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यूट्यूबर्स के फेक कंटेंट पर दिल्ली पुलिस सख्त, 20-25 जवानों की टीम तैनात, CCTV से की जा रही पहचान

Published: Mon, 12 Oct 2026 08:42 PM (IST)

दिल्ली पुलिस को हालिया प्रदर्शनों के दौरान भ्रामक पोस्ट फैलाने वाले यूट्यूबरों से नई चुनौती का सामना करना पड़ रहा ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर, एआई जेनरेटेड

प्रतीकात्मक तस्वीर, एआई जेनरेटेड

HighLights

  1. दिल्ली पुलिस को यूट्यूबरों से भ्रामक पोस्ट की चुनौती।

  2. फर्जी खबरों का खंडन करने को विशेष टीमें गठित।

  3. भविष्य में फेक न्यूज पर कड़ी कार्रवाई की तैयारी।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। नई दिल्ली में हाल में हुए विभिन्न राजनीतिक दलों और संगठनों (आम आदमी पार्टी, कांग्रेस, वामपंथी संगठनों व सीजेपी) के प्रदर्शनों के दौरान एक नया और गंभीर संकट सामने आया है।

इस बार पुलिस और सुरक्षा बलों के लिए केवल प्रदर्शनकारियों को संभालना ही नहीं, बल्कि भ्रामक पोस्ट डालने वाले कुछ यूट्यूबरों की हरकतों पर लगाम लगाना भी बड़ी सिरदर्दी बन गया।

अलग-अलग राज्यों से आए थे लोग

दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शन स्थलों पर सैकड़ों की संख्या में ऐसे लोग घूमते दिखे जो खुद को पेशेवर यूट्यूबर या पत्रकार बता रहे थे, लेकिन असल में उनके चंद समय के लिए इस काम में शामिल हाेने के बारे में पुलिस को जानकारी मिली है।

ये लोग अलग-अलग राज्यों से आए थे, पुलिस इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि ये किस-किस राज्य से जुड़े हैं।

दिल्ली-पुलिस की छवि को धूमिल करने की मंशा

पुलिस अधिकारी का कहना है कि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों और अर्धसैनिक बलों द्वारा प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई के दौरान भ्रामक पोस्ट करने वाले यूट्यूबरों द्वारा उनकी तस्वीरें और वीडियो खींच उन्हें एडिट करके और बुरी तरह तोड़-मरोड़कर इंटरनेट मीडिया पर पोस्ट किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य सरकार और दिल्ली पुलिस की छवि को धूमिल करना था।

जनता के बीच भ्रम फैलाने की कोशिश

सुरक्षा बलों को नीचा दिखाने और जनता के बीच भ्रम फैलाने के लिए इन लोगों ने इंटरनेट मीडिया पर भ्रामक और मनगढ़ंत खबरें फैलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

इंटरनेट मीडिया पर लगातार फैल रहे इन झूठे दावों और वीडियो का मुकाबला करने के लिए दिल्ली पुलिस को मजबूरन एक विशेष व्यवस्था करनी पड़ी। पुलिस विभाग ने 20 से 25 पुलिसकर्मियों की विशेष टीमें बनाई हैं, जो चौबीसों घंटे इंटरनेट मीडिया पर नजर रखती हैं और फर्जी पोस्ट का तुरंत खंडन करती हैं।

पहले 56 इस बार 49 भ्रामक पोस्ट डाले

पुलिस अधिकारी के मुताबिक जुलाई में सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान यूट्यूबरों ने 56 फर्जी पोस्ट कर केंद्र सरकार व दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों की छवि खराब करने की कोशिश की।

वहीं इस बार दो से 11 अक्टूबर तक 49 भ्रामक पोस्ट डालकर छवि खराब करने की कोशिश की गई। दिल्ली पुलिस ने तुरंत एक्स व इंस्टाग्राम पर इनका खंडन किया।

भविष्य की नई रणनीति

इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए अब दिल्ली पुलिस उच्च स्तर पर एक नई रणनीति तैयार करने पर विचार कर रही है, ताकि भविष्य में होने वाले प्रदर्शनों और आयोजनों के दौरान इस तरह के यूट्यूबरों और इंटरनेट मीडिया पर फेक न्यूज फैलाने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सके।

इंटरनेट मीडिया का दुरुपयोग

दिल्ली पुलिस प्रवक्ता एडिशनल पुलिस कमिश्नर राजीव रंजन का कहना है कि डिजिटल युग में जहां इंटरनेट मीडिया आवाज उठाने का एक सशक्त माध्यम है, वहीं इसका दुरुपयोग करके सनसनीखेज और झूठी खबरें फैलाना सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

ऐसा माना जा रहा है राजनीतिकों पार्टियों व संगठन के लिए काम करने वाले यूट्यूबरों की वजह से वे जानबूझ कर पुलिस कार्रवाई में बाधा डालने के लिए इस तरह की हरकतें करते रहे।

इस समस्या से बचने के लिए तीन स्तरों पर काम

भविष्य में होने वाले प्रदर्शनों और आयोजनों के दौरान इस तरह की स्थिति से बचने के लिए दिल्ली पुलिस मुख्य रूप से तीन स्तरों पर काम कर रही है। पुलिस प्रदर्शनों के दौरान कैप्चर किए गए वीडियो फुटेज का विश्लेषण करके यूट्यूबरों का डाटाबेस  तैयार कर रही है।

भविष्य के प्रदर्शनों में वास्तविक मीडियाकर्मियों और फर्जी कंटेंट क्रिएटर्स के बीच अंतर करने के लिए ग्राउंड पर सुरक्षा बल एक स्पष्ट वेरिफिकेशन प्रोटोकाल लागू करने पर विचार कर रहे हैं।

अराजक माहौल में कुछ जिम्मेदार क्रिएटर्स

दिल्ली पुलिस का कहना है कि इस अराजक माहौल के बीच सकारात्मक बदलाव भी देखने को मिल रहा है। सीजेपी की पत्रकारवार्ता में कुछ ऐसे जिम्मेदार यूट्यूबर भी दिखे जिन्होंने सनसनीखेज दावे करने वालों से सीधे तीखे सवाल-जवाब किए।

इन दूसरे क्रिएटर्स ने मौके पर तथ्यात्मक और तार्किक सवाल पूछकर उन लोगों को पूरी तरह बेनकाब किया जो बिना सोचे-समझे गलत तथ्य परोस रहे थे। उन्होंने इन व्लॉगर्स को स्पष्ट रूप से आईना दिखाया कि कैसे टीआरपी और लाइक्स के लालच में पत्रकारिता और जनहित की सीमाओं को तार-तार किया जा रहा है।

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