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दिल्ली में प्रदूषण के खिलाफ DPCC का 'महा प्लान', AQI में 15% सुधार का लक्ष्य; कूड़े के पहाड़ों का होगा सफाया

Published: Mon, 20 Apr 2026 08:20 PM (IST)

दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) ने वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए कमर कस ली है। वर्ष 2026 तक दिल्ली ...और पढ़ें

दिल्ली में प्रदूषण के खिलाफ डीपीसीसी की तैयारी। फोटो: आर्काइव

दिल्ली में प्रदूषण के खिलाफ डीपीसीसी की तैयारी। फोटो: आर्काइव

HighLights

  1. डीपीसीसी का लक्ष्य AQI में 15% का सुधार

  2. पीएम 2.5 और पीएम 10 के स्तर में कटौती का लक्ष्य

  3. कूड़े के पहाड़ों को कम करने का लक्ष्य

राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की गहन समीक्षा के बाद दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) ने सुधार के लिए कमर कस ली है। राजधानी में प्रदूषण के खतरनाक स्तर को कम करने के लिए सीएक्यूएम को विस्तृत स्टेट एक्शन प्लान भी भेजा जा चुका है।

डीपीसीसी ने लक्ष्य रखा है कि वर्ष 2026 के अंत तक दिल्ली के औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में पिछले पांच वर्षों के औसत की तुलना में 15 प्रतिशत का सुधार किया जाए। इसके साथ ही, पीएम 2.5 के स्तर में 15 और पीएम 10 के स्तर में 20 प्रतिशत की कटौती करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

आंकड़ों के अनुसार दिल्ली का औसत एक्यूआई 2024 में 209 और 2025 में 191 था। नए प्लान के तहत 2026 में इसे घटाकर 177 तक लाना है। पीएम 2.5 की बात करें तो, इसका वार्षिक औसत 2024 में 110 एवं 2025 में 99 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था, जिसे 2026 में 96 तक सीमित करने का प्रयास होगा। वहीं, पीएम 10 का स्तर 225 (2024) और 209 (2025) से घटाकर 177 तक लाने का लक्ष्य है।

प्रदूषण नियंत्रण के लिए समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता

डीपीसीसी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि दिल्ली में प्रदूषण की समस्या कई स्रोतों से जुड़ी है। इसलिए इसके समाधान के लिए परिवहन, निर्माण गतिविधियों, अपशिष्ट प्रबंधन, उद्योग और सड़क की धूल पर समन्वित कार्रवाई आवश्यक है। इसके तहत इलेक्ट्रिक बसों की बड़े पैमाने पर शुरुआत, मेट्रो और नमो भारत कॉरिडोर का विस्तार, ई वाहन चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा दिया जाएगा।

ओखला, भलस्वा और गाजीपुर के लैंडफिल साइटों (कूड़े के पहाड़ों) को तेजी से कम करने का लक्ष्य रखा गया है। लक्ष्य ओखला लैंडफिल पर कूड़े का बोझ 23 लाख मीट्रिक टन से कम कर 7.2 लाख मीट्रिक टन करना है।

निगरानी स्टेशनों की संख्या हो चुकी है 46

धूल नियंत्रण के लिए मैकेनिकल रोड-स्वीपिंग मशीनों का व्यापक उपयोग, सड़कों के किनारे हरियाली बढ़ाना और निर्माण स्थलों पर सख्त नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा। शहर में वायु गुणवत्ता की निगरानी के लिए मौजूदा 40 स्टेशनों की संख्या बढ़ाकर 46 की जा चुकी है।

इसके अलावा डीपीसीसी में रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया भी तेजी से आगे बढ़ रही है। दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (डीएसएसएसबी) द्वारा 85 पदों (ग्रुप-बी और सी) पर भर्ती जारी है। वरिष्ठ पर्यावरण अभियंता और पर्यावरण अभियंता के 28 पदों पर सीधी भर्ती चल रही है। तीन माह में प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।

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