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जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की लिस्ट से क्यों हटाया गया? दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में दिया जवाब

Published: Tue, 03 Nov 2026 11:32 PM (IST)

दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से केंद्रीय गृह मंत्रालय की समिति की सिफारिशों पर हटाया गया है।

सुप्रीम कोर्ट और जंतर-मंतर, फोटो-एआई

सुप्रीम कोर्ट और जंतर-मंतर, फोटो-एआई

HighLights

  1. जंतर-मंतर को गृह मंत्रालय की समिति ने हटाया।

  2. सार्वजनिक सुरक्षा, यातायात बाधा मुख्य कारण बताए।

  3. रामलीला मैदान जैसे वैकल्पिक स्थल सुझाए गए।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने के मामले पर दिल्ली पुलिस ने मंगलावर को सुप्रीम कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखा है।

दिल्ली पुलिस ने बताया कि यह फैसला केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से गठित समिति की सिफारिशों पर विचार करने के बाद लिया गया है।

पुलिस के मुताबिक गृह मंत्रालय की ओर से गठित समिति ने पाया था कि यह जगह विरोध प्रदर्शनों के लिए सही नहीं है। समिति की ओर से कहा गया कि किसी भी सार्वजनिक सड़क को स्थायी विरोध स्थल के रूप में निर्धारित करना सही नहीं है।

दिल्ली पुलिस आयुक्त ने क्या कहा?

दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने स्वाति सिंह की याचिका पर प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत के समक्ष दाखिल जवाबी हलफनामे के दौरान कहा कि सार्वजनिक सुरक्षा, ट्रैफिक जाम, आपात सेवाओं की पहुंच और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा की चिंता को देखते हुए यह कदम उठाया गया।

उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर को विरोध स्थल की सूची से हटाने का फैसला एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट के नौ अक्टूबर के आदेश के अनुपालन में नहीं था। यह प्रस्ताव काफी समय से सरकार के विचाराधीन था।

हलफनामे के अनुसार, समिति का गठन 26 अगस्त को किया गया था और उसकी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के नौ अक्टूबर के आदेश से काफी पहले सितंबर में गृह मंत्रालय को मिली थी।

प्रदर्शन के कारण आपात सेवाएं बाधित

अनुराग कुमार ने कहा कि जंतर-मंतर पर हर साल 1300 से अधिक विरोध-प्रदर्शन किए जाते हैं। जिसमें भारी संख्या में लोग पहुंचते हैं, इसके कारण अक्सर एंबुलेंस एवं दमकल जैसी आपात सेवाएं प्रभावित होती है और भगदड़ का भी खतरा रहता है। उन्होंने संवेदनशील इलाकों पर पड़ने वाले असर के बारे में बी जिक्र किया।

गौरतलब है कि गृह मंत्रालय की समिति ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल से हटाने के साथ रामलीला मैदान, सीबीडी ग्राउंड और बुराड़ी ग्राउंड को वैकल्पिक स्थल के रूप में सुझाया था।

जुलाई जैसी स्थिति से बचने के धारा-163

दिल्ली पुलिस आयुक्त ने अक्टूबर में विरोध-प्रदर्शनों के दौरान भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा-163 के तहत लगाई गई पाबंदियों को भी सही ठहराया।

उन्होंने कहा कि इलाके की संवेदनशीलता और जुलाई, 2026 में विरोध-प्रदर्शनों के पिछले दौर में हुई घटनाओं को देखते हुए धारा-163 के तहत जरूरी आदेश जारी किए गए। 

उन्होंने कहा कि नई दिल्ली में सभी जगहों पर एक जैसी व्यापक पाबंदी नहीं लगाई गई थी। जंतर-मंतर को इन प्रतिबंधों से बाहर रखा गया था क्योंकि वहां पूर्व लिखित अनुमति और शाम पांच बजे की समय-सीमा के अधीन प्रदर्शन की अनुमति थी।

ममता बनर्जी समेत अन्य नेताओं को हिरासत में नहीं लिया

वरिष्ठ अधिवक्ता डा. मेनका गुरुस्वामी की याचिका के जवाब में दाखिल जवाबी हलफनामे में संयुक्त पुलिस आयुक्त सुरेंद्र कुमार ने कहा कि 10 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन के दौरान तृणमूल कांग्रेस नेता ममता बनर्जी, डेरेक ओ’ब्रायन, डोला सेन और अन्य नेताओं को न तो हिरासत में लिया गया था और न ही गिरफ्तार किया गया था।

बीएनएसएस की धारा-163 के तहत जारी निर्देशों के कथित उल्लंघन के कारण उन्हें सिर्फ प्रदर्शन स्थल से हटाया गया था। उन्होंने कहा कि याचिका मूल रूप से बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के स्वरूप की थी और इसमें मांगी गई राहत पहले ही दी जा चुकी है।

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