सर्वे हो चुका है और अब मंजूरी देने की प्रक्रिया एनएचएआइ के स्तर पर है। मंजूरी मिलने के बाद काम शुरू किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि एमसीडी ने हाल में टोल वसूली का काम सहकार ग्लोबल नाम की कंपनी को दिया है। कंपनी एमसीडी के 154 टोल नाकों पर टोल वसूली के साथ एमएलएफएफ तकनीक भी स्थापित करेगी।

अधिकारियों के अनुसार, कंपनी को इस व्यवस्था पर करीब 200 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे। यह राशि टेंडर की शर्तों में शामिल है। नए टेंडर से एमसीडी को टोल वसूली के रूप में सालाना करीब 964 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने का अनुमान है।

चलते यातायात के बीच तकनीक लगाना चुनौती

दिल्ली में एनएचएआइ के राजमार्गों पर एमसीडी के नौ टोल नाके हैं। इन सभी स्थानों पर वाहनों का भारी दबाव रहता है। ऐसे में एक से डेढ़ माह में एमएलएफएफ व्यवस्था स्थापित करना चुनौतीपूर्ण होगा।

टोल नाकों पर यातायात को रोकना भी आसान नहीं होगा। खासकर गाजीपुर टोल नाके पर दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के जरिये उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से बड़ी संख्या में वाहन दिल्ली आते हैं। एमसीडी टोल के कारण यहां पहले से ही जाम की स्थिति रहती है।

ऐसे में चलते यातायात के बीच एमएलएफएफ तकनीक स्थापित करना बड़ी चुनौती होगी। इसी तरह देहरादून एक्सप्रेसवे से आने वाले वाहनों के कारण संबंधित टोल नाके पर भी काम के दौरान यातायात प्रबंधन चुनौतीपूर्ण रहेगा।

वे नौ टोल नाके जहां एनएचएआइ के राजमार्ग पर हैं-

  • टिकरी बार्डर
  • केजीटी-सिंघु बार्डर
  • कापसहेड़ा बार्डर
  • आया नगर बार्डर
  • बदरपुर बार्डर
  • अप्सरा-शाहदरा बार्डर
  • न्यू मंडौली बार्डर
  • गाजीपुर बार्डर
  • रजोकरी बार्डर

क्या है एमएलएफएफ तकनीक

मल्टी लेन फ्री फ्लो (एमएलएफएफ) एक इलेक्ट्रानिक टोल प्रणाली है, जिसमें वाहनों को टोल बूथ पर रुकने या कतार में लगने की जरूरत नहीं होती। सड़क पर लगे एएनपीआर कैमरे और सेंसर वाहन की नंबर प्लेट की पहचान करते हैं और आरएफआइडी टैग के माध्यम से टोल शुल्क स्वत: वसूला जाता है।

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इससे टोल नाकों पर जाम कम होता है, वाहनों की आवाजाही तेज होती है और ईंधन की बचत के साथ प्रदूषण भी कम होता है। इसमें मानवीय हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं होती।

पिछले पांच वर्षों में अक्टूबर में वायु गुणवत्ता स्तर की स्थिति

नोट: सीपीसीबी के अनुसार – खराब = 201–300, बहुत खराब = 301–400 और गंभीर = 401–500।

वर्ष पहली ‘खराब’ पहली ‘बहुत खराब’ पहली ‘गंभीर’
2021 16 अक्टूबर 2 नवंबर 5 नवंबर
2022 5 अक्टूबर 24 अक्टूबर 3 नवंबर
2023 6 अक्टूबर 22 अक्टूबर 3 नवंबर
2024 13 अक्टूबर 30 अक्टूबर 13 नवंबर
2025 14 अक्टूबर 19 अक्टूबर 11 नवंबर