54 गुना तक बढ़ा दिल्ली का आरक्षित वन क्षेत्र, अब रिज की 5363 हेक्टेयर जमीन को कानूनी सुरक्षा
दिल्ली में आरक्षित वन क्षेत्र में 54 गुना की वृद्धि हुई है, जो अब 5,363 हेक्टेयर तक पहुंच गया है। ...और पढ़ें

दिल्ली रिज। आर्काइव
HighLights
दिल्ली में आरक्षित वन क्षेत्र में 54 गुना की भारी वृद्धि।
रिज की 5,363 हेक्टेयर भूमि को अब कानूनी सुरक्षा प्राप्त।
अतिक्रमण, अवैध निर्माण और पेड़ों की कटाई पर लगेगी रोक।
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। दिल्ली में रिज एवं अन्य वन क्षेत्रों को अतिक्रमण, अवैध निर्माण और पेड़ों की कटाई से बचाने के लिए आरक्षित वन का दायरा तेजी से बढ़ाया जा रहा है।
दिल्ली सरकार द्वारा जारी किए गए आरक्षित वन क्षेत्र के नए आंकड़े बताते हैं कि पिछली सरकारों के दौरान जहां महज 96.16 हेक्टेयर जमीन को आरक्षित वन के रूप में अधिसूचित किया गया था, वहीं मौजूदा सरकार के कार्यकाल में यह आंकड़ा बढ़कर 5,267.009 हेक्टेयर पहुंच गया है।
यानी आरक्षित वन क्षेत्र में करीब 54 गुना की बढ़ोतरी हुई है।

दिल्ली सरकार के मुताबिक, अब उत्तरी रिज की 112.328 हेक्टेयर अतिरिक्त जमीन को भी आरक्षित वन के रूप में अधिसूचित किया जा रहा है। इसके बाद दिल्ली में आरक्षित वन का कुल क्षेत्रफल 5,363.169 हेक्टेयर (करीब 13,252 एकड़) हो जाएगा।
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दक्षिणी रिज की 400 हेक्टेयर जमीन भी दायरे में
इससे पहले पिछले महीने सरकार ने दक्षिणी रिज की लगभग 400 हेक्टेयर (1,000 एकड़) अतिरिक्त जमीन को आरक्षित वन घोषित करने की मंजूरी दी थी। रिज दिल्ली के हरित आवरण के साथ-साथ भूजल संरक्षण, जैव विविधता और शहर के पर्यावरणीय संतुलन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है।
अधिसूचना के बाद बढ़ेगा कानूनी संरक्षण
किसी जमीन के आरक्षित वन घोषित होने के बाद उस पर वन कानूनों के तहत अधिक कड़ा संरक्षण लागू होता है। इससे अतिक्रमण, अवैध निर्माण और पेड़ों की कटाई जैसी गतिविधियों पर कार्रवाई का कानूनी आधार मजबूत होता है। सरकार का कहना है कि रिज की अधिक से अधिक जमीन को कानूनी सुरक्षा के दायरे में लाने से दिल्ली के प्राकृतिक हरित क्षेत्र को संरक्षित करने में मदद मिलेगी।
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हालांकि, आरक्षित वन की अधिसूचना के साथ जमीन पर वास्तविक कब्जे और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी। सिर्फ कागजों पर वन क्षेत्र बढ़ाने के बजाय इन इलाकों की जमीन पर प्रभावी निगरानी और संरक्षण सुनिश्चित करना सरकार के लिए अगली बड़ी चुनौती होगी।
