दिल्ली में 30.06 लाख की साइबर ठगी का भंडाफोड़, चीनी ऑपरेटरों से जुड़े सिंडिकेट के पांच जालसाज गिरफ्तार
क्राइम ब्रांच ने 30.06 लाख की साइबर ठगी करने वाले एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जिसमें चीनी आपरेटर्स ...और पढ़ें

एआई जेनेरेटेड इमेज।
HighLights
क्राइम ब्रांच ने 30.06 लाख की साइबर ठगी का गिरोह पकड़ा।
गिरोह में चीनी आपरेटर्स, टेलीग्राम और क्रिप्टो हैंडलर शामिल थे।
मुख्य हैंडलर उदित त्यागी सहित पांच जालसाज गिरफ्तार किए गए।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। क्राइम ब्रांच ने 30.06 लाख की साइबर ठगी मामले में शामिल एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जिसमें चीनी आपरेटर्स, टेलीग्राम-आधारित आपरेटर्स, म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराने वाले और क्रिप्टोकरेंसी हैंडलर्स शामिल है।
पुलिस ने इस गिरोह के मुख्य हैंडलर समेत पांच जालसाजों को गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान मुख्य हैंडलर उदित त्यागी, अनीश, अक्षित सिरोही, हकम अली और मोनिश के रूप में हुई है, जबकि एके नाम के व्यक्ति की तलाश जारी है, जो पूरे सिंंडिकेट में तालमेल बैठाकर रखता था।
यह गिरोह पीड़ितों को वाट्सएप ग्रुप्स, टेलीग्राम चैनल्स और फर्जी आनलाइन निवेश प्लेटफार्म्स के जरिये मोटा मुनाफा कमाने का लालच देकर ठगी करते थे। इस सिंडिकेट के बारे में एनसीआरपी पोर्टल पर 35 शिकायतें अभी तक दिल्ली समेत अन्य शहरों में मिली हैं। पुलिस इनसे पूछताछ कर मामले में आगे की जांच कर रही है।
क्राइम ब्रांच के उपायुक्त हर्ष इंदौरा के मुताबिक, बीते वर्ष 18 नवंबर को गौरव रस्तोगी नामक पीड़ित की शिकायत पर 30.06 लाख की धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया था।
उनके साथ वाट्सएप ग्रुप, टेलीग्राम चैनल और फर्जी आनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफार्म के जरिए धोखाधड़ी की थी। पुलिस टीम को जांच में पता चला कि सिंडिकेट बड़े स्तर पर ठगी करता था, जिसमें चीनी आपरेटर्स/डेवलपर्स के साथ स्थानीय समन्वयक शामिल थे।
फर्जी ग्रुप से जोड़कर मुनाफा कमाने का देते थे लालच
शुरुआत में लोगों से वाट्सएप के जरिए संपर्क किया जाता था और उन्हें पार्ट-टाइम नौकरी, आसानी से कमाई, इन्वेस्टमेंट के मौके, ट्रेडिंग स्कीम और टास्क-आधारित प्रोग्राम के आफर दिए जाते थे।
लोगों को वाट्सएप ग्रुप में जोड़ा जाता था, जहां भरोसा जमाने के लिए शुरुआत में कुछ मुनाफा दिखाया जाता था। सिंडिकेट धोखाधड़ी से कमाए गए पैसे को एक ही अकाउंट में रखने के बजाय, बिचौलियों के जरिए कई भारतीय म्यूल बैंक अकाउंट्स में भेजा जाता था।
जांच में इन्वेस्टमेंट धोखाधड़ी में शामिल 18 से अधिक फर्स्ट-लेयर अकाउंट्स की पहचान हुई। इन पैसों के अलग अलग तरीके से निकाला गया।
इनके से एक आरोपित मोनीश के फेडरल बैंक में आए पांच लाख रुपये के बारे में पता चला। इस खाते को अक्षत सिरोही और अनीश आपरेट करते थे। इसी तरह से टेलीग्राम ग्रुप्स के जरिए एक क्रिप्टो सेटलमेंट सिस्टम का पता चला, जिसमें विदेशी आपरेटर्स और भारतीय बिचौलिए शामिल थे।
ऐसे पकड़े गए आरोपित
आरोपित उदित त्यागी को जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट से दबोचा गया। वह राजकोट पुलिस का भी वांटेड रहा है। वह 8,16,742 रुपये की आनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी में शामिल रहा है। इससे पूछताछ करने के बाद बाकी सभी आरोपितोंको उनके ठिकाने पर छापेमारी करके गिरफ्तार किया।
पूछताछ में पता चला कि आरोपित अनीश मार्केट लेवल पर काम करता था और सिंडिकेट के इस्तेमाल के लिए लोगों से संपर्क करके बैंक अकाउंट लेने में शामिल था। उसने अकाउंट धारकों के साथ तालमेल बिठाया और धोखाधड़ी से मिले पैसे को इधर-उधर भेजने के लिए ऐसे अकाउंट उपलब्ध कराए।
अक्षित सिरोही आपरेशनल सदस्यों की गतिविधियों पर नजर रखने और वित्तीय ट्रांजेक्शन को कोआर्डिनेट करने में शामिल था। वह म्यूल अकाउंट्स को आपरेट करने से भी जुड़ा पाया गया, जिनके जरिए ठगी की रकम को रूट किया गया था।
हकम अली ने एक वाट्सएप ग्रुप बनाया और चलाया, जिसके जरिए पीड़ितों को धोखाधड़ी वाली निवेश स्कीम में शामिल होने के लिए उकसाया गया। वहीं मोनिश ने अपने फेडरल बैंक अकाउंट का इस्तेमाल फर्स्ट-लेयर बेनिफिशियरी अकाउंट के तौर पर होने दिया।
इस अकाउंट में शिकायतकर्ता से सीधे पांच लाख रुपये आए और बाद में धोखाधड़ी से हासिल पैसे को यूएसडी और चेक के जरिए निकालने या इधर-उधर करने के लिए इसका इस्तेमाल किया गया।
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