PWD की लापरवाही से केंद्र तक नहीं पहुंची परियोजनाओं की सही जानकारी, 500 करोड़ से अधिक की योजनाओं पर अड़चन
पीडब्ल्यूडी अधिकारियों की लापरवाही के कारण दिल्ली सरकार केंद्र से निर्माणाधीन परियोजनाओं के लिए मदद नहीं ले पा रही है। ...और पढ़ें

एआई जेनेरेटेड इमेज।
HighLights
पीडब्ल्यूडी अधिकारियों ने डी-पीएमजी पोर्टल प्रशिक्षण में भाग नहीं लिया।
गलत जानकारी अपलोड होने से केंद्र सरकार की मदद नहीं मिल पाई।
दिल्ली की 500 करोड़ से अधिक की कई परियोजनाएं प्रभावित हुईं।
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। केंद्र सरकार जिन प्रस्तावित परियोजनाओं पर काम शुरू करने या निर्माणाधीन परियोजनाओं में आ रही अड़चनों को दूर करने में अपना योगदान दे सकती थी, लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधिकारियों की लापरवाही से दिल्ली सरकार इसका लाभ नहीं ले सकी।
इसका कारण पीडब्ल्यूडी द्वारा इन परियोजनाओं के बारे में सही जानकारी डी-पीएमजी (दिल्ली प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप) पोर्टल पर अपलोड नहीं करना है।
ऐसे में केंद्र सरकार तक सही जानकारी नहीं पहुंच सकी और केंद्र सरकार इन परियोजनाओं की जटिलताआें के बारे में अपना योगदान नहीं दे सकी। अधिकारियोें की गलतियों का कारण पोर्टल के लिए प्रस्तावित प्रशिक्षण न लेना भी माना जा रहा है।
दरअसल अधिकारी निर्माणाधीन परियोजनाओं की जानकारी देने के लिए बनाए गए डी-पीएमजी (दिल्ली प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप) पोर्टल में पिछले दो प्रशिक्षण सत्रों में 40 प्रतिशत से भी कम संख्या में शामिल हुए। इस लापरवाही का नतीजा उन्हें आैर विभाग का उठाना पड़ रहा है।
प्रशिक्षण में शामिल नहीं होेने से जानकारी के अभाव में गलतियां कर रहे है और आधी अधूरी जानकारी पोर्टल पर अपलोड कर रहे हैं।
विभागीय जानकारों की मानें तो अगर निर्माणाधीन परियोजनाओं की अभियंताओं ने सही जानकारी पोर्टल पर अपलोड की जाती है तो केंद्र सरकार भी अपने स्तर पर समस्याओं के समाधान के लिए कोशिश करती है, दिल्ली सरकार की छह से अधिक निर्माणाधीन परियोजनाएं ऐसी हैं जिनकी लागत 500 करोड़ से अधिक है।
विभाग ने पोर्टल के इस्तेमाल में गलतियां रोकने के लिए फिर से प्रशिक्षण दिए जाने का फैसला लिया है। केंद्रीय पीएमजी टीम की ओर से यह प्रशिक्षण 24 अगस्त को आयोजित किया जाएगा।
पीडब्ल्यूडी ने संबंधित अधिकारियों को प्रशिक्षण में अनिवार्य रूप से शामिल होने के लिए निर्देशित किया है। बता दें कि पीएमजी (प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप) भारत सरकार का एक डिजिटल पोर्टल है। इस पोर्टल पर 500 करोड़ आैर इससे अधिक राशि वाली निर्माणाधीन परियोजनाओं की जानकारी अपलोट करने का प्रविधान है।
500 करोड़ रुपये से अधिक की प्रमुख पीडब्ल्यूडी परियोजनाएं
- लोक नायक अस्पताल का 22 मंजिला नया ब्लाक: मूल लागत 533.91 करोड़ रुपये थी, जो अब बढ़कर लगभग 1,268.85 करोड़ रुपये हो गई है। परियोजना पर वर्ष 2021 से काम चल रहा है।
- बारापुला फेज-तीन एलिवेटेड कॉरिडोर: परियोजना का संशोधित बजट 1,635 करोड़ रुपये है। वर्ष 2015 से काम चल रहा है।
- रघुबीर नगर का आइसीयू अस्पताल परिसर: परियोजना की लागत बढ़कर करीब 531.58 करोड़ रुपये हो गई है। वर्ष 2021 से काम चल रहा है।
- जीटीबी अस्पताल विस्तार परियोजना: अनुमानित लागत करीब 500 करोड़ रुपये है। अस्पताल की मूल क्षमता 881 बेड थी, जिसे बढ़ाकर 1,912 बेड करने की योजना है। परियोजना को सितंबर 2021 में मंजूरी मिली थी।
- नया जिला अदालत परिसर, रोहिणी सेक्टर-26: परियोजना की अनुमानित लागत करीब 663 करोड़ रुपये है।
- द्वारका स्थित इंदिरा गांधी अस्पताल का मेडिकल कॉलेज: परियोजना की लागत 800 करोड़ रुपये से अधिक है। कई वर्ष बीतने के बाद भी काम शुरू नहीं हो सका है। बजट का इंतजार है।
- दिल्ली खेल विश्वविद्यालय, घेवरा: परियोजना का बजट तीन गुना बढ़कर करीब 3,000 करोड़ रुपये हो चुका है, लेकिन योजना अब तक जमीन पर नहीं उतर सकी है। बजट के अलावा परियोजना के बीच आ रहे हरे पेड़ भी बड़ी चुनौती हैं।
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