'दूध लेने गया था इंजीनियर बेटा, लौटकर लाश आई…', दिल्ली दंगा पीड़ितों ने SC के फैसले पर क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट द्वारा उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज होने पर 2020 दिल्ली दंगों के पीड़ितों ने ...और पढ़ें

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। उत्तर-पूर्वी दिल्ली में 2020 में हुए दंगों की आग भले ही बुझ चुकी हो, लेकिन जिन परिवारों ने अपनों को खोया, उनके जख्म आज भी हरे हैं। ऐसे ही एक पीड़ित हैं हरि सिंह सोलंकी, जिनके 26 वर्षीय बेटे राहुल सोलंकी दंगों के दौरान मौत हो गई थी।
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज किए जाने के फैसले पर उन्होंने राहत जताई, लेकिन अन्य आरोपियों को मिली जमानत पर गहरी नाराज़गी भी जाहिर की।
हरि सिंह सोलंकी ने कहा कि मैंने अपने हाथों से अपने बेटे का शव उठाया है। उस दर्द को शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। दोषियों को ऐसी सजा मिलनी चाहिए कि कोई और पिता यह दर्द न सहे।

दूध लेने निकला था राहुल, फिर कभी नहीं लौटा
राहुल सोलंकी देहरादून की एक निजी कंपनी में जूनियर इंजीनियर था। दंगों के दौरान परिवार मुस्तफाबाद इलाके में रह रहा था। हरि सिंह बताते हैं कि राहुल सिर्फ दूध लेने घर से बाहर निकला था, लेकिन रास्ते में हिंसक भीड़ ने उसे घेर लिया। उन्होंने कहा कि मैं उसे बचाने दौड़ा, लेकिन हर तरफ हिंसा थी। जहां भी गया, खून के प्यासे लोग खड़े थे।
कुछ आरोपियों को जमानत मिलना ‘दुर्भाग्यपूर्ण’
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए हरि सिंह सोलंकी ने कहा कि उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत न मिलना सही फैसला है, लेकिन पांच अन्य आरोपियों को जमानत मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है। उनका कहना है कि इससे गवाहों पर दबाव और सबूतों से छेड़छाड़ का खतरा बढ़ सकता है। कोई भरोसा नहीं कि बाहर आकर ये लोग गवाहों को प्रभावित नहीं करेंगे।

15 साल का नितिन भी बना था हिंसा का शिकार
दिल्ली दंगों का दर्द सिर्फ एक परिवार तक सीमित नहीं है। खजूरी खास इलाके के रहने वाले राम सुगर्थ के 15 वर्षीय बेटे नितिन सुगर्थ की भी हिंसा में जान चली गई थी। नितिन दंगे शुरू होने के दो दिन बाद घर से फास्ट फूड लेने निकला था, लेकिन पुलिस और हिंसक भीड़ के बीच हुई झड़प में फंस गया।
राम सुगर्थ ने कहा कि इस दर्द का कोई मुआवजा नहीं हो सकता। बस यही चाहते हैं कि दोषियों को कड़ी सजा मिले। उनकी पत्नी आज भी उस दर्द को याद कर भावुक हो जाती हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि उमर खालिद और शरजील इमाम के खिलाफ प्रथमदृष्टया साजिश के सबूत मौजूद हैं, इसलिए इस स्तर पर जमानत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी आरोपियों की भूमिका एक जैसी नहीं है और हर मामले को अलग-अलग आधार पर देखा जाना चाहिए। दिल्ली दंगा पीड़ितों का कहना है कि न्याय की यह लड़ाई सिर्फ सजा की नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी हिंसा दोबारा न हो, इस भरोसे की भी है।
