दिल्ली पुलिस ने फिर हासिल किया देश में पहला स्थान, क्रइम-क्रिमिनल ट्रैकिंग में टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल में अव्वल
दिल्ली पुलिस ने जनवरी में सीसीटीएनएस इम्प्लीमेंटेशन में देशभर में पहला स्थान हासिल किया है। यह लगातार चौथी बार है ...और पढ़ें

CCTNS इम्प्लीमेंटेशन में दिल्ली पुलिस देश में अव्वल। फोटो: सांकेतिक

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जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। CCTNS (Crime and Criminal Tracking Network and Systems) इम्प्लीमेंटेशन में दिल्ली पुलिस ने बीते जनवरी में पूरे देश में फिर पहला स्थान हासिल किया। यानी दिल्ली पुलिस एक बार फिर टेक्नोलाॅजी से चलने वाली पुलिसिंग और डाटा गवर्नेंस में अपना वर्चस्व दिखाया है।
सीसीटीएनएस प्रगति डैशबोर्ड पर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दिल्ली पुलिस ने पहला स्थान प्राप्त किया है। पिछले साल दिल्ली पुलिस ने लगातार तीन महीने अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर तक 100 प्रतिशत स्कोर के साथ पहला स्थान हासिल किया था।
इस उपलब्धि को बनाए रखते हुए, दिल्ली पुलिस ने जनवरी की रैंकिंग में भी पहला स्थान प्राप्त किया। इससे डाटा गवर्नेंस और डिजिटल पुलिसिंग में इसकी लगातार बेहतरीन उपलब्धी की पुष्टि होती है।
विशेष आयुक्त क्राइम ब्रांच देवेश चंद्र श्रीवास्तव का कहना है कि यह उपलब्धि नवीन न्याय संहिता को लागू करने और क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स और इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम के तहत नेशनल ई-गवर्नेंस प्लेटफाॅर्म के असरदार इस्तेमाल में दिल्ली पुलिस के लगातार उपलब्धि को दिखाती है।
प्रगति डैशबोर्ड, जिसे गृह मंत्रालय और नेशनल क्राइम रिकाॅर्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) द्वारा माॅनिटर किया जाता है, अलग-अलग नेशनल-लेवल एप्लीकेशन पर अपलोड किए गए डाटा की क्वाॅलिटी, क्वांटिटी, टाइमलाइन और एक्यूरेसी के आधार पर राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों का मूल्यांकन करता है।
इस उपलब्धि पर पुलिस आयुक्त सतीश गोलछा ने क्राइम ब्रांच सीसीटीएनएस टीम, सभी ज़िलों व यूनिट्स को उनके लगातार शानदार काम के लिए बधाई दी।
उन्होंने सभी लेवल पर अधिकारियों के प्रोफेशनलिज्म, डेडिकेशन और टीमवर्क की तारीफ की और उन्हें टेक्नोलाजी पर आधारित पुलिसिंग और नागरिक-केंद्रित सर्विस डिलीवरी को और मजबूत करने के लिए हिम्मत दी।
इन पैरामीटर पर होता है चयन
- सीसीटीएनएस के तहत पुलिस थानों की कनेक्टिविटी।
- डिजास्टर रिकवरी सेंटर की स्थापना।
- कोर एप्लीकेशन साॅफ्टवेयर के मुख्य माॅड्यूल में एंट्री।
- लेगेसी डेटा का माइग्रेशन।
- स्टेट डेटा सेंटर में डेटा सिंक्रोनाइजेशन और नेशनल डेटा सेंटर में रेप्लिकेशन।
- कोर्ट में एफआईआर का इलेट्राॅनिक सबमिशन।
- स्टेट सिटीजन पोर्टल के जरिए सिटिजन सर्विस।
- आईसीजेएस स्टेट एम्पाॅवर्ड और स्टेट एपेक्स कमेटियों की रेगुलर मीटिंग।
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