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बजट 2026-27: एआई, स्मार्ट सर्विलांस और हाईटेक जांच से बदलेगी दिल्ली पुलिस की तस्वीर; दिया गया 12,846 करोड़ का तोहफा

Published: Sun, 01 Feb 2026 09:16 PM (IST)

दिल्ली पुलिस को 2026-27 के बजट में 12,846.15 करोड़ रुपये मिले हैं, जो पिछले साल से 4.57% अधिक है। यह ...और पढ़ें

आम बजट 2026-27 में दिल्ली पुलिस को पिछले साल की तुलना में बढ़ाकर बजट आवंटित किया गया है। प्रतीकात्मक तस्वीर

आम बजट 2026-27 में दिल्ली पुलिस को पिछले साल की तुलना में बढ़ाकर बजट आवंटित किया गया है। प्रतीकात्मक तस्वीर

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जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राजधानी की कानून व्यवस्था बनाए रखने में दिल्ली पुलिस महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। महानगर में वाहनों के अत्यधिक दबाव के कारण शहर के यातायात प्रबंधन की दिल्ली पुलिस के सामने बड़ी चुनौती रहती है। तकनीक के जमाने में दिल्ली की पुलिसिंग व्यवस्था अब पारंपरिक गश्त, नाकेबंदी और मैनुअल निगरानी तक सीमित नहीं रहेगी। आम बजट 2026-27 में दिल्ली पुलिस को पिछले साल की तुलना में बढ़ाकर बजट आवंटित किया गया है।

इन क्षेत्रों में बजट से होगा सुधार

दिल्ली पुलिस राजधानी की कानून-व्यवस्था को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डाटा एनालिटिक्स और स्मार्ट सर्विलांस के सहारे पूरी तरह तकनीक-आधारित बनाने की दिशा में आगे बढ़ेगी। सुरक्षा, ट्रैफिक नियंत्रण, साइबर क्राइम और जांच व्यवस्था को आधुनिक स्वरूप देने के लिए दिल्ली पुलिस को बढ़ाकर बजट दिया गया है।

बजट में रखा गया हर बात का ख्याल

2026-2027 के आम बजट में दिल्ली पुलिस को 12846.15 करोड़ रुपये दिया गया है। यह राशि पिछले वित्त वर्ष की तुलना में करीब 4.57 प्रतिशत अधिक है। वर्ष 2025-26 में दिल्ली पुलिस को 12,259.16 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। बजट में यह बढ़ोतरी राजधानी की बढ़ती आबादी, ट्रैफिक दबाव, साइबर अपराधों और बदलते अपराध पैटर्न को देखते हुए की गई है।

2026-27 की सबसे अहम विशेषता दिल्ली पुलिस में एआई आधारित इंटेलिजेंस सिस्टम को मजबूत करना होगा। इसके तहत वर्षों से मौजूद अपराध के आंकड़ों, एफआइआर, काल डिटेल्स और लोकेशन डाटा का विश्लेषण कर संभावित अपराधों की पहले से पहचान की जाएगी। एआई की मदद से क्राइम हाट-स्पाट, अपराध के ट्रेंड और पैटर्न का अध्ययन किया जाएगा, जिससे पुलिस समय रहते रणनीति बना सकेगी। पुलिस अधिकारी के अनुसार, प्रेडिक्टिव पुलिसिंग सिस्टम लागू होने से चोरी, झपटमारी, संगठित अपराध और सड़क अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा। इससे न सिर्फ अपराध को रोकने में मदद मिलेगी, बल्कि पुलिस संसाधनों की तैनाती भी ज्यादा सटीक और कारगर हो सकेगी।

स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम से जाम की समस्या होगी कम

दिल्ली की सबसे बड़ी और जटिल समस्याओं में शामिल ट्रैफिक जाम को कम करने के लिए बजट में स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम पर विशेष जोर दिया गया है। राजधानी के प्रमुख चौराहों और व्यस्त सड़कों पर एडेप्टिव ट्रैफिक सिग्नल लगाए जाएंगे, जो सड़क पर मौजूद वाहनों की संख्या के अनुसार खुद को एडजस्ट करेंगे।

इन सिग्नलों को रियल-टाइम ट्रैफिक मानिटरिंग सिस्टम से जोड़ा जाएगा, जिससे कंट्रोल रूम से पूरे ट्रैफिक नेटवर्क पर नजर रखी जा सकेगी। पीक आवर्स के दौरान ट्रैफिक फ्लो को बेहतर बनाने, हादसों को कम करने और आपातकालीन वाहनों को तेज रास्ता देने में यह तकनीक अहम भूमिका निभाएगी। माना जा रहा है कि इससे ट्रैवल टाइम घटेगा और ईंधन की बचत भी होगी।

 कम्युनिकेशन नेटवर्क को आधुनिक बनाने पर जोर

दिल्ली पुलिस के कम्युनिकेशन नेटवर्क को आधुनिक बनाने के लिए भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। वायरलेस सिस्टम, डिजिटल रेडियो और डाटा ट्रांसमिशन नेटवर्क को हाई-स्पीड और ज्यादा सुरक्षित बनाया जाएगा।

कंट्रोल रूम, कमांड सेंटर और फील्ड में तैनात पुलिसकर्मियों के बीच रियल-टाइम कोआर्डिनेशन को मजबूत किया जाएगा। किसी भी इमरजेंसी स्थिति में सूचना तुरंत संबंधित यूनिट तक पहुंचे, इसके लिए एडवांस कम्युनिकेशन टेक्नोलाजी का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे रिस्पांस टाइम कम होगा और घटनास्थल पर पुलिस की पहुंच पहले से ज्यादा तेज हो सकेगी।

सर्विलांस नेटवर्क का होगा विस्तार

राजधानी की सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए सीसीटीवी और स्मार्ट कैमरा नेटवर्क के विस्तार पर भी जोर दिया गया है। संवेदनशील इलाकों, बाजारों, मेट्रो स्टेशनों, सार्वजनिक स्थलों और सीमावर्ती क्षेत्रों में बड़ी संख्या में नए कैमरे लगाए जाएंगे। इन कैमरों को एआई आधारित फेस रिकग्निशन और बिहेवियर एनालिसिस सिस्टम से जोड़ा जाएगा।

पुलिस अधिकारी का कहना है कि मजबूत सर्विलांस नेटवर्क से संदिग्ध गतिविधियों की पहचान तुरंत हो सकेगी और अपराधियों को ट्रैक करना आसान होगा। इससे न केवल अपराध की जांच तेज होगी, बल्कि अपराधियों में भी डर का माहौल बनेगा।

जांच व्यवस्था होगी पूरी तरह हाई-टेक

बजट 2026-27 में दिल्ली पुलिस की जांच क्षमता को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए जाएंगे। संगठित अपराध, आतंकवाद, ड्रग्स नेटवर्क और आर्थिक अपराधों से निपटने के लिए हाई-टेक इन्वेस्टिगेशन टूल्स खरीदे जाएंगे। डिजिटल फारेंसिक लैब, मोबाइल फारेंसिक यूनिट और एडवांस जांच किट्स पर भी ध्यान दिया जाएगा। इससे साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया ज्यादा वैज्ञानिक और सटीक होगी।

साइबर क्राइम से निपटने की तैयारी तेज

डिजिटल युग में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों को देखते हुए बजट में पुलिसकर्मियों की विशेष ट्रेनिंग पर भी जोर दिया जाएगा। आनलाइन ठगी, फिशिंग, डाटा चोरी, इंटरनेट मीडिया अपराध और क्रिप्टो फ्राॅड जैसे मामलों से निपटने के लिए साइबर सेल को एडवांस साफ्टवेयर और तकनीकी संसाधन दिए जाएंगे। विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जरिए पुलिसकर्मियों को नई तकनीकों और डिजिटल अपराधों के बदलते तरीकों से अवगत कराया जाएगा, ताकि साइबर अपराधियों पर प्रभावी कार्रवाई की जा सके।

पुलिसकर्मियों के वेलफेयर पर भी सरकार की नजर

बजट का एक अहम हिस्सा पुलिसकर्मियों की सुविधाओं और वेलफेयर से जुड़ा है। आवास, मेडिकल सुविधाएं, ट्रेनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और कार्य परिस्थितियों को बेहतर बनाने की योजना बनाई गई है। सरकार का मानना है कि जब पुलिसकर्मी बेहतर माहौल में काम करेंगे, तभी वे पूरी क्षमता के साथ जनता की सेवा कर पाएंगे।

फाेरेंसिक इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेगी मजबूती

अपराध की जांच में फाेरेंसिक लैब की भूमिका को देखते हुए बजट में 250 करोड़ रुपये फाेरेंसिक इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए रखे गए हैं। इसमें से 212 करोड़ रुपये लैब, भवन, दफ्तर और अन्य सुविधाओं के विकास पर खर्च किए जाएंगे। पिछले बजट में इसके लिए 44.06 करोड़ रुपये दिया गया था। क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (सीसीटीएनएस) के लिए इस बार 587.97 करोड़ रुपये दिया गया है।

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