दुकानों पर मिलने वाली मिठाइयां कितनी सुरक्षित? खाद्य सुरक्षा विभाग के छापे में खुली पोल, सच्चाई चौंकने वाली
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में खाद्य सुरक्षा विभाग के छापों में मिठाई की दुकानों में गंभीर गंदगी और असुरक्षित भंडारण का ...और पढ़ें
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खाद्य सुरक्षा विभाग की छापेमारी ( एआई जेनरेटेड इमेज )
HighLights
दिल्ली की मिठाई दुकानों में गंदगी, कीड़े-मकोड़े मिले।
खाद्य सुरक्षा विभाग के छापों में गंभीर लापरवाही उजागर।
जांच नमूनों में बड़ी संख्या में मिठाइयां फेल हुईं।
अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। त्योहार पर मिठाई खरीदने वाले लोग भरोसा करते हैं कि दुकानों पर बिकने वाली मिठाइयां सुरक्षित होंगी। लेकिन, मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी में खाद्य सुरक्षा विभाग के छापों में दुकानों की सफाई और खाद्य सामग्री के सुरक्षित भंडारण में गंभीर लापरवाही मिली है।
कहीं मिठाइयों के भंडारण में कीड़े-मकोड़ों मिले, तो कहीं भारी गंदगी के साथ खुले कूड़ेदान, गंदे उपकरण, गंदे हाथों से बनाई जा रही मिठाई और कर्मचारियों के कपड़े रखे मिले। कुछ प्रतिष्ठानों पर पानी और खाद्य उत्पादों की जांच रिपोर्ट ही उपलब्ध नहीं थी।
आखिर क्यों नहीं हो रहा सुधार?
ऐसे में प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि छापों-जांच नमूनों के बावजूद सुधार क्यों नहीं हो रहा। जवाब है, नियम तोड़ने वालों पर प्रभावी कार्रवाई का अभाव। बड़ी बात यह कि विभाग जब छापेमारी की कार्रवाई करता है, तो उसका जोर-शोर से प्रचार करता भी है। लेकिन, उन्हीं मामलों में अंतिम कार्रवाई क्या हुई? इसे वह उसी अंदाज में कभी सार्वजनिक नहीं करता, जबकि जांच के साथ मामलों के निपटारे, दोषियों पर कार्रवाई और लाइसेंस रद्द करने से जुड़े नतीजों की जानकारी प्राप्त करना जनता का अधिकार है।
छापों में खुली पोल, कई प्रतिष्ठानों से नमूने
ओखला फेज-दो स्थित एवरग्रीन स्वीट हाउस के भंडारण क्षेत्र में बहुतायत में कीड़े-मकोड़े घूमते मिले और कर्मचारी बिना दस्तानों और उचित सफाई के खाद्य सामग्री संभालते मिले। पानी व खाद्य सामाग्री की जांच रिपोर्ट भी मौके पर नहीं मिली। विभाग ने यहां से बूंदी दाना और खोया के नमूने लिए।
कालीघटा स्वीट्स, भिकाराम चंदमल, अमन मिठाईवाला, ग्रोवर स्वीट कार्नर, मेठी फूड्स और सिंगला स्वीट्स समेत कई प्रतिष्ठानों में साफ-सफाई, भंडारण और कीड़े-मकोड़ों से बचाव के इंतजामों में गंभीर कमियां मिलीं। कई स्थानों पर खाद्य सुरक्षा लाइसेंस प्रदर्शित नहीं था और पैकिंग व कर्मचारियों के प्रशिक्षण से जुड़े दस्तावेज भी अधूरे थे।
तीन साल में 9169 नमूने, 535 फेल
वर्ष 2022-23 से 2024-25 के दौरान दिल्ली में 9,169 खाद्य नमूनों की जांच हुई। इनमें 535 नमूने निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे। वर्ष 2022-23 में 3,133 नमूनों में 255, वर्ष 2023-24 में 3,412 में 150 और वर्ष 2024-25 में 2,624 में 130 नमूने गैर-अनुरूप पाए गए। लेकिन, दोषसिद्धि मात्र 38 मामलों में ही हो सकी और केवल दो लाइसेंस ही रद हुए।
4100 किलो खोया-पनीर नष्ट, घी के 19 नमूने असुरक्षित
सितंबर में 4100 किलो से अधिक नकली-मिलावटी खोया, पनीर-छेना नष्ट किया गया। मोरी गेट खोया मंडी के 30 नमूनों में 22, घी के 59 नमूनों में से 19 असुरक्षित और चार खराब मिले। इस मामले में दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री से सरकार का पक्ष जानने को फोन किया गया था, तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। उन्हें संदेश भेजा गया तो उत्तर नहीं मिला।
