यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 15, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
IPS Sanjay Arora: दिल्ली पुलिस कमिश्नर संजय अरोड़ा ने किससे सीखा था जांच-पड़ताल का तरीका? सालों बाद खोला राज
IPS Sanjay Arora दिल्ली पुलिस कमिश्नर संजय अरोड़ा ने कहा कि आपको उनसे या किसी से भी नई बातें सीखने ...और पढ़ें

नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। IPS Sanjay Arora : दिल्ली पुलिस आयुक्त संजय अरोड़ा (Delhi Police Commissioner Sanjay Arora) ने झाड़ौदा कलां में आयोजित समारोह में प्रशिक्षु पुलिसकर्मियों को संबोधित करते हुए अपने पुराने अनुभव साझा किए।
उन्होंने कहा कि वर्ष 1988 में वे पुलिस में भर्ती हुए। प्रशिक्षण के एक वर्ष बाद यानी 1989 में उन्हें व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिए क्षेत्र में भेजा गया। सबसे पहले उनकी तैनाती कांस्टेबल रैंक के लिए हुई। इस रैंक में वे तीन दिन तैनात रहे। इस दौरान साइकिल से वे इलाके में गश्त करते रहे।
तमिलनाडु में एक SI के जिम्मे होता है पूरे थाने का प्रभार
आयुक्त ने कहा कि तीन दिन कांस्टेबल, सात दिन हेड कांस्टेबल, 15 दिन मुंशी के पद पर उन्होंने कार्य किया। हेड कांस्टेबल की तैनाती के दौरान साइकिल की जगह उन्हें थाने में मोपेड दी गई। फिर डेढ़ महीना वे सब इंस्पेक्टर रहे। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में सब इंस्पेक्टर के जिम्मे पूरे थाने का प्रभार होता है। दिल्ली में इस पद को एसएचओ कहा जाता है। इसके बाद तीन महीने उनकी तैनाती सर्किल इंस्पेक्टर के पद पर रही।
कांस्टेबल ने अपने व्यावहारिक ज्ञान से अर्जित बातें बताईं थीं संजय अरोड़ा को
आयुक्त ने कहा कि सब इंस्पेक्टर के पद पर तैनाती के दौरान उन्हें पहला केस मोटरसाइकिल चोरी का मिला, जब वे घटनास्थल पर पहुंचे तो प्रशिक्षण के दौरान सीखी गईं तमाम बातों पर अमल किया। अंत में उसी थाने में तैनात एक कांस्टेबल ने उन्हें अपने व्यावहारिक ज्ञान से अर्जित बातें बताईं। उन्होंने उन्हें समझाया कि आप आसपास के थाना क्षेत्रों से वाहन चोरों के बारे में जानकारी एकत्र करें, जेलों से हाल ही में छूटे कैदियों जो वाहन चोरी में लिप्त हों, उनके बारे में जानकारी जुटाएं।
हर रोज आएंगी नई चुनौतियां
समारोह के दौरान प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यहां अकादमी से निकलने के बाद जब आपकी तैनाती क्षेत्र में होगी तब आपके सामने रोजाना नई चुनौतियां आएंगी। कई ऐसी बातों से आपका सामना होगा जहां आपको व्यवहारिक ज्ञान की जरूरत पड़ेगी। यह व्यावहारिक ज्ञान आपको अनुभवी लोगों से लेने की जरूरत पड़ेगी। इस ज्ञान के लिए जरूरी नहीं है कि आप अपने से उपर के रैंक के अधिकारी से ही कुछ सीखें, कई बार आपसे रैंक में काफी नीचे के कर्मी से भी उपयोगी बातें सीखने को मिलती हैं।
