दिल्ली के 3,575 बस शेल्टर बनेंगे वर्ल्ड क्लास, दिल्ली सरकार ने बनाया 650 करोड़ का मेगा प्लान
दिल्ली में 3,575 बस क्यू शेल्टरों का 650 करोड़ रुपये की लागत से पुनर्विकास किया जाएगा, जिसमें डिजिटल स्क्रीन, पैनिक अलार्म और सोलर पैनल जैसी आधुनिक सुविधाएं होंगी।

दिल्ली के बस शेल्टर बनेंगे आधुनिक। फोटो: एआई जनरेटेड
HighLights
3,575 बस शेल्टरों का 650 करोड़ रुपये में पुनर्विकास
डिजिटल स्क्रीन, पैनिक अलार्म, सोलर पैनल जैसी आधुनिक सुविधाएं
यात्रियों को वास्तविक समय की जानकारी और बेहतर सुरक्षा मिलेगी
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। दिल्ली में बस का इंतजार करने वाले यात्रियों के लिए बस स्टॉप की तस्वीर बदलने की तैयारी है। राजधानी में करीब 3,575 बस क्यू शेल्टर का पुनर्विकास कर उन्हें आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा।
डिजिटल स्क्रीन पर बस का रूट, नंबर और उसके पहुंचने की जानकारी मिलेगी, जबकि पैनिक अलार्म, एलईडी लाइट और सोलर पैनल जैसी सुविधाएं भी जोड़ी जाएंगी।
करीब 650 करोड़ रुपये की इस परियोजना को दिल्ली ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कारपोरेशन (डीटीआईडीसी) के तहत पीपीपी मॉडल पर आगे बढ़ाया जाएगा। परियोजना की लागत में 20 साल का रखरखाव भी शामिल है।
बस का इंतजार, अब नहीं रहेगा अंदाजा
नई व्यवस्था में बस स्टॉप पर डिजिटल पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम लगाया जाएगा। स्क्रीन पर बसों के रूट और नंबर के साथ उनके आगमन से जुड़ी रियल टाइम जानकारी दिखाई जाएगी। इससे यात्रियों को यह पता चल सकेगा कि उनकी बस कब पहुंचने वाली है।
बस शेल्टर में मौसम की जानकारी दिखाने वाली स्क्रीन, डिजिटल विज्ञापन प्रणाली, सोलर पैनल और एलईडी लाइटें भी प्रस्तावित हैं। पैनिक अलार्म सिस्टम से सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत करने की योजना है।
छत नहीं, अब शेल्टर की जरूरत
राजधानी के कई इलाकों में यात्रियों को बिना छत वाले बस स्टॉप पर धूप और बारिश के बीच बस का इंतजार करना पड़ता है। बसों की कमी के कारण कई बार इंतजार का समय और बढ़ जाता है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दिल्ली में प्रमुख बस स्टॉप की संख्या 60,000 से अधिक है और इनमें आधे से ज्यादा की हालत खराब बताई गई है।
नई योजना में उन स्थानों को भी शामिल किया जाना है जहां बस शेल्टर की छत टूट चुकी है या यात्रियों के बैठने और धूप-वर्षा से बचने के लिए पहले से कोई शेल्टर नहीं है।
20 साल तक रखरखाव की जिम्मेदारी
लगभग 3,575 बस क्यू शेल्टरों के सर्वे, डिजाइन और पुनर्विकास के लिए प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंसी फर्म नियुक्त करने की तैयारी है। इसके लिए टेंडर जारी किया गया है। चुनी गई एजेंसी दिल्ली के अलग-अलग रूटों और बस स्टॉप की स्थिति का सर्वे करेगी।
पीपीपी मॉडल के तहत चयनित कंपनी को बस शेल्टरों के रखरखाव की जिम्मेदारी 20 वर्षों तक दी जाएगी। कंपनी को शेल्टरों पर विज्ञापन लगाने के अधिकार भी दिए जाएंगे, ताकि संचालन और रखरखाव के लिए राजस्व जुटाया जा सके।
छह महीने में पूरा करना होगा काम
टेंडर की शर्तों के मुताबिक कार्यादेश जारी होने के बाद पुनर्विकास का काम छह महीने के भीतर पूरा करना होगा। फिलहाल योजना को जमीन पर उतारने के लिए शुरुआती प्रक्रिया चल रही है।
परियोजना पर अलग-अलग इनपुट में करीब 600 करोड़ और करीब 650 करोड़ रुपये का उल्लेख है। विस्तृत योजना में 650 करोड़ रुपये की लागत बताई गई है, जिसमें 20 वर्षों का रखरखाव भी शामिल है।
46 लाख यात्री रोज सफर करते हैं
दिल्ली की बस सेवा पर बड़ी संख्या में यात्री निर्भर हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक राजधानी की बसों में रोज औसतन 46 लाख से अधिक यात्री सफर करते हैं। दिल्ली में कुल बसों की संख्या करीब 6,300 बताई गई है।
ऐसे में बस स्टॉप पर इंतजार के दौरान यात्रियों को छाया, बैठने की सुविधा, रोशनी और बस की सही जानकारी उपलब्ध कराने पर योजना का फोकस है।
पांच साल से चल रही योजना
बस क्यू शेल्टरों के पुनर्विकास की योजना पिछले करीब पांच साल से अस्तित्व में बताई गई है, लेकिन यह आगे नहीं बढ़ सकी। अब परिवहन विभाग और डीटीआडीसी की ओर से इसे आगे बढ़ाने की तैयारी है।
पिछले वर्ष परिवहन मंत्री पंकज सिंह ने अधिकारियों को दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु, नवी मुंबई के साथ-साथ सिंगापुर और लंदन के आधुनिक बस शेल्टर मॉडलों का अध्ययन करने के निर्देश दिए थे। अब सितंबर से योजना के जमीन पर उतरने की उम्मीद जताई गई है।
बस स्टॉप पर क्या-क्या बदलेगा?
| सुविधा | यात्रियों को क्या मिलेगा |
|---|---|
| डिजिटल स्क्रीन | बस का रूट, नंबर और आगमन की जानकारी |
| रियल टाइम इंफॉर्मेशन सिस्टम | आने वाली बस की जानकारी |
| पैनिक अलार्म | आपात स्थिति में सुरक्षा सुविधा |
| एलईडी लाइट | बेहतर रोशनी |
| वेदर डिस्प्ले | मौसम की जानकारी |
| सोलर पैनल | सौर ऊर्जा आधारित सुविधा |
| डिजिटल विज्ञापन प्रणाली | डिजिटल विज्ञापन की व्यवस्था |
| 20 साल रखरखाव | लंबे समय तक रखरखाव की जिम्मेदारी |
यानी लक्ष्य सिर्फ नया शेल्टर बनाने का नहीं है, बल्कि बस का इंतजार करने वाले यात्री को छत, रोशनी, सुरक्षा और बस के पहुंचने की जानकारी एक ही जगह देने की व्यवस्था तैयार करना है।
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